डोकलाम ट्राइजंक्शन तक जायेगी ट्रेन, शुभेंदु सरकार ने 380 हेक्टेयर भूमि अधिग्रहण को दी मंजूरी

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नक्शे में इस जगह है डोकलाम.

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Doklam Border Railway Project: पश्चिम बंगाल सरकार ने डोकलाम के पास चालसा-नक्सलबाड़ी रेल प्रोजेक्ट के लिए 380 हेक्टेयर भूमि अधिग्रहण को हरी झंडी दे दी है. जलढाका के लिए 272 करोड़ रुपए की लागत से नयी रेल लाइन को भी रेल मंत्रालय से मंजूरी मिल गयी है.

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Doklam Border Railway Project: चीन-भारत-भूटान सीमा के पास और सामरिक दृष्टि से सबसे संवेदनशील डोकलाम (Doklam) और सिलीगुड़ी कॉरिडोर (चिकन नेक) के करीब भारतीय रेल की पहुंच मजबूत होगी. पश्चिम बंगाल सरकार ने भारत-चीन-भूटान ट्राइजंक्शन के बेहद करीब स्थित चालसा-नक्सलबाड़ी (Chalsa-Naxalbari / Chalsa-Naxak) रेल लाइन प्रोजेक्ट के लिए लगभग 380 हेक्टेयर भूमि के त्वरित अधिग्रहण (Fast-Track Land Acquisition) की हरी झंडी दे दी है. वर्षों से लटके इस 20 किलोमीटर लंबे रणनीतिक रेल कॉरिडोर के बनने से भारतीय सेना और भारी सैन्य साज-ओ-सामान की सीमावर्ती इलाकों तक आवाजाही में क्रांतिकारी बदलाव आयेगा.

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वर्षों से अटकी थी योजना, भाजपा सरकार बनने के बाद बढ़ी रफ्तार

चालसा-नक्सलबाड़ी न्यू ब्रॉडगेज लाइन प्रोजेक्ट को सबसे पहले वित्त वर्ष 2011-12 में मंजूरी दी गयी थी. हालांकि, भूमि अधिग्रहण और समन्वय की कमी के कारण वर्ष 2019 में इसे रोक दिया गया था. वर्ष 2026 की शुरुआत में रेलवे ने इस प्रोजेक्ट को पुनर्जीवित किया. अब राज्य की शुभेंदु अधिकारी सरकार से भूमि अधिग्रहण की मंजूरी मिलने के बाद इस प्रोजेक्ट को नयी रफ्तार मिलेगी. सिलीगुड़ी के सांसद राजू बिष्ट ने बताया कि केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बंगाल की लंबित रेल परियोजनाओं की समीक्षा के बाद इस बहुप्रतीक्षित परियोजना को रफ्तार मिली है.

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चीन की चुनौतियों का भारत का करारा जवाब

वर्ष 2017 में 73 दिनों तक चले ‘डोकलाम विवाद’ के बाद चीन ने तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र में सड़कों और रेल इन्फ्रास्ट्रक्चर का भारी विस्तार किया है. भारत की तरफ से यह कदम भारतीय सेना के लिए फोर्स मल्टीप्लायर साबित होगा.

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जलढाका के लिए 272 करोड़ की नयी 17 किमी रेल लाइन भी मंजूर

सीमावर्ती बुनियादी ढांचे को और मजबूत करने के लिए रेल मंत्रालय ने 272 करोड़ रुपए की लागत से जलढाका तक 17 किलोमीटर लंबी एक और रेल लाइन बिछाने की स्वीकृति दी है. इस परियोजना में कहां-कहां तक पहुंचेगी ट्रेन और इसके क्या होंगे फायदे, इसके बारे में जानें.

  • रूट विस्तार : प्रस्तावित रेल लाइन चालसा के पास खूनिया मोड़ से शुरू होकर जलपाईगुड़ी और कलिम्पोंग वन प्रभागों (Forest Divisions) से होकर गुजरेगी.
  • संयुक्त सर्वेक्षण : मानसून का मौसम समाप्त होने के बाद भारतीय रेल और पश्चिम बंगाल वन विभाग संयुक्त रूप से इस एलाइनमेंट का सर्वे करेंगे.
  • त्वरित सैन्य लामबंदी : आपात स्थिति में पूर्वी हिमालयी सीमाओं तक सैनिकों, टैंकों और भारी हथियारों को काफी कम समय में पहुंचाया जा सकेगा.
  • सड़क मार्ग पर निर्भरता होगी कम : भू-स्खलन और खराब मौसम से प्रभावित होने वाले पहाड़ी सड़क मार्गों के मुकाबले रेल संपर्क हर मौसम में सुरक्षित और तेज विकल्प देगा.
  • पर्यटन को बढ़ावा : रक्षा जरूरतों के अलावा यह नेटवर्क उत्तर बंगाल के जलढाका, बिंदु, तोड़े और तांगता जैसे खूबसूरत इलाकों में पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी नयी ऊंचाई देगा.

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