12वें वेतन समझौते की मांग पर ईसीएल में मजदूरों का जोरदार प्रदर्शन, श्रम कोड के विरोध में धरना

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प्रदर्शन मे शामिल पदाधिकारी | Prabhat Khabar Network

ईसीएल में 12वें वेतन समझौते और जेबीसीसीआइ-12 के गठन की मांग को लेकर कोयला मजदूरों ने किया जोरदार प्रदर्शन, श्रम कोड का भी किया विरोध.

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पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के तहत सोमवार को पश्चिम बर्धमान जिले के कोयलांचल क्षेत्र में ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (ईसीएल) के विभिन्न क्षेत्रों के महाप्रबंधक कार्यालयों के समक्ष विभिन्न ट्रेड यूनियनों के संयुक्त मंच की ओर से जोरदार धरना-प्रदर्शन किया गया। प्रदर्शन में बड़ी संख्या में कोयला श्रमिकों ने हिस्सा लेकर अपनी मांगों के समर्थन में आवाज बुलंद की.

यह संयुक्त आंदोलन ईसीएल के सोदपुर, सलानपुर, श्रीपुर, सतग्राम, कुनुस्तोरिया, कजोड़ा, केंदा, बांकोला और पांडवेश्वर सहित अन्य क्षेत्रों में आयोजित किया गया. इसके अलावा झारखंड के मुगमा, चितरा और ललमटिया सहित विभिन्न कोयला क्षेत्रों में भी मजदूरों ने सामूहिक रूप से धरना और विरोध प्रदर्शन किया.

आंदोलन में एटक, सीटू, एसएमएस, इंटक, केएमएस, यूटीयूसी, टीयूसीसी सहित विभिन्न केंद्रीय ट्रेड यूनियनों के संयुक्त मंच ने हिस्सा लिया. प्रदर्शन के दौरान श्रमिकों ने 12वें वेतन समझौते को शीघ्र लागू करने और जेबीसीसीआइ-12 का तत्काल गठन करने की मांग की.

जुलाई से लंबित है 12वां वेतन समझौता

ट्रेड यूनियन नेताओं ने कहा कि कोयला कर्मचारियों का एनसीडब्ल्यूए -12 यानी 12वां वेतन समझौता जुलाई महीने से लंबित है। इसके बावजूद अभी तक प्रबंधन एवं संबंधित श्रम मंत्रालय की ओर से जेबीसीसीआइ-12 कमेटी का गठन नहीं किया गया है. इससे कोयला मजदूरों में भारी असंतोष है.

वक्ताओं ने कहा कि कोयला उद्योग के लाखों श्रमिक अपने अधिकारों और उचित वेतन समझौते की प्रतीक्षा कर रहे हैं. समय पर जेबीसीसीआइ का गठन नहीं होने से वेतन समझौते की प्रक्रिया में अनावश्यक देरी हो रही है। यूनियनों ने प्रबंधन से मांग की कि मजदूरों के हित में तत्काल वार्ता की प्रक्रिया शुरू की जाए.

श्रम कोड का भी किया विरोध

धरना-प्रदर्शन के दौरान केंद्र सरकार की श्रम नीतियों का भी विरोध किया गया. ट्रेड यूनियन नेताओं ने आरोप लगाया कि नए श्रम कोड के माध्यम से श्रमिकों के वर्षों से हासिल अधिकारों को कमजोर करने का प्रयास किया जा रहा है. नेताओं ने स्पष्ट कहा कि मजदूरों के अधिकारों और सामाजिक सुरक्षा से किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा.

एटक नेताओं ने विभिन्न क्षेत्रों में संभाली आंदोलन की कमान

आंदोलन को सफल बनाने में एटक एवं कोलियरी मजदूर सभा के नेताओं की महत्वपूर्ण भूमिका रही। कोलियरी मजदूर सभा के जनरल सेक्रेटरी गुरदास चक्रवर्ती, संयुक्त सचिव अनिल सिंह, कार्यकारिणी अध्यक्ष गोपाल शरण ओझा, सचिव अमर सिंह, राजेंद्र राम, दिलीप दास मानिकपुरी, प्रद्युत चक्रवर्ती, उपाध्यक्ष राजेश सिंह, शनिचरदुरी, विजय मंडल, रमेश सिंह, जोगेंद्र प्रसाद, विजय मिश्रा, रघुवंश तिवारी, जानकी साहू तथा कोषाध्यक्ष ओमप्रकाश तिवारी सहित अनेक नेताओं ने अपने-अपने क्षेत्रों में आंदोलन का नेतृत्व किया.

नेताओं ने कहा कि यह आंदोलन केवल वेतन समझौते तक सीमित नहीं है, बल्कि यह कोयला मजदूरों के अधिकार, सम्मान, रोजगार सुरक्षा और बेहतर सेवा शर्तों की लड़ाई है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जेबीसीसीआइ-12 का गठन शीघ्र नहीं किया गया और 12वें वेतन समझौते की प्रक्रिया शुरू नहीं हुई, तो आने वाले दिनों में आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा.

धरना-प्रदर्शन के दौरान श्रमिकों ने एकजुट होकर अपनी मांगों के समर्थन में नारे लगाए और केंद्र सरकार एवं कोल इंडिया प्रबंधन से मजदूरों की मांगों पर तत्काल सकारात्मक कदम उठाने की मांग की. पूरे कोल इंडिया में आयोजित इस संयुक्त आंदोलन को ट्रेड यूनियनों ने मजदूर एकता और अपने अधिकारों की लड़ाई का महत्वपूर्ण चरण बताया.


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Santosh Vishwakarma

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