क्लस्टर सिस्टम और पेपर लीक के खिलाफ AISA का राजभवन मार्च, शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग

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क्लस्टर सिस्टम और पेपर लीक के खिलाफ AISA का राजभवन मार्च, शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग

AISA Lok Bhavan March: रांची में आईसा और इन्कलाबी नौजवान सभा ने क्लस्टर सिस्टम, पेपर लीक, एनईपी-2020, फीस वृद्धि और शिक्षा के निजीकरण के विरोध में राजभवन मार्च किया. प्रदर्शनकारियों ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग करते हुए प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता और लंबित भर्तियां जल्द पूरी करने की मांग उठाई.

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रांची से बिपिन सिंह की रिपोर्ट

AISA Lok Bhavan March: झारखंड में उच्च शिक्षा, प्रतियोगी परीक्षाओं और नई शिक्षा नीति (NEP-2020) को लेकर छात्रों का आक्रोश सोमवार को सड़कों पर दिखाई दिया. ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) और इंकलाबी नौजवान सभा (आरवाईए) के संयुक्त नेतृत्व में बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं ने क्लस्टर सिस्टम, पेपर लीक, परीक्षा में अनियमितता और शिक्षा के निजीकरण के विरोध में राजभवन मार्च किया. प्रदर्शनकारियों ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की भी मांग की.

जिला स्कूल मैदान से मार्च हुआ शुरू

जिला स्कूल मैदान (शहीद चौक) से शुरू हुआ मार्च राजभवन की ओर बढ़ा, जहां पहले से भारी संख्या में पुलिस बल तैनात था. प्रशासन ने बैरिकेडिंग और रस्सियों के जरिए प्रदर्शनकारियों को रोकने का प्रयास किया, लेकिन छात्र लगातार आगे बढ़ते रहे. बारिश के बीच भी प्रदर्शनकारियों का उत्साह कम नहीं हुआ और वे राजभवन के समीप पहुंच गए.

पुलिस और छात्रों के बीच धक्का-मुक्की

राजभवन की ओर बढ़ रहे प्रदर्शनकारियों को रोकने के दौरान पुलिस और छात्रों के बीच धक्का-मुक्की की स्थिति बन गई. प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि पुलिस ने हल्का बल प्रयोग भी किया. इसके बाद बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं मौके पर ही धरने पर बैठ गए और सरकार तथा शिक्षा विभाग के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी. प्रदर्शन में शामिल छात्र-छात्राओं ने कहा कि शिक्षा व्यवस्था लगातार संकट में है. प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता खत्म होती जा रही है और सरकार छात्रों की समस्याओं के समाधान के बजाय नई नीतियों के जरिए शिक्षा को और महंगा बना रही है.

परीक्षाओं में अनियमितता और पेपर लीक पर उठाए सवाल

मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों ने झारखंड में लंबित प्रतियोगी परीक्षाओं, बार-बार सामने आ रहे पेपर लीक मामलों और भर्ती प्रक्रियाओं में हो रही देरी को प्रमुख मुद्दा बनाया. छात्रों ने परीक्षा शुल्क प्रणाली समाप्त करने, पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया लागू करने और सभी लंबित परीक्षाओं का जल्द आयोजन कराने की मांग की. प्रदर्शनकारियों का कहना था कि जेपीएससी, जेएसएससी, शिक्षक नियुक्ति समेत कई महत्वपूर्ण परीक्षाएं विवादों में रही हैं. कई मामलों में प्रश्नपत्र लीक, डेटा एक्सपोजर और अन्य गंभीर अनियमितताओं के आरोप सामने आए हैं, जिससे लाखों अभ्यर्थियों का भविष्य प्रभावित हुआ है.

शिक्षा के निजीकरण और फीस वृद्धि का भी किया विरोध

राजभवन मार्च में शामिल छात्र संगठनों ने शिक्षा के निजीकरण, लगातार बढ़ती फीस और विश्वविद्यालयों में क्लस्टर सिस्टम लागू करने का भी विरोध किया. उनका कहना था कि उच्च शिक्षा को आम छात्रों की पहुंच से दूर किया जा रहा है. प्रदर्शनकारियों ने मांग की कि सरकारी विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित की जाए, फीस वृद्धि पर रोक लगे और शिक्षा को पूरी तरह सार्वजनिक एवं सुलभ बनाया जाए. उन्होंने कहा कि शिक्षा कोई व्यवसाय नहीं बल्कि प्रत्येक नागरिक का अधिकार है.

एनईपी-2020 और क्लस्टर सिस्टम पर सरकार को घेरा

आईसा के नेताओं ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी-2020) और झारखंड में प्रस्तावित क्लस्टर सिस्टम का विरोध करते हुए कहा कि यह व्यवस्था राज्य की सामाजिक और भाषाई विविधता के अनुकूल नहीं है. उनका आरोप था कि क्लस्टर मॉडल से स्थानीय कॉलेजों की स्वायत्तता प्रभावित होगी और छात्रों के सामने अतिरिक्त प्रशासनिक एवं शैक्षणिक कठिनाइयां खड़ी होंगी.

आईसा की राज्य अध्यक्ष विभा पुष्पा दीप ने कहा कि उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग की पुनर्गठन योजना स्व-वित्तपोषित मॉडल, ऋण आधारित शिक्षा और सीमित विषय चयन को बढ़ावा देती है. उनका कहना था कि इससे नागपुरी, खोरठा, कुरुख, संथाली सहित झारखंड की स्थानीय भाषाओं में शिक्षा और रोजगार के अवसर कमजोर होंगे. उन्होंने इसे राज्य की सांस्कृतिक पहचान और भाषाई विविधता के लिए भी चुनौती बताया.

केंद्र सरकार की नीतियों पर साधा निशाना

आईसा के राज्य सचिव त्रिलोकीनाथ ने कहा कि केंद्र सरकार की शिक्षा और रोजगार संबंधी नीतियों के कारण युवाओं के लिए रोजगार के अवसर लगातार कम हो रहे हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि सिविल सेवा परीक्षा, रेलवे और एसएससी जैसी प्रमुख भर्तियों में स्वीकृत पदों की संख्या घटाई जा रही है और कई नियुक्ति प्रक्रियाएं लंबित पड़ी हैं. उन्होंने कहा कि युवाओं को रोजगार देने के बजाय सरकार भर्ती प्रक्रियाओं को टाल रही है, जिससे लाखों अभ्यर्थी मानसिक और आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं.

सोनम वांगचुक के समर्थन में जताई एकजुटता

राजभवन मार्च केवल झारखंड के मुद्दों तक सीमित नहीं रहा. प्रदर्शनकारियों ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर पर्यावरणविद् सोनम वांगचुक के समर्थन में चल रहे आंदोलन के प्रति भी एकजुटता व्यक्त की. छात्र नेताओं ने बताया कि 15 जुलाई से जारी अनिश्चितकालीन धरने और भूख हड़ताल में आइसा की केंद्रीय अध्यक्ष नेहा समेत मनीष, आमीन, ऋषिकेश, दीपक और दानिश अली शामिल हैं. झारखंड के छात्रों ने उनके आंदोलन के समर्थन में आवाज बुलंद करते हुए कहा कि शिक्षा, पर्यावरण और लोकतांत्रिक अधिकारों से जुड़े मुद्दों पर देशभर के छात्रों को एकजुट होना चाहिए.

सरकार से की कई अहम मांगें

प्रदर्शन के दौरान छात्र संगठनों ने सरकार के समक्ष कई मांगें रखीं. इनमें क्लस्टर सिस्टम वापस लेने, पेपर लीक की निष्पक्ष जांच, लंबित प्रतियोगी परीक्षाओं का शीघ्र आयोजन, परीक्षा शुल्क समाप्त करने, शिक्षा के निजीकरण पर रोक लगाने, फीस वृद्धि वापस लेने, स्थानीय भाषाओं की पढ़ाई और रोजगार के अवसर सुरक्षित रखने तथा भर्ती प्रक्रियाओं में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की मांग प्रमुख रही.

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प्रदर्शन में आरवाईए के सोनू पांडे, आइसा की राज्य सह सचिव स्नेहा महतो, उपाध्यक्ष रंजीत सिंह चेरो, अमल घोषाल, राहुल राज मंडल, मोहम्मद समी, सुशील मुर्मू, विजय कुमार, इमरान, रितेश मिश्रा, गुड्डू भुइंया, गौतम दांगी, संजना मेहता, सांवली मुंडा, सोनू शर्मा सहित बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं और युवा कार्यकर्ता शामिल हुए. प्रदर्शन शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ, हालांकि पूरे कार्यक्रम के दौरान पुलिस और प्रशासन पूरी तरह सतर्क रहा.

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कुमार विश्वत सेन

लेखक के बारे में

By कुमार विश्वत सेन

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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