सिनेमा से सत्ता तक: कैसे विजय थलपति बने तमिलनाडु की राजनीति के नए मास स्टार
विजय थलपति
Joseph Vijay : एक्टर विजय तमिलनाडु के मुख्यमंत्री बन गये हैं. उनकी पार्टी टीवीके को चुनाव में 108 सीटें मिली और अब उन्होंने कांग्रेस, कम्युनिस्ट पार्टी और वीसीके के समर्थन से सरकार बना ली है. विजय की सबसे बड़ी ताकत उनकी जनता से जुड़ी छवि मानी जाती है. फिल्मों में उन्होंने अक्सर सिस्टम से लड़ने वाले नायक का किरदार निभाया और चुनाव में भी उन्होंने जनता को यही बताया कि वे सिस्टम बदल देंगे. एमजीआर और जयललिता के बाद अब तमिलनाडु की राजनीति पर विजय का स्टारडम दिखेगा.
Joseph Vijay : तमिलगा वेत्री कषगम (टीवीके) के प्रमुख एवं पार्टी के विधायक दल के नेता सी जोसेफ विजय ने 10 मई को तमिलनाडु के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली. राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर ने चेन्नई के नेहरू स्टेडियम में आयोजित रंगारंग समारोह में उन्हें पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई. आइए जानते हैं कैसा रहा है विजय का एक अभिनेता से नेता बनने का सफर.
फिल्मी परिवार से निकल कर राजनीति में एंट्री
सी जोसेफ विजय का जन्म 22 जून 1974 को चेन्नई में हुआ है. उनके पिता एसए चंद्रशेखर तमिल फिल्मों के निर्देशक रहे हैं. मां शोभा चंद्रशेखर एक गायिका है. विजय ने बाल कलाकार के रूप में फिल्मों में कदम रखा था. 1984 में फिल्म वेट्री (Vetri) से बाल कलाकार के रूप में डेब्यू किया. विजय ने नालैया थीरपु मूवी से मुख्य अभिनेता के रूप में शुरुआत की, लेकिन उनके लिए रास्ता बहुत कठिन था. उन्हें शुरुआती दौर में सफलता नहीं मिली. उसके बाद आई पूवे उनक्कागा, यह एक रोमांटिक काॅमेडी मूवी थी, जिसने विजय की छवि बदली और उसे सफलता के शिखर तक पहुंचाया.
विजय बने रोमांटिक हीरो से मास स्टार
1990 और 2000 के दशक में विजय ने लगातार कई हिट फिल्में दीं. कधालुक्कु मरियाधई, कुशी और फ्रेंड्स जैसी फिल्मों ने उन्हें रोमांटिक स्टार बनाया, जबकि घिल्ली, थिरुपाची और पोक्किरी ने उन्हें मास हीरो बनाया. उन्होंने मास स्टार बनने के लिए आम आदमी से जुड़े मुद्दों को उठाया. उनकी फिल्मों में आम आदमी, भ्रष्टाचार विरोध, सामाजिक न्याय और व्यवस्था से संघर्ष जैसे मुद्दे दिखाए गए और वे आम लोगों तक पहुंच गए. यही कारण है कि विजय की लोकप्रियता सिर्फ सिनेमाघरों तक सीमित नहीं रही, बल्कि युवाओं और मध्यम वर्ग के बीच उनकी मजबूत राजनीतिक छवि भी बनने लगी.
साफ छवि और नयी विचारधारा से राजनीति में एंट्री
विजय लंबे समय से सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों पर सक्रिय रहे थे. 2009 में उन्होंने अपने फैन क्लब विजय मक्कल इयक्कम के जरिए सामाजिक कार्यों को बढ़ाया और वे राजनीतिक रूप से सक्रिय हुए. 2019 में उन्होंने नागरिकता संशोधन कानून (CAA) का विरोध किया. इसके बाद उनके राजनीतिक रुख को लेकर चर्चाएं तेज हो गईं. फरवरी 2024 में विजय ने अपनी राजनीतिक पार्टी टीवीके (Tamilaga Vettri Kazhagam) की घोषणा की और फिल्मों से दूरी बनाकर सक्रिय राजनीति में आने का फैसला किया.उनकी राजनीति की सबसे बड़ी ताकत उनकी साफ छवि है. उन्होंने युवाओं में एक नया जोश भरा है. विजय ने अपनी साफ छवि और नयी विचारधारा से द्रमुक पहचान वाली पार्टियों को पटखनी दी.
संगीता सोरनालिंगम श्रीलंकाई तमिल से की शादी
विजय की पार्टी टीवीके को तमिलनाडु चुनाव में 108 सीटें मिली हैं. उन्होंने एक श्रीलंकाई तमिल संगीता सोरनालिंगम से शादी की. इनके दो बच्चे हैं, एक बेटा और एक बेटी. हालांकि हाल के कुछ वर्षों में उनका संबंध उनकी को स्टार तृषा कृष्णन से जोड़ा गया है. मतगणना के दिन भी तृषा उनके घर पहुंची थी और बालाजी मंदिर जाकर पूजा की थी.
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By Rajneesh Anand
रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है.पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों का अनुभव रखती हैं. झारखंड की राजधानी रांची में रहने वाली रजनीश ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की और वर्ष 2000-01 में पत्रकारिता की शुरुआत की. इन्होंने पहली नौकरी झारखंड जागरण दैनिक अखबार में की. उसके बाद इन्होंने प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस तथा दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य संस्करणों में काम करने के बाद वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. रजनीश आनंद की पहचान तथ्यपरक रिपोर्टिंग, गहन शोध और विश्लेषणात्मक लेखन के लिए है. उनकी रुचि राजनीति, सामाजिक सरोकारों, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों में रही है। उन्होंने हमेशा उन मुद्दों को प्राथमिकता दी है जो समाज के हाशिये पर खड़े लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की चर्चा में अपेक्षाकृत कम स्थान पाते हैं. वे कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर विस्तृत अध्ययन और रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान उन्होंने महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर कार्य किया. इसके अतिरिक्त सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत उन्होंने बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की. आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है. हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में भविष्य की चुनौतियों, रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं. उनका मानना है कि ऊर्जा परिवर्तन की प्रक्रिया तभी सफल होगी जब उसमें प्रभावित समुदायों की भागीदारी और हितों को केंद्र में रखा जाए.पत्रकारिता उनके लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का माध्यम है. जमीनी रिपोर्टिंग, तथ्यों की पड़ताल और जनसरोकारों को केंद्र में रखकर लिखना उनकी कार्यशैली की विशेषता रही है. इसके अतिरिक्त रजनीश आनंद कहानियां और कविताएं लिखने का शौक भी रखती है.
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