दूसरों के घरों में बर्तन धोने वाली कलिता माझी बनीं शुभेंदु कैबिनेट में मंत्री, ऐसा है झोपड़ी से लोक भवन तक का सफर

Published by : Mithilesh Jha Updated At : 01 Jun 2026 5:37 PM

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Kalita Majhi Minister West Bengal: पश्चिम बंगाल में घरेलू सहायिका का काम करने वाली कलिता मांझी ने कैबिनेट मंत्री के रूप में शपथ ली. बर्धमान के आउसग्राम से टीएमसी उम्मीदवार को हराकर विधानसभा पहुंचीं कलिता के मंत्री बनने की पूरी कहानी पढ़ें यहां.

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Kalita Majhi Minister West Bengal: पश्चिम बंगाल ने सोमवार को एक ऐसा इतिहास लिखा, जो आने वाली पीढ़ियों के लिए लोकतंत्र की ताकत की सबसे बड़ी मिसाल बनेगा. कभी दूसरों के घरों में झाड़ू-पोछा और बर्तन मांजकर हर महीने महज 2,500 से 4,000 रुपए महीना कमाने वाली कलिता माझी ने कोलकाता के लोक भवन में सूबे के कैबिनेट मंत्री के रूप में शपथ ली.

37 साल की कलिता ने 10 वर्ष तक किया संघर्ष

पूर्व बर्धमान जिले के आउसग्राम विधानसभा क्षेत्र से तृणमूल कांग्रेस के उम्मीदवार को पटखनी देकर विधानसभा पहुंचने वाली 37 वर्षीय कलिता माझी का यह सफर किसी फिल्मी कहानी जैसा जरूर लगता है, लेकिन इसके पीछे उनकी एक दशक की जमीनी तपस्या और संघर्ष छिपा है.

प्लंबर की पत्नी चलायेंगी सरकार

कलिता माझी का परिवार बेहद साधारण और आर्थिक रूप से कमजोर पृष्ठभूमि से आता है. कलिता पूर्व बर्धमान के गुसकरा नगरपालिका के वार्ड संख्या 3 के माझपुकुर पाड़ा इलाके में रहती हैं. उनके पति सुब्रत माझी प्लंबर हैं. उनका एक बेटा है, जिसने हाल ही में 12वीं की परीक्षा दी है. परिवार का पेट पालने के लिए कलिता खुद दूसरों के घरों में घरेलू सहायिका (हाउस हेल्प) के रूप में काम करती थीं. वह 10 वर्षों से अधिक समय से सक्रिय राजनीति में हैं और काम के साथ-साथ पार्टी के झंडे-बैनर उठाने में कभी पीछे नहीं रहीं.

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2021 की हार से सीखा सबक, 2026 में रचा इतिहास

भाजपा ने कलिता की ईमानदारी और जमीनी पकड़ को देखते हुए उन पर लगातार दूसरी बार दांव खेला था. पहली बार पार्टी ने कलिता को वर्ष 2021 के चुनाव में आउसग्राम सीट से मैदान में उतारा था. उस समय वे करीब 88,000 वोट पाकर दूसरे नंबर पर रही थीं. हार के बावजूद कलिता ने मैदान नहीं छोड़ा. भाजपा ने फिर उन पर भरोसा जताया. इस बार कलिता ने 1,07,692 वोट हासिल किये और टीएमसी के श्यामा प्रसन्न लोहार को 12,535 वोटों से हरा दिया.

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नेताओं से ज्यादा मालकिनों का मिला साथ

कलिता माझी ने भावुक होते हुए बताया कि जब टिकट मिला, तो उन्होंने चुनाव प्रचार के लिए एक महीने की छुट्टी ली थी. जिन घरों में वे काम करती थीं, उन परिवारों ने न केवल उन्हें आर्थिक और मानसिक संबल दिया, बल्कि कलिता की जीत के लिए दुआएं भी मांगीं.

Kalita Majhi Minister West Bengal: प्रधानमंत्री मोदी को जीत का तोहफा

शपथ लेने के तुरंत बाद मीडिया से बातचीत में कलिता माझी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी का आभार व्यक्त किया. उन्होंने अपनी प्राथमिकताएं भी बतायीं. कहा कि मंत्री बनने के बाद भी उनके पैर जमीन पर ही रहेंगे. उनकी पहली प्राथमिकता अपने गांव में सर्वसुविधायुक्त अस्पताल बनवाना है. वे अपने क्षेत्र में पीने का साफ पानी, पक्की सड़कें, युवाओं के लिए रोजगार और महिलाओं की सुरक्षा के लिए काम करेंगी.

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केंद्रीय योजनाओं को जमीन पर उतारने का भी संकल्प

कलिता माझी ने संकल्प लिया कि वे प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत हर गरीब परिवार को पक्की छत और शौचालय दिलवाकर रहेंगी, जिसे पूर्ववर्ती सरकार ने रोक रखा था.

5 साल बाद भी मैं वही कलिता रहूंगी, जो आज हूं

जब पत्रकारों ने उनसे पूछा कि क्या लाल बत्ती की गाड़ी और मंत्री पद मिलने के बाद वे बदल जायेंगीं? कलिता ने बेहद सादगी से जवाब दिया- मैं नहीं बदलूंगी. मुझे पता है कि गरीबी क्या होती है और जिंदगी की मजबूरियां क्या होती हैं. मैं गरीबों की नब्ज पहचानती हूं, क्योंकि मैं खुद उन्हीं में से एक हूं. आखिरी सांस तक उन्हीं के बीच रहूंगी. अब मेरी जिम्मेदारी सिर्फ आउसग्राम नहीं, बल्कि पूरे पश्चिम बंगाल के प्रति है.

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मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 30 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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