गंगा दशहरा के दिन स्नान करने से किन 10 पापों से मिलती है मुक्ति? जानें रहस्य 

Published by : Neha Kumari Updated At : 24 May 2026 8:23 AM

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गंगा नदी में स्नान करते श्रद्धालुओं की सांकेतिक तस्वीर (एआई)

Ganga Dussehra 2026: गंगा दशहरा का पावन पर्व 25 मई, सोमवार को मनाया जाएगा. धार्मिक मान्यता है कि इस दिन श्रद्धापूर्वक गंगा नदी में स्नान करने से व्यक्ति के दस प्रकार के पाप नष्ट हो जाते हैं. इनमें 3 मानसिक पाप, 4 वाचिक पाप और 3 कायिक पाप शामिल हैं.

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Ganga Dussehra 2026: सनातन धर्म में गंगा नदी को सिर्फ एक नदी नहीं, बल्कि साक्षात देवी और पतित-पावनी यानी पापों का नाश करने वाली माना जाता है. धार्मिक मान्यता है कि इसी दिन राजा भागीरथ के कठिन तप से प्रसन्न होकर मां गंगा स्वर्ग से पृथ्वी पर अवतरित हुई थीं. इस दिन को लेकर वर्षों से मान्यता चली आ रही है कि गंगा दशहरा पर गंगा स्नान करने से 10 प्रकार के पापों से मुक्ति मिलती है. शास्त्रों और पुराणों में इसका क्या आधार है, आइए विस्तार से समझते हैं.

क्या है दशविध पाप (10 पापों) का रहस्य?

‘दशहरा’ शब्द दो शब्दों से मिलकर बना है ‘दश’ (दस) और ‘हरा’ (हरने वाला), यानी दस पापों को हरने वाला. गरुड़ पुराण और मनुस्मृति जैसे प्राचीन ग्रंथों में इंसानी गलतियों या पापों को मन, वाणी और कर्म के आधार पर 10 भागों में बांटा गया है.

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, गंगा दशहरा के दिन सच्ची श्रद्धा से गंगा में डुबकी लगाने या मां गंगा का स्मरण करने से इन 10 पापों का प्रभाव समाप्त हो जाता है.

1. मन द्वारा किए जाने वाले पाप (मानसिक पाप)

  • परद्रव्येष्वभिध्यानम्: किसी दूसरे की संपत्ति या धन को हड़पने का विचार मन में लाना.
  • मनसानिष्टचिंतनम्: मन ही मन किसी का बुरा सोचना या किसी के प्रति दुर्भावना रखना.
  • वितथाभिनिवेशश्च: असत्य या अधर्म की बातों को सही मानना और उसी पर अड़े रहना.

2. वाणी द्वारा किए जाने वाले पाप (वाचिक पाप)

  • पारुष्यम्: किसी को अत्यंत कठोर या कड़वे वचन बोलना, जिससे उसका दिल दुखे.
  • अनृतम्: झूठ बोलना या किसी को धोखा देने के लिए असत्य का सहारा लेना.
  • पैशुन्यम्: किसी की पीठ पीछे उसकी बुराई या चुगली करना.
  • असंबद्ध प्रलाप: बिना किसी कारण या बिना सोचे-समझे व्यर्थ और अनर्गल बातें करना.

3. शरीर या कर्म द्वारा किए जाने वाले पाप (कायिक पाप)

  • अदत्तादानम्: बिना अनुमति के किसी की वस्तु लेना या चोरी करना.
  • हिंसा: किसी भी जीव को शारीरिक या मानसिक रूप से कष्ट पहुंचाना या उसकी हत्या करना.
  • परदारोपसेवा: शास्त्रों के विरुद्ध या अनैतिक शारीरिक संबंध बनाना.

स्कंद पुराण में भगवान शिव ने स्वयं भगवान विष्णु से कहा है कि कलयुग में, जहां क्रोध, लोभ और अहंकार का बोलबाला होगा, वहां मां गंगा मनुष्यों के उद्धार का सबसे सरल मार्ग होंगी. हालांकि, विद्वानों का मानना है कि पाप मुक्ति का लाभ तभी मिलता है, जब मनुष्य अपने कर्मों के प्रति सच्चे मन से पश्चाताप करे और भविष्य में उन्हें न दोहराने का संकल्प ले.

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Neha Kumari

लेखक के बारे में

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नेहा कुमारी प्रभात खबर डिजिटल में जूनियर कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हैं. उन्हें लेखन के क्षेत्र में एक वर्ष से अधिक का अनुभव है. पिछले छह महीनों से वे राशिफल और धर्म से जुड़ी खबरों पर काम कर रही हैं. उनका मुख्य कार्य व्रत-त्योहारों, पौराणिक कथाओं और भारतीय रीति-रिवाजों से जुड़ी जानकारी को सरल भाषा में लोगों तक पहुंचाना है. नेहा का हमेशा यह प्रयास रहता है कि वे कठिन से कठिन विषय को भी इतना आसान और रोचक बना दें कि हर कोई उसे सहजता से पढ़ और समझ सके. उनका मानना है कि यदि धर्म और संस्कृति से जुड़ी जानकारी सरल शब्दों में मिले, तो लोग अपनी परंपराओं से बेहतर तरीके से जुड़ पाते हैं. डिजिटल मीडिया में अपने करियर की शुरुआत उन्होंने प्रभात खबर में ही ‘नेशनल’ और ‘वर्ल्ड’ डेस्क पर छह महीने की इंटर्नशिप के साथ की थी. इस दौरान उन्होंने रियल-टाइम खबरों पर काम करना, तेजी और सटीकता के साथ कंटेंट लिखना, ट्रेंडिंग विषयों की पहचान करना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को करीब से समझा. इस अनुभव ने उनकी न्यूज़ सेंस, लेखन क्षमता और खबरों को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करने की समझ को और अधिक मजबूत बनाया.

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