आषाढ़ गुप्त नवरात्री पर 10 महाविद्याओं की साधना से खुलते हैं सिद्धि और सफलता के मार्ग, जानें महत्व और तिथियां

आषाढ़ गुप्त नवरात्री 2026 कब से आरंभ
Ashadh Gupt Navratri 2026: आषाढ़ गुप्त नवरात्र 15 जुलाई से प्रारंभ होकर 22 जुलाई तक रहेंगे, जबकि व्रत का पारण 23 जुलाई को किया जाएगा. हिंदू धर्म में गुप्त नवरात्र को तंत्र, मंत्र, साधना और देवी आराधना के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है. इस दौरान दस महाविद्याओं—मां काली, तारा देवी, त्रिपुर सुंदरी, भुवनेश्वरी, छिन्नमस्ता, त्रिपुर भैरवी, धूमावती, बगलामुखी, मातंगी और कमला देवी की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है.
Ashadh Gupt Navratri 2026: आषाढ़ गुप्त नवरात्री देवी साधना, तंत्र-मंत्र और आध्यात्मिक उन्नति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माने जाते हैं. इस दौरान मां शक्ति के विभिन्न स्वरूपों की आराधना कर विशेष कृपा और सिद्धियों की प्राप्ति का प्रयास किया जाता है.
आषाढ़ गुप्त नवरात्री कब से आरंभ
इस वर्ष आषाढ़ गुप्त नवरात्री 15 जुलाई से शुरू होकर 22 जुलाई तक रहेंगे. चतुर्थी तिथि के क्षय और नवमी तिथि की वृद्धि के कारण व्रत का पारण 23 जुलाई को किया जाएगा. विशेष संयोग के चलते 17 जुलाई को तीसरा और चौथा नवरात्र एक ही दिन मनाया जाएगा.
ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार वर्ष में कुल चार नवरात्र आते हैं—चैत्र, शारदीय और दो गुप्त नवरात्र. इनमें गुप्त नवरात्र को साधना और तांत्रिक उपासना के लिए विशेष महत्व प्राप्त है.
गुप्त नवरात्र में 10 महाविद्याओं की पूजा का महत्व
गुप्त नवरात्र के दौरान दस महाविद्याओं की पूजा की जाती है. इनमें—
- मां काली
- तारा देवी
- त्रिपुर सुंदरी
- भुवनेश्वरी
- माता छिन्नमस्ता
- त्रिपुर भैरवी
- मां धूमावती
- मां बगलामुखी
- मातंगी देवी
- मां कमला
की विशेष आराधना की जाती है. मान्यता है कि इन महाविद्याओं की उपासना से साधक को आध्यात्मिक शक्ति, आत्मबल और विशेष सिद्धियों की प्राप्ति होती है.
क्यों खास माने जाते हैं आषाढ़ गुप्त नवरात्र?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यह समय तंत्र, मंत्र और साधना के लिए अत्यंत प्रभावशाली माना जाता है. कहा जाता है कि इन दिनों की गई साधना अपेक्षाकृत जल्दी फल देती है. कई साधक एकांत स्थानों पर रहकर जप, तप, दुर्गासप्तशती पाठ और विशेष अनुष्ठान करते हैं.
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार गुप्त नवरात्र में की गई देवी उपासना जन्मकुंडली के विभिन्न दोषों को शांत करने और धर्म, अर्थ, काम तथा मोक्ष जैसे चार पुरुषार्थों की प्राप्ति में सहायक मानी जाती है.
साधना का सबसे प्रभावी समय
मान्यता है कि मध्यरात्रि से लेकर सूर्योदय तक का समय साधना, मंत्र जाप और देवी आराधना के लिए सबसे अधिक प्रभावशाली होता है. इस दौरान की गई उपासना से साधक को विशेष आध्यात्मिक ऊर्जा प्राप्त होती है.
आषाढ़ गुप्त नवरात्र 2026: तिथि अनुसार पूजन
- 15 जुलाई – घटस्थापना, मां शैलपुत्री पूजा
- 16 जुलाई – मां ब्रह्मचारिणी पूजा
- 17 जुलाई – मां चंद्रघंटा एवं मां कूष्मांडा पूजा
- 18 जुलाई – मां स्कंदमाता पूजा
- 19 जुलाई – मां कात्यायनी पूजा
- 20 जुलाई – मां कालरात्रि पूजा
- 21 जुलाई – दुर्गा अष्टमी, मां महागौरी पूजा
- 22 जुलाई – महा नवमी, मां सिद्धिदात्री पूजा
- 23 जुलाई – नवरात्र व्रत पारण
धार्मिक मान्यता
गुप्त नवरात्र को सामान्य नवरात्र की तुलना में अधिक गूढ़ और आध्यात्मिक माना जाता है. देवी साधना, मंत्र जाप और महाविद्याओं की आराधना के माध्यम से साधक मां शक्ति का आशीर्वाद प्राप्त करने का प्रयास करते हैं. धार्मिक मान्यता है कि श्रद्धा और नियमपूर्वक की गई उपासना जीवन में सकारात्मक परिवर्तन ला सकती है.
10 महाविद्याओं की साधना से खुलते हैं सिद्धि और सफलता के मार्ग, जानें महत्व और तिथियां
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By Shaurya Punj
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