Mughal Harem Stories : हिंदू रानियां राजनीतिक समझौते की वजह से मुगल हरम तक पहुंचीं, लेकिन नहीं मिला सम्मान

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Hindu Queen in Mughal Harem

मुगलों के हरम में हिंदू रानियां

Mughal Harem Stories 7 : हिंदू रानियां मुगलों के हरम तक राजनीतिक समझौते और अपनी सुंदरता की वजह से पहुंचीं. इनके बेटे तख्त के वारिस भी बने, लेकिन सच्चाई यह है कि हिंदू रानियों की हरम में कोई हैसियत नहीं होती थी. वे महज राजा की पसंद थीं, उन्हें ना तो कोई प्रशासनिक अधिकार प्राप्त था और ना ही उनकी स्वीकार्यता मुस्लिम रानियों की तरह थी.

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Mughal Harem Stories : मुगलों ने भारत को ना केवल अपनाया बल्कि उन्होंने इस धरती को अपना मान भी माना. मुगल बादशाह बहादुर शाह जफर को जब अंग्रेजों ने बंदी बनाकर रंगून भेज दिया था, तो उन्होंने अपने देश के लिए अपनी मोहब्बत दर्शाते हुए लिखा था- ‘कितना है बदनसीब ‘ज़फ़र’ दफ़्न के लिए दो गज़ ज़मीन भी न मिली कू-ए-यार में’. बहादुर शाह जफर मुगलों का अंतिम बादशाह था. बावजूद इसके जब हम उनके इतिहास को पढ़ेंगे तो यह पाएंगे कि मुगलों ने राजनीतिक संधि के तहत हिंदू औरतों से शादी तो की, लेकिन उन्हें वह सम्मान नहीं दिया, जो उनकी अन्य बीवियों को मिला हुआ था. 

मुगल शासक जिन्होंने हिंदू रानियों से शादी की 

Jodha Bai
जोधाबाई

मुगल शासकों में हिंदू रानियों से शादी करने वाले कई शासक हुए. बाबर और हुमायूं को छोड़ दें तो उसके बाद के लगभग सभी बादशाहों की हरम में हिंदू महिलाएं थीं. लेकिन अकबर जैसे बादशाह ने ही हिंदू रानी जोधाबाई को मान दिया, बाकी राजाओं ने तो उन्हें महज राजनीति का हिस्सा ही माना. अकबर मुगल बादशाह अकबर की 300 से अधिक रानियां थीं, जिनमें से कई हिंदू भी थीं. जिनमें जोधा बाई, राज कुंवारी, भानुमती, नाथी बाई, पूरम बाई, रुक्मावती, हीरा कुमारी और बीबी दौलत शाद का नाम शामिल है. अकबर ने अपनी पसंदीदा पत्नी की लिस्ट में जोधाबाई का नाम रखा था, जो आमेर की राजकुमारी थी और उसका निकाह महज राजनीतिक समझौता था. मुगल बादशाह जहांगीर ने भी दो हिंदू रानियों से निकाह किया था. जिनका नाम मानबाई और जगतगोसाई था. औरंगजेब के बारे में भी यह कहा जाता है कि उन्होंने नवाब बाई और उदैपुरी से शादी थी. ये दोनों अपने पति औरंगजेब से बेहद प्रेम करती थीं.

हिंदू रानियों के बेटे ताज के अधिकारी भी बने

अकबर की पत्नी जोधाबाई जिन्हें मरियम-उज-ज़मानी की उपाधि प्राप्त थी, उन्हें अकबर की प्रमुख रानी माना जाता था. सलीम उनके ही बेटे थे, जिन्हें अकबर का उत्तराधिकारी माना गया और वे जहांगीर के नाम से तख्त पर बैठे. उनके अलावा जहांगीर की पत्नी मानबाई यानी बिलकिस मकानी के बेटे थे शाहजहां, जिन्हें तख्त पर बैठने का अवसर मिला. इनके अलावा आलमीगीर द्वितीय, शाह आलम द्वितीय और बहादुरशाह जफर द्वितीय की मां हिंदू थीं. बहादुर शाह जफर की मां का नाम लालबाई था.

हरम में हिंदू रानियों की नहीं थी हैसियत

मुगलों के हरम पर अगर गौर करें, तो उनके हरम की कमान हमेशा मुस्लिम रानियों के पास ही रही. हिंदू रानियां राजा की चहेती तो बन सकती थीं, लेकिन प्रशासन उन्हें नसीब नहीं हुआ. संभवत: उन्हें उतनी आजादी भी ना मिली हो. अकबर के समय भी जोधाबाई हरम की संचालिका नहीं थी. उनकी मां और माहम अंगा, जो उनकी पालक माता थी, वे हरम पर ज्यादा प्रभाव रखती थीं. नूरजहां और मुमताज महल जैसी रानियां हरम की सबसे ताकतवर महिला बनीं, लेकिन दोनों ही मुस्लिम थीं. जोधाबाई के बारे में यह कहा जाता है कि उन्हें अकबर ने अपने महल में हिंदू रीति-रिवाज से रहने की इजाजत थी, लेकिन इसके पुख्ता प्रमाण नहीं मिलते हैं. हालांकि अकबर एक लिबरल बादशाह था और उसने हिंदू-मुस्लिम एकता की मिसाल भी कायम की थी.

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अकबर की हिंदू पत्नी कौन थी?

अकबर ने कई हिंदू रानियों से शादी की थी. जोधाबाई उनकी प्रिय पत्नी थी जो आमेर की राजकुमारी थी.

जहांगीर की हिंदू पत्नी, जो शाहजहां की मां थी?

जहांगीर की हिंदू पत्नी मानबाई थी, जो शाहजहां की मां थी.

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रजनीश आनंद

लेखक के बारे में

By रजनीश आनंद

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हैं और पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों से अधिक का अनुभव रखती हैं.फिलहाल वे प्रभात खबर के ओरिजिनल, नेशनल, इंटरनेशनल और खेल कैटेगरी के लिए राइटिंग का काम करती हैं. उनकी पहचान फैक्ट बेस्ट रिपोर्टिंग, रिसर्च बेस्ड स्टोरी और एक्सप्लेनर लेखन के लिए है.

राजनीति, सामाजिक सरोकार, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों पर उनकी विशेष रुचि रही है. वैसे मुद्दे जो समाज के हाशिये पर मौजूद समुदायों और आम लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की बहस में अपेक्षाकृत कम जगह पाते हैं, ऐसे विषयों पर भी लेखन में रुचि रखती हैं.

रजनीश आनंद कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर अध्ययन एवं रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर काम किया. इसके अलावा सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की है.

आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है.हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों से जुड़ी चुनौतियों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण सवाल उठाए हैं.

रजनीश आनंद झारखंड की राजधानी रांची में रहती हैं और इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक हैं. उन्होंने वर्ष 2000 में पत्रकारिता की शुरुआत झारखंड जागरण दैनिक से की. इसके बाद प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस और दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और स्वतंत्र लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य प्रकाशनों में काम करने के साथ-साथ वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं.

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Frequently Asked Questions

अकबर ने कई हिंदू रानियों से शादी की थी. जोधाबाई उनकी प्रिय पत्नी थी जो आमेर की राजकुमारी थी.