केरल में CM फेस को लेकर बढ़ी कांग्रेस की परेशानी, वीडी सतीशन के समर्थक सड़क क्यों पर उतरे?

Published by :Rajneesh Anand
Published at :09 May 2026 4:46 PM (IST)
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VD Satheesan and KC Venugopal

वीडी सतीशन और केसी वेणुगोपाल

VD Satheesan : केरल में कौन होगा अगला सीएम इसे लेकर विवाद हो गया है. पार्टी नेतृत्व केसी वेणुगोपाल को मुख्यमंत्री की कुर्सी सौंपना चाहता है, लेकिन पार्टी कार्यकर्ताओं का कहना है कि वीडी सतीशन ने पांच साल तक कम्युनिस्ट शासन के खिलाफ लड़ाई लड़ी है, इसलिए सत्ता उन्हें ही मिलनी चाहिए.

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VD Satheesan : केरल विधानसभा चुनाव में मिली शानदार जीत के बाद भी कांग्रेस की परेशानी बढ़ी हुई है. इसकी वजह है यह है कि कांग्रेस के नेतृत्व वाली यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट मुख्यमंत्री किसे चुने इसे लेकर विवाद शुरू हो गया है. 140 सदस्यीय विधानसभा में यूडीएफ ने 102 सीटें जीतकर स्पष्ट बहुमत हासिल किया है. यह जीत बहुत बड़ी है, लेकिन सीएम फेस को लेकर पार्टी के अंदर जो संघर्ष शुरू हो गया है, वह पार्टी के लिए बड़ा सिरदर्द है. सीएम फेस के लिए मुख्य रूप से दो दावेदार हैं-1. वीडी सतीशन 2. केसी वेणुगोपाल

वीडी सतीशन के समर्थन में सड़क पर उतरे कांग्रेस कार्यकर्ता

वीडी सतीशन केरल विधानसभा में विपक्ष के नेता थे. उन्होंने पिछले 5 सालों में विधानसभा में केरल के मुख्यमंत्री पी विजयन को खूब घेरा और सरकार के खिलाफ आक्रामक भूमिका भी निभाई. उन्होंने भ्रष्टाचार और कई प्रशासनिक मुद्दों पर सरकार पर हमला किया. सतीशन ने चुनाव से पहले यह कहा था कि अगर यूडीएफ 100 सीटें नहीं जीतता है, तो वे राजनीति छोड़ देंगे. चुनाव परिणाम सतीशन के अनुसार ही आए. ऐसे में पार्टी के कार्यकर्ता यह मानते हैं कि केरल में यूडीएफ अगर जीता है, तो उसमें प्रमुख योगदान वीडी सतीशन का है.केरल के कई हिस्सों में कांग्रेस कार्यकर्ता वी वांट वीडी और जिसने लड़ाई लड़ी, वही राज करे जैसे नारों के साथ सड़कों पर उतरे.

मुख्यमंत्री की रेस में केसी वेणुगोपाल के शामिल होने से बढ़ी परेशानी

केरल में सीएम फेस को लेकर विवाद तब बढ़ा जब रेस में केसी वेणुगोपाल का नाम शामिल हो गया. केसी वेणुगोपाल को राहुल गांधी का करीबी माना जाता है. साथ ही यह भी माना जा रहा है कि कांग्रेस के जो 63 सांसद चुनकर आए हैं, उनमें से अधिकांश उनके समर्थक हैं. बावजूद इसके आम कार्यकर्ता यह मानता है कि सतीशन ने पांच साल तक विपक्ष का नेतृत्व किया और जमीनी स्तर CPI(M) सरकार के खिलाफ संघर्ष किया. ऐसे में अगर पार्टी वहां चुनाव जीती है, तो उसका ईनाम भी सतीशन को मिलना चाहिए ना कि वेणुगोपाल को. वेणुगोपाल ना तो विधानसभा के सदस्य हैं और दूसरी बात यह है कि कांग्रेस ने चुनाव से पहले सांसद को विधानसभा चुनाव नहीं लड़ाने का फैसला किया था.

पार्टी नेतृत्व के सामने क्या है चुनौती?

केरल में कांग्रेस की परेशानी सिर्फ इतनी ही नहीं है कि उन्हें दो नेता में से एक को मु्ख्यमंत्री के रूप में चुनना है, पार्टी के सामने चुनौती यह है कि अगर सतीशन को नजरअंदाज किया गया तो कार्यकर्ताओं में नाराजगी बढ़ सकती है. वहीं दूसरी ओर अगर वेणुगोपाल को किनारे किया गया तो केंद्रीय नेतृत्व कमजोर दिख सकता है. कार्यकर्ताओं के सड़कों पर उतरने से पार्टी की छवि बिगड़ी है और प्रदेश अध्यक्ष सनी जोसेफ ने कार्यकर्ताओं को चेतावनी दी है कि वे ऐसा ना करें, बावजूद इसके कार्यकर्ता सड़क पर उतर रहे हैं. केरल के इतिहास में ऐसा पहले भी हुआ है जब 2006 में सीपीएम के सामने अच्युतानंदन और पी विजयन के बीच संघर्ष हुआ था. पार्टी ने अच्युतानंदन को किनारे किया था, लेकिन कार्यकर्ता उनके समर्थन में सड़क पर उतर आए थे. अच्युतानंदन उस वक्त विपक्ष के नेता के तौर पर कांग्रेस के खिलाफ खड़े थे. यही वजह है कि पार्टी असमंजस में है कि वो क्या करे?

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Rajneesh Anand

लेखक के बारे में

By Rajneesh Anand

राजनीति,सामाजिक, इतिहास, खेल और महिला संबंधी विषयों पर गहन लेखन किया है. तथ्यपरक रिपोर्टिंग और विश्लेषणात्मक लेखन में रुचि. इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक. IM4Change, झारखंड सरकार तथा सेव द चिल्ड्रन के फेलो के रूप में कार्य किया है. पत्रकारिता के प्रति जुनून है. प्रिंट एवं डिजिटल मीडिया में 20 वर्षों से अधिक का अनुभव.

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