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Navratri 2025 Day 2, Maa Brahmacharini Special Bhog: मां ब्रह्मचारिणी के स्पेशल भोग और उनका धार्मिक महत्व

Updated at : 08 Oct 2025 1:15 PM (IST)
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Navratri 2025 Day 2, Maa Brahmacharini Special Bhog

नवरात्रि 2025 के दूसरे दिन लगाएं मां ब्रह्मचारिणी को ये भोग

Navratri 2025 Day 2, Maa Brahmacharini Special Bhog: नवरात्रि के दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की पूजा में विशेष भोग का महत्व होता है. माना जाता है कि मां को प्रिय भोग अर्पित करने से वह शीघ्र प्रसन्न होती हैं और भक्तों को ज्ञान, तप और संयम का आशीर्वाद देती हैं। आइए जानें उनके विशेष भोग और महत्व.

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Navratri 2025 Day 2, Maa Brahmacharini Special Bhog: आज 23 सितंबर 2025 मंगलवार नवरात्रि के दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की पूजा का विशेष महत्व है. मां दुर्गा के नौ रूपों में यह दूसरा स्वरूप है. ब्रह्म का अर्थ है तपस्या और चारिणी का अर्थ है आचरण — यानी मां ब्रह्मचारिणी तप के आचरण की प्रतीक हैं. पौराणिक मान्यता के अनुसार हिमालय की पुत्री मां ब्रह्मचारिणी ने नारद जी के उपदेश पर भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए कठोर तप किया, जिससे इन्हें तपश्चारिणी अर्थात् ब्रह्मचारिणी कहा गया. इनका स्वरूप अत्यंत शांत और मोहक है तथा मां के इस रूप की पूजा से भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं.

मां ब्रह्मचारिणी का भोग और फूल

मां ब्रह्मचारिणी को चीनी, खीर, पंचामृत, बर्फी या दूध से बनी अन्य मिठाइयों का भोग लगाना शुभ माना जाता है. सफेद रंग माता को अत्यंत प्रिय है, इसलिए पूजा में सफेद रंग के वस्त्र और सफेद फूलों का प्रयोग करना चाहिए.

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मां ब्रह्मचारिणी की कृपा से प्राप्त लाभ

  • बुद्धि और ज्ञान में वृद्धि
  • आत्मविश्वास और मानसिक शांति
  • जीवन में सुख-समृद्धि और शांति
  • तपस्या व संयम की भावना में मजबूती

मां ब्रह्मचारिणी को अर्पित करने योग्य वस्तुएं

मां को प्रसन्न करने के लिए चमेली के फूल अर्पित करें. भोग में दूध से बनी मिठाइयां शामिल करें. देवी को विशेष रूप से सफेद और पीला रंग प्रिय है, अतः पूजा के समय संभव हो तो इन्हीं रंगों के कपड़े पहनें.

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मां ब्रह्मचारिणी कौन हैं?

‘ब्रह्म’ का अर्थ है तपस्या और ‘चारिणी’ का अर्थ है उसका आचरण करने वाली. यानी जो देवी तप का पालन और आचरण करती हैं, उन्हें ही मां ब्रह्मचारिणी कहा जाता है. इनके दाहिने हाथ में जपमाला और बाएँ हाथ में कमंडल रहता है. वे ज्ञान, संयम और आत्मबल की प्रतीक मानी जाती हैं.

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Shaurya Punj

लेखक के बारे में

By Shaurya Punj

मैंने डिजिटल मीडिया में 15 वर्षों से अधिक का अनुभव हासिल किया है. पिछले 6 वर्षों से मैं विशेष रूप से धर्म और ज्योतिष विषयों पर सक्रिय रूप से लेखन कर रहा हूं. ये मेरे प्रमुख विषय हैं और इन्हीं पर किया गया काम मेरी पहचान बन चुका है. हस्तरेखा शास्त्र, राशियों के स्वभाव और उनके गुणों से जुड़ी सामग्री तैयार करने में मेरी निरंतर भागीदारी रही है. रांची के सेंट जेवियर्स कॉलेज से मास कम्युनिकेशन में स्नातक की डिग्री प्राप्त करने के बाद. इसके साथ साथ कंटेंट राइटिंग और मीडिया से जुड़े विभिन्न क्षेत्रों में काम करते हुए मेरी मजबूत पकड़ बनी. इसके अलावा, एंटरटेनमेंट, लाइफस्टाइल और शिक्षा जैसे विषयों पर भी मैंने गहराई से लेखन किया है, जिससे मेरी लेखन शैली संतुलित, भरोसेमंद और पाठक-केंद्रित बनी है.

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