मुख्यमंत्री नहीं, दोस्तों के लिए आज भी बुबाइ दा हैं शुभेंदु अधिकारी, मित्रों ने बताया- अद्भुत थी याददाश्त

Published by :Mithilesh Jha
Published at :09 May 2026 11:05 AM (IST)
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Suvendu Adhikari Nickname Bubai Da West Bengal News Today

Suvendu Adhikari: शुभेंदु अधिकारी के मुख्यमंत्री बनने पर उनके पुराने दोस्तों ने कॉलेज के दिनों की यादें साझा की हैं. जानें क्यों दोस्त उन्हें ‘बुबाइ दा’ बुलाते थे और कैसी थी उनकी छात्र राजनीति.

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Suvendu Adhikari: पश्चिम बंगाल की कमान संभालने वाले शुभेंदु अधिकारी आज भले ही सूबे के सबसे ताकतवर नेता बन गये हों, लेकिन उनके पुराने मित्रों के लिए वे आज भी वही सरल और मिलनसार बुबाइ दा हैं. पूर्व मेदिनीपुर के रहने वाले शुभेंदु अधिकारी के मुख्यमंत्री बनने की खबर से उनके कॉलेज के साथियों और पुराने मित्रों में जबर्दस्त उत्साह है. उनके स्कूल के मित्र गोपाल कृष्ण दास ने पुरानी यादें ताजा करते हुए बताया कि शुभेंदु छात्र जीवन से ही सुलझे हुए और समस्याओं को जड़ से खत्म करने वाले व्यक्तित्व के धनी रहे हैं.

छात्रों और प्रोफेसरों के बीच बुबाइ दा का जलवा

शुभेंदु अधिकारी के दोस्त गोपाल कृष्ण दास के मुताबिक, कॉलेज के दिनों में शुभेंदु काफी शर्मीले थे, लेकिन उनकी कार्यशैली ऐसी थी कि वे छात्रों और प्रोफेसरों, दोनों के बीच समान रूप से लोकप्रिय थे. उनकी स्मरण शक्ति का हर कोई कायल था. वे उस दौर में भी सैकड़ों फोन नंबर मौखिक सुना दिया करते थे. कॉलेज आते-जाते समय उनका बायां हाथ हमेशा जेब में रहता था. उनकी नेतृत्व क्षमता का ही परिणाम था कि वे लगातार दो कार्यकाल तक कॉलेज के जनरल सेक्रेटरी (जीएस) रहे.

समस्या का समाधान न हो, तब तक नहीं बैठते थे शांत

शुभेंदु अधिकारी की राजनीति की नींव उनके छात्र जीवन में ही पड़ गयी थी. छात्र जीवन में जब भी कोई साथी उनके पास समस्या लेकर आता था, तो बुबाइ दा तब तक चैन से नहीं बैठते थे, जब तक उसका समाधान न मिल जाये. उस दौर में जब बंगाल में वाममोर्चा का दबदबा था, शुभेंदु ने छात्र काउंसिल बनायी और एसएफआई (SFI) के साथ अक्सर उनके वैचारिक मतभेद रहते थे. उनके सीखने की क्षमता और नेतृत्व कौशल ने कई साथियों को राजनीति में आने की प्रेरणा दी.

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Suvendu Adhikari: आज भी कायम है पुरानी दोस्तों से जुड़ाव

दोस्तों का कहना है कि कद और पद बढ़ने के बावजूद शुभेंदु अधिकारी के व्यवहार में रत्ती भर भी बदलाव नहीं आया है. गोपाल कृष्ण दास बताते हैं कि आज भी अगर वे कहीं मिल जाते हैं, तो अपनी कार रुकवाकर पुराने दोस्तों से बात करते हैं और विचार साझा करते हैं. वे व्हाट्सएप के जरिये पुराने साथियों के संपर्क में रहते हैं.

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साथियों को है शुभेंदु अधिकारी पर गर्व

उनके साथियों को गर्व है कि उनका अपना बुबाइ दा अब राज्य की कमान संभालने जा रहा है. दोस्तों का मानना है कि शुभेंदु चाहे कितनी भी ऊंचाइयों को छू लें, वे अपनी जड़ों और पुराने दोस्तों को कभी नहीं भूल सकते.

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मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 30 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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