बागी विधायकों ने बनाया सीक्रेट हेडक्वार्टर! प्रशांत किशोर के पुराने नेटवर्क की मदद से ‘ममता मुक्त TMC’ की तैयारी
Published by : Mithilesh Jha Updated At : 02 Jun 2026 8:00 PM
ममता बनर्जी और प्रशांत किशोर.
TMC Rebellion Secret War Room: पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर मचे घमासान के बीच नया खुलासा हुआ है. तारक सिंह और शांतनु सेन के बाद 60 बागी विधायकों ने ममता बनर्जी से अलग ‘नया वॉर रूम’ तैयार कर लिया है. चुनाव आयोग में सिंबल पर दावा ठोकने की तैयारी की क्या है इनसाइड स्टोरी, यहां पढ़ें.
खास बातें
TMC Rebellion Secret War Room: पश्चिम बंगाल की राजनीति में ‘ममता बनर्जी के बिना नयी टीएमसी’ का जो नैरेटिव कल तक बंद कमरों तक सीमित था, अब कोलकाता के सॉल्टलेक और न्यूटाउन के फाइव-स्टार होटलों में बाकायदा बैठकों में तब्दील हो चुका है. सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, पार्टी के नाराज 60 विधायकों और कई शीर्ष सांसदों ने ममता और अभिषेक बनर्जी की नजरों से दूर कोलकाता के राजारहाट-न्यूटाउन इलाके में एक समानांतर वॉर रूम (Parallel War Room) तैयार कर लिया है. तख्तापलट की पटकथा इतनी खामोशी और वैज्ञानिक तरीके से लिखी जा रही है कि खुफिया तंत्र (IB) भी इसकी भनक पाने में पूरी तरह नाकाम रहा.
पीके (प्रशांत किशोर) के पुराने नेटवर्क का हो रहा इस्तेमाल?
बंगाल में ममता बनर्जी और उनके परिवार के खिलाफ शुरू हुई इस बगावत के पीछे चल रहे संगठित दिमाग को लेकर जो सबसे बड़ा खुलासा हुआ है, उसने तृणमूल कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व के पैरों तले की जमीन खिसका दी है. सूत्रों का दावा है कि 2021 के चुनाव में टीएमसी के लिए काम कर चुके आई-पैक (I-PAC) के प्रशांत किशोर की टीम के कुछ पूर्व रणनीतिकार और डेटा एक्सपर्ट्स इस समय बागी विधायकों को तकनीकी और सांख्यिकीय मदद दे रहे हैं.
एक-एक सीट का चुनावी डेटा तैयार
बागी गुट को यह समझाया गया है कि किस तरह आरजी कर कांड और भ्रष्टाचार के बाद ममता बनर्जी का कोर वोट बैंक खिसक चुका है. डेटा के जरिये विधायकों को भरोसा दिलाया जा रहा है कि ‘ममता के चेहरे के बिना’ (ममता मुक्त तृणमूल कांग्रेस) भी वे अपनी जमीनी पकड़ के दम पर दोबारा चुनाव जीत सकते हैं.
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बिछ रही सिंबल फ्रीज कराने की कानूनी बिसात
बागी धड़े के वकील दिल्ली के बड़े कानूनविदों के संपर्क में हैं. तैयारी यह है कि जैसे ही विधायकों की संख्या 65 के पार पहुंचेगी, वैसे ही चुनाव आयोग में ‘तीर-कमान’ (शिवसेना विवाद) और ‘घड़ी’ (एनसीपी विवाद) की तर्ज पर टीएमसी के ‘जोड़ा फूल’ सिंबल को फ्रीज कराने या उस पर दावा ठोकने की अर्जी डाल दी जायेगी.
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काकोली और सुदीप बंद्योपाध्याय का मौन समर्थन?
पार्टी में सबसे ज्यादा डर इस बात की है कि बगावत की यह आग केवल विधायकों तक सीमित नहीं है. लोकसभा और राज्यसभा के सांसदों में भी यह आग सुलग रही है. डॉ शांतनु सेन के इस्तीफे और तारक सिंह की खुली बगावत के बाद भी पार्टी के लोकसभा संसदीय दल के नेता सुदीप बंद्योपाध्याय और वरिष्ठ सांसद काकोली घोष दस्तीदार जैसी कद्दावर शख्सीयतों ने ममता बनर्जी के समर्थन में कोई मजबूत बयान नहीं दिया है.
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TMC Rebellion Secret War Room: कभी भी इस्तीफा दे सकते हैं टीएमसी के 3 सांसद
चर्चा है कि दिल्ली में मौजूद टीएमसी के 3 बड़े सांसद किसी भी वक्त पार्टी के सभी पदों से सामूहिक त्यागपत्र की घोषणा कर सकते हैं. इससे राष्ट्रीय स्तर पर इंडिया (INDIA) गठबंधन के भीतर भी ममता बनर्जी पूरी तरह अलग-थलग पड़ जायेंगी.
कोलकाता के वाई-चैनल पर धरना में नहीं पहुंचे विधायक
2 जून को कोलकाता के रानी रासमणि रोड पर होने वाले महा-धरने को ममता बनर्जी ने प्रतिष्ठा का सवाल बना लिया. कालीघाट से सभी जिला अध्यक्षों को साफ कह दिया गया था कि जो भी विधायक या पार्षद धरने में नहीं दिखेगा, उसे ‘गद्दार’ घोषित कर दिया जायेगा. बावजूद इसके, धरने में 60 विधायक नहीं आये. इसे ममता बनर्जी के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है.
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By Mithilesh Jha
मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 30 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.
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