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बिहार में मतदाता सूची के अपडेशन पर क्यों हो रही राजनीति? जानिए क्या है सच

Updated at : 09 Jul 2025 3:20 PM (IST)
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Rahul Gandhi and Tejashwi Yadav

राहुल गांधी और तेजस्वी यादव बिहार बंद के दौरान

Rahul Gandhi : राहुल गांधी ने चुनाव आयोग पर यह आरोप लगाया है कि वो वोट की चोरी में बीजेपी की मदद कर रही है और इसी वजह से बिहार में मतदाता सूची को अपडेट किया जा रहा है. राहुल गांधी ने बिहार के वोटर्स का आह्वान करते हुए यह कहा कि अगर आप यह चाहते हैं कि आपका भविष्य चोरी ना हो, तो वोट की चोरी को रोकें. दरअसल चुनाव आयोग ने बिहार विधानसभा चुनाव से पहले वोटरलिस्ट अपडेट करने का काम शुरू किया है, ताकि योग्य उम्मीदवार का नाम उसमें रहे और प्रदेश का वोटिंग प्रतिशत बेहतर हो, इसी मसले को लेकर बिहार में राजनीति हो रही है और महागठबंधन की पार्टियां यह कह रही है कि गरीबों को वोट देने से रोकने की साजिश हो रही है.

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Rahul Gandhi : बिहार विधानसभा चुनाव से पहले चुनाव आयोग द्वारा मतदाता सूची में कराए जा रहे व्यापक बदलाव (Special Intensive Revision) का विरोध करते हुए महागठबंधन की विभिन्न पार्टियां आज सड़क पर उतरीं हैं और बिहार बंद का आह्वान किया है. इस मौके पर कांग्रेस नेता राहुल गांधी भी राजद नेता तेजस्वी यादव के साथ सड़क पर उतरे हैं और चुनाव आयोग पर तीखा हमला बोला है. उन्होंने कहा कि बिहार में युवाओं और गरीबों का वोट चोरी करने की कोशिश की जा रही है. महाराष्ट्र में बीजेपी ने चुनाव आयोग की मदद से वोट की चोरी की. लेकिन हम बिहार में यह चोरी नहीं होने देंगे. मतदाता सूची में जो फेरबदल की जा रही है, वह सबकुछ बीजेपी की मदद से हो रहा है, चुनाव आयोग निष्पक्ष होकर नहीं बल्कि बीजेपी के लिए काम कर रहा है, इसे कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा.

चुनाव आयोग ने मतदाता सूची में क्या किया है बदलाव

बिहार चुनाव से पहले चुनाव आयोग ने मतदाता सूची को अपडेट करने का काम शुरू किया है, जिसमें नए मतदाताओं के नाम जोड़े जा रहे हैं और वैसे वोटर जो अब नहीं हैं, उनके नाम हटाए जाएंगे. चुनाव आयोग ने इसके लिए एक फाॅर्म सभी मतदाताओं से भरवाना शुरू किया है, जिसमें अपने बारे में कुछ जरूरी जानकारी वोटर्स को देनी है, जैसे नाम, एपिक नंबर आदि भरना होता है. जो नए मतदाता हैं उनके पास अगर एपिक नंबर नहीं है, तो उन्हें अपने माता-पिता का डिटेल देना होगा. चुनाव आयोग जो जानकारी मांग रहा है, उसमें दो प्रावधान किए गए हैं, जैसे 2003 या उसके बाद पैदा हुए मतदाताओं को अपना जन्मप्रमाण पत्र या माता-पिता के वोटरआईडी का एपिक नंबर देना होगा. जबकि 2003 से पहले पैदा हुए लोगों को कोई दस्तावेज नहीं देना है.

मतदाता सूची को अपडेट करने पर राजनीति क्यों?

चुनाव आयोग का कहना है कि उसने मतदाता सूची को अपडेट करने का काम इसलिए शुरू किया है, ताकि कोई योग्य मतदाता वोट करने से छूट ना जाए. ऐसे में सवाल यह है कि आखिर फिर क्यों विपक्षी पार्टियां इसे वोट चोरी का जरिया बता रही हैं. चुनाव आयोग यह भी दावा कर रहा है कि आम आदमी को इस अपडेट से कोई दिक्कत नहीं है और अबतक 50% फाॅर्म जमा किए जा चुके हैं.वहीं महागठबंधन के नेता यह कह रहे हैं कि गरीबों का नाम वोटर लिस्ट से हटाने के लिए बीजेपी ने यह साजिश रची है. वे जनता के मन में भय बनाना चाह रहे हैं .


राशनकार्ड और आधारकार्ड के जरिए मतदाता सूची में नहीं जुड़ेगा नाम

2003 के बाद पैदा हुए लोगों का नाम मतदाता सूची में जोड़ने के लिए अब उन्हें अपने माता-पिता का डिटेल देना होगा, जैसे उनका एपिक नंबर. साथ ही उनका जन्मप्रमाण पत्र भी देना होगा. जबकि वैसे व्यक्ति जो 2003 से पहले पैदा हुए हैं और उनका नाम वोटरलिस्ट में नहीं है, तो राशन कार्ड और आधार कार्ड के जरिए वोटरलिस्ट में उनका नाम नहीं जुड़ेगा. इसके पीछे वजह गलत व्यक्ति का नाम वोटरलिस्ट में जोड़ने से रोकना है. किसी भी योग्य व्यक्ति का नाम वोटरलिस्ट से नहीं हटेगा.

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Rajneesh Anand

लेखक के बारे में

By Rajneesh Anand

राजनीति,सामाजिक, इतिहास, खेल और महिला संबंधी विषयों पर गहन लेखन किया है. तथ्यपरक रिपोर्टिंग और विश्लेषणात्मक लेखन में रुचि. इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक. IM4Change, झारखंड सरकार तथा सेव द चिल्ड्रन के फेलो के रूप में कार्य किया है. पत्रकारिता के प्रति जुनून है. प्रिंट एवं डिजिटल मीडिया में 20 वर्षों से अधिक का अनुभव.

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