PHOTOS : तस्वीरों में देखिए बिहार के प्रमुख पौराणिक स्थल, जहां जुड़ी हैं रामायण और महाभारत से लेकर प्राचीन आस्था की कहानियां

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बिहार के पौराणिक स्थलों की यात्रा करें, जहां रामायण और महाभारत की गाथाएं आज भी जीवंत हैं. पुनौरा धाम, विष्णुपद मंदिर और वाल्मीकि आश्रम जैसे प्राचीन स्थानों की तस्वीरें देखें.
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बिहार के पौराणिक स्थलों की यात्रा करें, जहां रामायण और महाभारत की गाथाएं आज भी जीवंत हैं. पुनौरा धाम, विष्णुपद मंदिर और वाल्मीकि आश्रम जैसे प्राचीन स्थानों की तस्वीरें देखें.

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पुनौरा धाम, सीतामढ़ी
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पुनौरा धाम

पुनौरा धाम, सीतामढ़ी

सीतामढ़ी का पुनौरा धाम माता सीता की जन्मस्थली के रूप में धार्मिक मान्यता रखता है. मान्यता है कि राजा जनक को यहीं भूमि जोतते समय सीता मिली थीं. यहां स्थित जानकी मंदिर श्रद्धालुओं के प्रमुख आस्था केंद्रों में शामिल है.

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पंथ पाकर, सीतामढ़ी
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पंथ पाकर

पंथ पाकर, सीतामढ़ी

सीतामढ़ी का पंथ पाकर रामायण की कथा से जुड़ा महत्वपूर्ण स्थल माना जाता है. मान्यता है कि विवाह के बाद सीता और भगवान राम की यात्रा के दौरान यहां विश्राम हुआ था.

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हलेश्वर स्थान, सीतामढ़ी
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हलेश्वर स्थान

हलेश्वर स्थान, सीतामढ़ी

हलेश्वर स्थान भगवान शिव को समर्पित प्राचीन धार्मिक स्थल है. पौराणिक मान्यता के अनुसार मिथिला के राजा जनक ने यहां पुत्रेष्टि यज्ञ के अवसर पर शिव मंदिर की स्थापना की थी.

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विष्णुपद मंदिर, गया
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विष्णुपद मंदिर

विष्णुपद मंदिर, गया

गया का विष्णुपद मंदिर भगवान विष्णु के चरणचिह्न के लिए प्रसिद्ध है. धार्मिक मान्यता के अनुसार गया में भगवान राम ने अपने पिता दशरथ के लिए पिंडदान किया था. मंदिर फल्गु नदी के किनारे स्थित है.

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सीता कुंड, गया
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सीता कुंड

सीता कुंड, गया

गया का सीता कुंड पिंडदान की परंपरा और रामायण से जुड़ी धार्मिक मान्यताओं के कारण महत्वपूर्ण है. मान्यता है कि माता सीता ने यहां राजा दशरथ के लिए पिंडदान किया था.

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मां मुंडेश्वरी मंदिर, कैमूर
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मां मुंडेश्वरी मंदिर

मां मुंडेश्वरी मंदिर, कैमूर

कैमूर की मुंडेश्वरी पहाड़ी पर स्थित मां मुंडेश्वरी मंदिर प्राचीन धार्मिक विरासत का महत्वपूर्ण केंद्र है. मंदिर भगवान शिव और शक्ति को समर्पित है और इसकी अष्टकोणीय स्थापत्य शैली विशेष आकर्षण है.

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वाल्मीकि आश्रम, वाल्मीकिनगर
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वाल्मीकि आश्रम

वाल्मीकि आश्रम, वाल्मीकिनगर

वाल्मीकिनगर में स्थित वाल्मीकि आश्रम को महर्षि वाल्मीकि से जुड़ा स्थल माना जाता है. बिहार पर्यटन के अनुसार यहां प्राचीन मंदिरों के साथ वाल्मीकि आश्रम भी प्रमुख आकर्षण है.

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निखिल अनुराग

लेखक के बारे में

By निखिल अनुराग

मूलतः निखिल अनुराग. पेशे से पत्रकार. बुद्ध की धरती पर जन्म. बिहार का सबसे नवीनतम जिला (अरवल) से ताल्लुक. पढ़ाई की शुरूआत गांव से ही. फिर गंगा के तट पटना पहुंचा. ज्ञान की धरती से कुछ तालीम हासिल कर राष्ट्रीय राजधानी की ओर कूच. पत्रकारिता में पोस्ट ग्रेजुएट. नोएडा की धरती पर विद्वतजन से कुछ न कुछ सीखा. करंट अफ़ेयर्स, राजनीति, खेल, अंतरराष्ट्रीय संबंध, गाँव, खेत-किसान पसंदीदा टॉपिक. स्कूल, कॉलेज युनिवर्सिटी में यूथ से गपशप करना एनर्जी का अतिरिक्त स्रोत. साल 2020 में नोएडा से शुरू हुई इस लेखन यात्रा कलम, डेस्कटॉप, लैपटॉप के की-बोर्ड से होते हुए स्मार्ट फोन तक पहुंच गयी. ज्यों-ज्यों उम्र बढ़ रही है, सीखने, पढ़ने, लिखने की भूख भी बढ़ रही है.

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