177 सीटों पर धांधली का ममता बनर्जी ने लगाया आरोप, दिल्ली में भाजपा विरोधी ‘चक्रव्यूह’ बनाने का ऐलान

Published by : Mithilesh Jha Updated At : 02 Jun 2026 7:26 PM

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Mamata Banerjee Rigging Claim: कोलकाता में मेगाफोन लेकर धरने पर बैठीं ममता बनर्जी ने दावा किया कि भाजपा ने बंगाल की 177 सीटों पर मतगणना में धांधली करके चुनाव जीता है. उन्होंने आरोप लगाया कि घायल अभिषेक बनर्जी को भर्ती न करने के लिए अस्पतालों पर शुभेंदु सरकार का भारी दबाव था.

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Mamata Banerjee Rigging Claim: पश्चिम बंगाल में पराजय के बाद पहली बार सड़क पर उतरीं तृणमूल कांग्रेस (TMC) सुप्रीमो ममता बनर्जी ने मंगलवार को सनसनीखेज दावा किया. कोलकाता के एस्प्लेनेड में धरना के दौरान ममता बनर्जी ने भाजपा की प्रचंड जीत की प्रामाणिकता पर सवाल खड़े किये. उन्होंने आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने पश्चिम बंगाल की सत्ता हथियाने के लिए 294 में से 177 सीटों पर मतगणना में बड़े पैमाने पर धांधली की है. उन्होंने ऐलान किया कि वे इस मुश्किल दौर में अपने कार्यकर्ताओं को अकेला नहीं छोड़ेंगी और जल्द ही दिल्ली से भाजपा विरोधी इंडिया (INDIA) गठबंधन के साथ मिलकर देशव्यापी आंदोलन शुरू करेंगी.

177 सीटों का सीक्रेट नंबर और दिल्ली का नया चक्रव्यूह

ममता बनर्जी ने पहली बार आधिकारिक रूप से 177 सीटों का आंकड़ा देते हुए आरोप लगाया कि तृणमूल को मिली हार जनादेश नहीं, बल्कि काउंटिंग टेबल पर की गयी प्रशासनिक धोखाधड़ी है. उन्होंने घोषणा की कि अगले सप्ताह नयी दिल्ली में भाजपा विरोधी सभी प्रमुख दलों की एक हाई-प्रोफाइल बैठक होगी. उन्होंने कार्यकर्ताओं से कहा- कुछ दिनों का इंतजार कीजिए, हम जल्द ही दिल्ली से केंद्र और राज्य की भाजपा सरकार के खिलाफ एक देशव्यापी साझा कार्ययोजना (Action Plan) का ऐलान करेंगे.

नीट (NEET) और राष्ट्रीय मुद्दों से कनेक्शन

अपने इस धरने को केवल टीएमसी तक सीमित न रखकर ममता बनर्जी ने बड़ी चालाकी से इसे ‘नीट परीक्षा में अनियमितता/धोखाधड़ी’ और फेरीवालों के पुनर्वास जैसे राष्ट्रीय और जनहित के मुद्दों से जोड़कर खुद को दोबारा स्थापित करने की कोशिश की है.

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अभिषेक पर हमला सुनियोजित, अस्पतालों पर था शुभेंदु सरकार का दबाव!

शनिवार को सोनारपुर में सांसद अभिषेक बनर्जी पर हुए हमले को लेकर ममता बनर्जी ने एक बेहद डरावना और नया खुलासा किया. बंगाल की पूर्व चीफ मिनिस्टर ने आरोप लगाया कि अभिषेक पर अचानक हमला नहीं हुआ था. वह पूरी तरह सुनियोजित (Pre-planned) था. भाजपा ने अपने कार्यकर्ताओं को पहले से वहां छुपाकर रखा था. उन्हें खाना खिलाया था और यहां तक कि उन्हें कैसे हमला करना है, इसकी ट्रेनिंग भी दी थी.

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हेलमेट न होता तो चली जाती जान: ममता बनर्जी

टीएमसी सुप्रीमो ने कहा कि अगर तृणमूल के एक जांबाज कार्यकर्ता ने ऐन वक्त पर अभिषेक को हेलमेट नहीं पहनाया होता, तो पत्थरों से लगी वह चोट जानलेवा साबित हो सकती थी. उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि हमले के बाद जिन निजी अस्पतालों में अभिषेक को ले जाया गया था, उन पर शुभेंदु अधिकारी सरकार का भारी प्रशासनिक दबाव था कि घायल नेता को भर्ती न किया जाये. उन्होंने तंज कसा कि पीएम मोदी ने बंगाल को ऐसे असामाजिक और मनमानी करने वाले नेताओं के हाथों में छोड़ दिया है, जो राज्य को अंधकार में धकेल रहे हैं.

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‘सिग्नेचर गेट’ पर तोड़ी चुप्पी, स्पीकर पर उठाये सवाल

विधानसभा में शोभनदेव चट्टोपाध्याय को विपक्ष का नेता चुनने के लिए विधायकों के फर्जी हस्ताक्षरों (Signature Scandal) के आरोपों का भी ममता ने बचाव किया. उन्होंने कहा कि विधायकों ने किसी फर्जी कागज पर नहीं, बल्कि आधिकारिक पार्टी बैठक की उपस्थिति पुस्तिका (Attendance Register) पर हस्ताक्षर किये थे. इसे बाद में समर्थन पत्र के रूप में जमा किया गया.

फॉरेंसिक जांच क्यों नहीं करायी : ममता

ममता बनर्जी ने भाजपा और विधानसभा अध्यक्ष पर तीखा हमला बोलते हुए कहा- अगर विधानसभा अध्यक्ष को हमारे हस्ताक्षरों की प्रामाणिकता पर कोई शक था, तो उन्हें इसकी निष्पक्ष फॉरेंसिक जांच करानी चाहिए थी. लेकिन जांच की बजाय पुलिस को कालीघाट भेजना भाजपा की गंदी राजनीति का हिस्सा है.

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Mamata Banerjee Rigging Claim: बिना मंच और लाउडस्पीकर के जारी रहा संग्राम

कोलकाता पुलिस द्वारा रानी रासमणि रोड की अनुमति रद्द किये जाने के बाद एस्प्लेनेड के वाई-चैनल पर यह धरना आयोजित हुआ. पुलिस ने वहां मंच बनाने या बड़े लाउडस्पीकर का उपयोग करने पर भी रोक लगा दी थी. इसके खिलाफ कोर्ट जाने की चेतावनी देते हुए ममता ने कहा- अगर अन्य दलों को इस जगह माइक लगाने की इजाजत मिलती है, तो हम अदालत जायेंगे. कानून भेदभाव के आधार पर लागू नहीं हो सकता.

अफरा-तफरी और नारेबाजी के बीच रोकना पड़ा भाषण

प्रदर्शन के दौरान टीएमसी कार्यकर्ताओं की भारी भीड़ के कारण कई बार अफरा-तफरी मची और नारेबाजी के चलते ममता बनर्जी को अपना भाषण रोकना पड़ा. धरने पर उनके साथ फिरहाद हकीम, मदन मित्रा, कल्याण बनर्जी, शोभनदेव चट्टोपाध्याय, चंद्रिमा भट्टाचार्य और डोला सेन जैसे पुराने वफादार जमे रहे. टीएमसी के टिकट पर चुनाव जीते अधिकांश नये विधायकों ने इस धरने से भी दूरी बनाये रखी.

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लेखक के बारे में

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मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 30 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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