ममता बनर्जी के प्रस्ताव पर बोले मोहम्मद सलीम- टीएमसी की पाप की लंका में सीपीएम भागीदार नहीं

Published by :Mithilesh Jha
Published at :10 May 2026 7:09 PM (IST)
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CPIM rejects Mamata proposal 2026 Mohammed Salim on TMC alliance West Bengal Politics

ममता बनर्जी और मोहम्मद सलीम.

CPIM rejects Mamata proposal: पश्चिम बंगाल में हार के बाद ममता बनर्जी ने भाजपा के खिलाफ वाममोर्चा से समर्थन मांगा, तो CPIM ने इससे ठुकरा दिया. मोहम्मद सलीम ने कहा कि भाजपा को बंगाल लाने के लिए टीएमसी ही जिम्मेदार है. पढ़ें राजनीतिक घमासान की पूरी रिपोर्ट.

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CPIM rejects Mamata proposal: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के नतीजों ने राज्य की सियासत को पूरी तरह बदलकर रख दिया है. 15 साल बाद सत्ता गंवाने और 80 सीटों पर सिमटने के बाद तृणमूल कांग्रेस की सुप्रीमो ममता बनर्जी ने भाजपा के खिलाफ एकजुट होकर लड़ने का दांव चला है.

दीदी ने लेफ्ट को दिया साझा मंच पर आने का प्रस्ताव

तृणमूल सुप्रीमो ने वामपंथी दलों (वाममोर्चा) को भाजपा के खिलाफ साझा मंच पर आने का प्रस्ताव दिया, लेकिन माकपा (CPIM) ने इस प्रस्ताव को सिरे से खारिज कर दिया है. माकपा राज्य सचिव मोहम्मद सलीम ने स्पष्ट कर दिया है कि भाजपा को बंगाल में लाने के लिए ममता बनर्जी की नीतियां ही जिम्मेदार हैं, ऐसे में उनके साथ हाथ मिलाने का सवाल ही पैदा नहीं होता.

ममता का यूनाइटेड फ्रंट का दांव और माकपा का वार

चुनावी हार और भाजपा की 207 सीटों वाली प्रचंड जीत के बाद ममता बनर्जी ने विपक्षी एकता की बात छेड़ी थी. उन्होंने अपील की थी कि लोकतंत्र और बंगाल की अस्मिता बचाने के लिए सभी धर्मनिरपेक्ष ताकतों को, जिसमें वामदल भी शामिल हैं, एक साथ आना चाहिए.

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सलीम ने प्रस्ताव को बताया ममता बनर्जी का राजनीतिक ढोंग

मोहम्मद सलीम ने इस प्रस्ताव को ‘राजनीतिक ढोंग’ करार दिया. उन्होंने कहा- ममता बनर्जी ने ही बंगाल में वामपंथ को खत्म करने के लिए भाजपा का रास्ता साफ किया था. आज जब वे खुद संकट में हैं, तो उन्हें हमारी याद आ रही है. टीएमसी और भाजपा एक ही सिक्के के दो पहलू हैं.

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TMC ही भाजपा की असली मददगार : माकपा

माकपा और अन्य वामपंथी दलों ने इस इनकार के पीछे ठोस तर्क दिये हैं. माकपा नेताओं का मानना है कि टीएमसी के साथ गठबंधन करने से उनकी बची-कुची साख भी खत्म हो जायेगी, क्योंकि जनता टीएमसी के भ्रष्टाचार और ‘सिंडिकेट राज’ से तंग आकर ही भाजपा की ओर मुड़ी है.

आरजी कर कांड की टीस और स्वतंत्र पहचान

चुनाव प्रचार के दौरान आरजी कर अस्पताल की घटना और महिला सुरक्षा के मुद्दे पर वामपंथी दलों ने ममता सरकार को जमकर घेरा था. ऐसे में अचानक हाथ मिलाना उनके कैडर को स्वीकार्य नहीं होगा. वाममोर्चा अब भाजपा के खिलाफ एक ‘तीसरे विकल्प’ के रूप में अपनी स्वतंत्र पहचान दोबारा बनाने की कोशिश में है, न कि टीएमसी की बैसाखी बनने में.

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CPIM rejects Mamata proposal: विपक्ष में भी मची है ‘रार’

बंगाल की नयी विधानसभा में अब भाजपा सत्ता पक्ष है, जबकि टीएमसी मुख्य विपक्षी दल. लेकिन वामपंथियों के इस इनकार ने ममता बनर्जी की उस रणनीति को बड़ा झटका दिया है, जिसके जरिये वे केंद्र और राज्य की नयी सरकार को ‘संयुक्त विपक्ष’ के नाम पर घेरना चाहती थीं. माकपा का मानना है कि ममता बनर्जी अभी भी हार स्वीकार नहीं कर पा रही हैं और ‘साजिश’ के आरोपों के पीछे अपनी विफलताओं को छिपा रही हैं.

बंगाल में काम नहीं कर रहा ‘दुश्मन का दुश्मन दोस्त’ वाला फॉर्मूला

बंगाल की राजनीति अब ऐसे मोड़ पर है, जहां ‘दुश्मन का दुश्मन दोस्त’ वाला फॉर्मूला फिलहाल काम करता नजर नहीं आ रहा है. माकपा ने साफ कर दिया है कि वे सदन से सड़क तक भाजपा का विरोध करेंगे, लेकिन ममता बनर्जी के झंडे के नीचे कभी नहीं.

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मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 30 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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