बंगाल चुनाव में दीवारों पर छिड़ी जंग, कहीं तीखा तंज तो कहीं मजेदार मीम्स, कोलकाता की गलियों में क्रिएटिविटी का जलवा

Published by :Mithilesh Jha
Published at :22 Apr 2026 3:03 PM (IST)
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Kolkata Political Graffiti West Bengal Elections 2026

कोलकाता की दीवारों पर लिखे गये हैं ऐसे-ऐसे नारे.

Kolkata Political Graffiti: बंगाल चुनाव 2026 के बीच कोलकाता की दीवारें राजनीतिक व्यंग्य और मजेदार कार्टूनों से पट गयी हैं. डिजिटल मीम्स और पारंपरिक ग्राफिटी का यह मेल सोशल मीडिया पर भी खूब वायरल हो रहा है.

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Kolkata Political Graffiti: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 की तारीख जैसे-जैसे करीब आ रही है, कोलकाता की दीवारें बोलने लगीं हैं. बंगाल की राजनीति में ‘दीवार लेखन’ (Wall Graffiti) की परंपरा दशकों पुरानी है, लेकिन इस बार इसमें डिजिटल युग के ‘मीम्स’ और सोशल मीडिया के तीखे तंज का अनोखा संगम देखने को मिल रहा है.

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उत्तर कोलकाता की संकरी गलियों से लेकर दक्षिण कोलकाता के पॉश इलाकों तक, राजनीतिक दलों के समर्थक अपनी क्रिएटिविटी से न केवल विरोधियों पर निशाना साध रहे हैं, बल्कि राहगीरों को मुस्कुराने पर भी मजबूर कर रहे हैं. इस बार रैलियों ही नहीं, बल्कि शब्दों और कला के जरिये मतदाताओं के दिल जीतने की भी कोशिश हो रही है.

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व्यंग्य, राइमिंग और मीम्स, दीवारों पर ‘खेला’ : इस बार की वॉल ग्राफिटी पारंपरिक नारों से काफी आगे निकल गयी है. तृणमूल कांग्रेस, भाजपा और वामदलों के समर्थक एक-दूसरे को घेरने के लिए मजेदार कविताओं और कार्टूनों का सहारा ले रहे हैं.

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  • तंज भरे नारे : महंगाई, बेरोजगारी और स्थानीय भ्रष्टाचार जैसे गंभीर मुद्दों को भी मजाकिया अंदाज में पेश किया गया है.
  • पॉप कल्चर का तड़का : फिल्मों के डायलॉग और वायरल मीम्स को राजनीतिक रंग देकर दीवारों पर उकेरा गया है.
  • विजुअल आर्ट : विरोधियों के नेताओं के कैरिकेचर (व्यंग्य चित्र) इस बार चर्चा का मुख्य केंद्र हैं.

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कोलकाता के कलाकारों के लिए ये दीवारें एक खुले कैनवास की तरह हैं. चुनाव आयोग की बंदिशों के बावजूद, निजी दीवारों पर मालिक की सहमति से किये गये ये लेखन चुनावी माहौल को जीवंत बना देते हैं.

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यह बंगाल की वह कला है, जो डिजिटल विज्ञापनों के दौर में भी अपनी प्रासंगिकता बनाये हुए है. बड़े मुद्दों के साथ-साथ मोहल्ले की छोटी-छोटी समस्याओं को भी इन स्लोगन्स में जगह मिलती है.

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हैरानी की बात यह है कि ये दीवारें केवल गलियों तक सीमित नहीं हैं. राहगीर इन मजेदार ग्राफिटी और स्लोगन्स की तस्वीरें खींचकर फेसबुक, इंस्टाग्राम और एक्स (X) पर शेयर कर रहे हैं.

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कई स्लोगन तो इतने लोकप्रिय हो गये हैं कि वे रातों-रात डिजिटल मीम्स में तब्दील हो गये. राजनीतिक दलों के आईटी सेल भी अब इन दीवारों से प्रेरणा लेकर अपना कंटेंट तैयार कर रहे हैं.

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2026 के इस चुनाव में जीत किसकी होगी, यह तो 4 मई के नतीजे ही बतायेंगे, लेकिन कोलकाता की इन रंगीन और मजाकिया दीवारों ने ‘चुनावी कला’ की रेस में सबको पीछे छोड़ दिया है.

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मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 30 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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