चुनाव आते ही फिर गूंजा दामोदर सेतु का मुद्दा, 350 करोड़ का बजट और 300 गांवों के लोगों का दर्द, देखें Video

Damodar River Bridge Issue: आसनसोल चुनाव 2026 में दामोदर नदी पर पुल निर्माण सबसे बड़ा मुद्दा बन गया है. बीजेपी और टीएमसी उम्मीदवारों ने किया जीत के बाद पुल बनाने का वादा. बांस के पुल पर टिकी 300 गांवों की जिंदगी का पूरा सच यहां पढ़ें और देखें वीडियो.
Damodar River Bridge Issue| संतोष विश्वकर्मा, आसनसोल : पश्चिम बर्धमान और बांकुड़ा-पुरुलिया को जोड़ने वाली दामोदर नदी पर एक स्थायी पुल का निर्माण अब केवल स्थानीय मांग नहीं, 2026 के विधानसभा चुनाव का सबसे बड़ा ‘सियासी हथियार’ बन गया है. वर्षों से चल रहा संघर्ष अब एक व्यापक जन आंदोलन का रूप ले चुका है.
आसनसोल के उम्मीदवारों के एजेंडे में आया पुल
आसनसोल उत्तर और दक्षिण दोनों ही विधानसभा सीटों के दिग्गजों ने अपने चुनावी एजेंडे में इस पुल को पहले स्थान पर रखा है. लेकिन, सवाल वही है कि क्या इस बार यह पुल चुनावी वादों की भेंट चढ़ जायेगा या वास्तव में जनता को जान जोखिम में डालने से मुक्ति मिलेगी?
सियासी दांव : बीजेपी का सर्वे बनाम तृणमूल का वादा
दामोदर नदी पर पुल निर्माण को लेकर सभी राजनीतिक दलों ने अपनी बिसात बिछा दी है. आसनसोल दक्षिण की भाजपा प्रत्याशी अग्निमित्रा पॉल ने ऐलान किया है कि उनकी पहली प्राथमिकता दामोदर सेतु का निर्माण होगी. इसके पहले भी अग्निमित्रा पॉल ने केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के जरिये सर्वे कराने की कोशिश की थी, लेकिन भौगोलिक जटिलताओं के कारण फाइल आगे नहीं बढ़ सकी.
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टीएमसी का मास्टरप्लान
सालतोड़ा और आसनसोल उत्तर के तृणमूल उम्मीदवारों ने भी इसे अपने घोषणा पत्र में प्रमुखता दी है. बामनटोड़ा फेरी घाट से नेहरू पार्क तक करीब डेढ़ किलोमीटर लंबे पुल का वादा किया गया है.
बांस के पुल पर निर्भर है 300 गांवों की जिंदगी
आसनसोल और बर्नपुर के रिवरसाइड घाट पर बना अस्थायी बांस का पुल किसी अजूबे से कम नहीं है. हालांकि, इसकी हकीकत बेहद डरावनी है. मानसून के दौरान जब डीवीसी (DVC) डैम से 80 हजार से 1 लाख क्यूसेक पानी छोड़ता है, तो यह अस्थायी पुल ताश के पत्तों की तरह बह जाता है.
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पुल बहने पर नाव से नदी पार करते हैं लोग
पुल बहने के बाद लोग नाव के सहारे उफनती नदी पार करते हैं. आईएसपी (ISP) स्टील प्लांट के मजदूरों से लेकर छात्रों और मरीजों तक, हर किसी को हर पल मौत का डर सताता है. बांकुड़ा और पुरुलिया के करीब 300 गांवों के लोग शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के लिए आसनसोल और बर्नपुर पर ही निर्भर हैं.
करोड़ों का खर्च और फाइलों में दबा सर्वे
प्रशासनिक स्तर पर कोशिशें तो हुईं, लेकिन अंजाम तक नहीं पहुंचीं. अगस्त 2021 में करीब 75 लाख रुपए खर्च करके जियोलॉजिकल सर्वे कराया गया. रिपोर्ट एक महीने में तैयार भी हो गयी, लेकिन प्रोजेक्ट ठंडे बस्ते में चला गया. मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बजट के दौरान कहा था कि इस पुल के निर्माण पर 350 करोड़ रुपए खर्च होंगे. भारी लागत के कारण फिलहाल यह योजना लटकी हुई है.
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दामोदर सेतु बंधन कमेटी का संघर्ष
दामोदर सेतु बंधन कमेटी के महासचिव चंदन मिश्रा का कहना है कि यह आंदोलन अब रुकने वाला नहीं है. पिछले 7 सालों से बांकुड़ा और पश्चिम बर्धमान के प्रशासन को दर्जनों आवेदन दिये जा चुके हैं. कमेटी ने स्पष्ट कर दिया है कि जो पुल की बात करेगा, वही क्षेत्र पर राज करेगा.
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By Mithilesh Jha
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