राष्ट्रीय राजमार्ग-14  के किनारे बिजली खंभे के नीचे धंसी जमीन, गड्ढे में फंसा टोटो

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नेशनल हाईवे के के किनारे धंसी जमीन | Prabhat Khabar Network

रानीगंज में राष्ट्रीय राजमार्ग-14 के किनारे अचानक जमीन धंसने से हड़कंप मच गया. बिजली के खंभे के नीचे बने गड्ढे में एक टोटो फंस गया, गनीमत रही कि कोई घायल नहीं हुआ. पढ़ें पूरी रिपोर्ट.

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रानीगंज में राष्ट्रीय राजमार्ग-14 के किनारे शिशुबागान मोड़ इलाके में रविवार को उस समय हड़कंप मच गया, जब एक उच्च क्षमता वाले बिजली के खंभे के नीचे अचानक जमीन धंस गयी. देखते ही देखते वहां करीब पांच से छह फीट गहरा गड्ढा बन गया. घटना के समय वहां खड़ा एक टोटो अचानक गड्ढे में फंस गया. हालांकि आसपास मौजूद लोगों ने तत्काल टोटो को वहां से बाहर निकाल लिया. घटना में किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है.

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, रविवार शाम करीब चार बजे शिशुबागान मोड़ स्थित नजरूल मूर्ति के सामने अचानक बिजली के खंभे के नीचे जमीन धंस गयी. व्यस्त इलाके में अचानक जमीन धंसने की घटना से आसपास के लोग भयभीत हो गये. शिशुबागान इलाका राष्ट्रीय राजमार्ग के व्यस्ततम हिस्सों में शामिल है. यहां से प्रतिदिन बड़ी संख्या में छोटे-बड़े वाहन गुजरते हैं. ऐसे में सड़क के किनारे इस तरह जमीन धंसने की घटना ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है.

तीन वर्ष पहले भी हुआ था धंसाव

स्थानीय लोगों के अनुसार, करीब तीन वर्ष पहले भी इसी इलाके में जमीन धंसने की घटना हुई थी.जिसे आसनसोल  नगर  निगम को बनाने में कई माह लग गए थे.वर्तमान में जिस स्थान पर नया गड्ढा बना है, वह पुराने धंसाव वाले हिस्से के काफी करीब है.इसे लेकर आशंका जतायी जा रही है कि यदि समय रहते इसकी जांच नहीं की गयी, तो धंसाव का दायरा बढ़ सकता है,लोग फिर परेशानी में पड़ सकते है.

स्थानीय लोगों का कहना है कि ब्रिटिश शासनकाल में इस क्षेत्र में जल निकासी के लिए कई नालियां बनायी गयी थीं.इन नालियों के जरिये पानी बड़े (हाई ड्रेन) नाले तक पहुंचता था. आशंका जतायी जा रही है कि पुराने नाले का कोई हिस्सा जमीन के नीचे से इस क्षेत्र से होकर गुजरता हो. हालांकि इसकी वास्तविक स्थिति जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी.

पुराने जलाशय को लेकर भी उठ रहे सवाल

शिशुबागान के डोमपाड़ा इलाके में पहले एक बड़ा जलाशय हुआ करता था. स्थानीय लोगों के अनुसार, ब्रिटिश काल में इलाके में स्थित कोयला खदान के कारण उक्त जलाशय का एक हिस्सा जमीन के भीतर समा गया था. इसके बाद धीरे-धीरे जलाशय का अस्तित्व खत्म होता गया और बाद में वहां आबादी बस गयी.

स्थानीय लोगों का दावा है कि आसपास के इलाकों में पहले भी कई बार जमीन धंसने की घटनाएं हुई हैं. इसके बावजूद लोग वहां रह रहे हैं. अब राष्ट्रीय राजमार्ग के किनारे दोबारा जमीन धंसने की घटना सामने आने के बाद पुराने भू-धंसाव को लेकर चर्चा फिर तेज हो गयी है.

स्थानीय लोगों ने बारिश को बताया संभावित कारण

हालांकि स्थानीय निवासियों का कहना है कि फिलहाल इसे बड़े भू-धंसाव के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए. उनका अनुमान है कि लगातार बारिश के कारण पानी जमीन के भीतर चला गया होगा और पुराने नाले-नालियों के रास्ते मिट्टी खिसकने से यह छोटा गड्ढा बना होगा.बिजली के खंभे के आसपास मिट्टी भरकर इसे दुरुस्त किया जा सकता है.

फिलहाल घटना के बाद इलाके में सतर्कता बढ़ गयी है.अब देखना यह है कि बिजली के खंभे के नीचे बना यह गड्ढा यहीं तक सीमित रहता है या आने वाले दिनों में इसका दायरा और बढ़ता है.


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Jitendra Trivedi

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By Jitendra Trivedi

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