ममता बनर्जी का कोलकाता की सड़कों पर चटाई बिछाकर धरना, टीएमसी में टूट की आशंका के बीच ‘दिल्ली चलो’ का नारा

Published by : Mithilesh Jha Updated At : 03 Jun 2026 6:35 AM

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Mamata Banerjee Dharna-Protest: चुनाव में हार के बाद टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी ने कोलकाता के एस्प्लेनेड में एक दिवसीय धरना दिया. उन्होंने कार्यकर्ताओं से वादा किया कि वे उन्हें मंझधार में नहीं छोड़ेंगी. नये विधायकों की गैर-मौजूदगी के बीच ममता ने दिल्ली में इंडिया गठबंधन की बैठक का ऐलान किया.

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Mamata Banerjee Dharna-Protest: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में मिली अप्रत्याशित हार और पार्टी के भीतर मची भारी भगदड़ के बीच तृणमूल कांग्रेस (TMC) सुप्रीमो ममता बनर्जी ने अपने कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ाने के लिए भावनात्मक कार्ड खेला है. मंगलवार को मध्य कोलकाता के एस्प्लेनेड में आयोजित एक दिवसीय धरने के दौरान ममता बनर्जी ने ऐलान किया कि चुनाव में मिली हार या मुकदमों के डर से वे अपने जमीनी कार्यकर्ताओं को कभी अकेले मंझधार में नहीं छोड़ेंगी.

कार्यकर्ताओं के बीच जमीन पर बैठीं दीदी

ममता बनर्जी के धरना ने तृणमूल कांग्रेस के शुरुआती दिनों के संघर्ष की यादें ताजा कर दीं. जो कोलकाता पुलिस कुछ दिनों पहले तक ममता बनर्जी के निर्देशों पर काम करती थी, उसी पुलिस ने सुरक्षा कारणों का हवाला देकर रानी रासमनी रोड पर धरना देने की उनकी अनुमति रद्द कर दी.

वाई-चैनल पर मेगाफोन पॉलिटिक्स

वीआईपी ट्रीटमेंट न मिलने पर ममता बनर्जी सीधे एस्प्लेनेड के वाई-चैनल (Y-Channel) पर जमीन पर बैठ गयीं. प्रशासन ने उन्हें मंच बनाने और लाउडस्पीकर लगाने तक की इजाजत नहीं दी. इसके जवाब में उन्होंने हाथ में छोटा मेगाफोन (हैंडी लाउडस्पीकर) लिया और अपनी आवाज बुलंद की.

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मनोवैज्ञानिक नैरेटिव की लड़ाई

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ममता बनर्जी जान-बूझकर इस दमन को अपनी ताकत बना रही हैं. वे कार्यकर्ताओं को यह संदेश देना चाहती हैं कि भले ही उनके बड़े नेता और नये विधायक भाजपा के डर से पाला बदल रहे हों, लेकिन वे खुद आज भी साधारण कार्यकर्ता की तरह सड़क पर लड़ने के लिए तैयार हैं.

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दिल्ली में बनेगा भाजपा विरोधी ‘चक्रव्यूह’

ममता बनर्जी ने कहा कि अगले हफ्ते नयी दिल्ली में इंडिया (INDIA) गठबंधन के तमाम बड़े नेताओं की अहम बैठक है. उन्होंने कहा कि विपक्ष की ताकत को कम आंकने की भूल न करे भाजपा. उन्होंने यह भी कहा कि उनका आंदोलन केवल टीएमसी कार्यकर्ताओं पर हो रहे हमलों के खिलाफ नहीं है, बल्कि यह बिना पुनर्वास के हॉकर्स को बेदखल करने और देश के लाखों छात्रों के भविष्य से जुड़े नीट (NEET) परीक्षा घोटाले के खिलाफ भी एक साझा लड़ाई है.

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Mamata Banerjee Dharna-Protest: धरना-प्रदर्शन में साथ रहे दीदी के पुराने वफादार

धरने में ममता बनर्जी के साथ फिरहाद हकीम, मदन मित्रा, डेरेक ओब्रायन, कल्याण बनर्जी, शोभनदेव चट्टोपाध्याय और डोला सेन जैसे पार्टी के सबसे पुराने चेहरे डटे रहे. नये विधायकों ने दीदी से दूरी बना रखी है. दीदी ने अंत में ऐलान किया कि चाहे जितनी धमकियां मिलें, उनका सत्याग्रह बंगाल के चाय बागानों, डुआर्स और कोलकाता की सड़कों पर लगातार जारी रहेगा.

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मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 30 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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