बिहार कैबिनेट में किस जाति से कितने मंत्री? देखिए सम्राट सरकार की पूरी सोशल इंजीनियरिंग

Published by : Paritosh Shahi Updated At : 07 May 2026 12:12 PM

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सम्राट चौधरी की फाइल फोटो

Bihar Cabinet Expansion: बिहार में सम्राट चौधरी कैबिनेट का आज विस्तार हुआ है. नई टीम में बीजेपी, जेडीयू समेत एनडीए के सभी सहयोगी दलों को जगह मिली है. मंत्रिमंडल में जातीय और क्षेत्रीय संतुलन साधने की कोशिश दिख रही है. पिछड़ा, अति पिछड़ा, दलित, सवर्ण और मुस्लिम समाज से नेताओं को शामिल किया गया है.

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Bihar Cabinet Expansion: बिहार में आज हुए सम्राट चौधरी कैबिनेट विस्तार में बीजेपी ने जातीय और क्षेत्रीय संतुलन साधने की पूरी कोशिश की गई है. पार्टी की तरफ से जिन नेताओं के नाम सामने आए हैं, उनमें सवर्ण, पिछड़ा, अति पिछड़ा और दलित समाज को प्रतिनिधित्व दिया गया है.

बीजेपी कोटे से विजय कुमार सिन्हा (भूमिहार), मिथलेश तिवारी और नीतीश मिश्रा (ब्राह्मण), संजय टाइगर और श्रेयसी सिंह (राजपूत) जैसे सवर्ण चेहरे शामिल हैं. वहीं दिलीप जायसवाल और अरुण शंकर प्रसाद वैश्य समाज से आते हैं.

पार्टी ने पिछड़ा और अति पिछड़ा वर्ग पर भी खास फोकस किया है. रामकृपाल यादव यादव समाज से हैं, जबकि रमा निषाद मल्लाह समाज का प्रतिनिधित्व करती हैं. केदार गुप्ता कानू समाज से आते हैं. प्रमोद चंद्रवंशी, रामचंद्र प्रसाद और लखेंद्र पासवान को भी जगह देकर अलग-अलग वर्गों को साधने की कोशिश हुई है.

नंद किशोर राम रविदास समाज से आते हैं. बिहपुर विधायक इंजीनियर कुमार शैलेन्द्र भूमिहार समाज का बड़ा चेहरा माने जाते हैं. बीजेपी की इस सूची में सामाजिक संतुलन के साथ चुनावी समीकरण भी साफ नजर आ रहा है.

जेडीयू ने कुर्मी, दलित और अति पिछड़ा वर्ग पर लगाया दांव

जेडीयू की सूची में सबसे ज्यादा चर्चा निशांत कुमार को लेकर है. नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार कुर्मी समाज से आते हैं और पहली बार मंत्री बने हैं. इनके अलावा श्रवण कुमार भी कुर्मी समाज का प्रतिनिधित्व करते हैं.

पार्टी ने अति पिछड़ा वर्ग को मजबूत प्रतिनिधित्व दिया है. मदन सहनी मल्लाह समाज से हैं, जबकि दामोदर रावत और शीला मंडल धानुक समाज से आते हैं. बुलो मंडल गंगोता समाज का चेहरा हैं.

जेडीयू ने दलित और अल्पसंख्यक समीकरण पर भी ध्यान दिया है. सुनील कुमार रविदास समाज से आते हैं, जबकि रत्नेश सदा मुसहर समाज का प्रतिनिधित्व करते हैं. अशोक चौधरी पासी समाज से हैं. जमा खान को मुस्लिम समाज से आते हैं.

लेसी सिंह राजपूत समाज से आती हैं और श्वेता गुप्ता वैश्य समाज का प्रतिनिधित्व करती हैं. भगवान सिंह कुशवाहा के जरिए कुशवाहा वोट बैंक को साधने की कोशिश की गई है.

एलजेपीआर ने दलित और सवर्ण चेहरे पर भरोसा जताया

चिराग पासवान की पार्टी एलजेपी (रा) से दो नेताओं के मंत्री बनें हैं. संजय पासवान दलित समाज से आते हैं, जबकि संजय सिंह राजपूत समाज का प्रतिनिधित्व करते हैं. पार्टी ने एक दलित और एक सवर्ण चेहरे को आगे कर संतुलन बनाने की कोशिश की है.

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हम पार्टी से संतोष सुमन का नाम तय माना जा रहा

जीतन राम मांझी की पार्टी हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा से संतोष कुमार सुमन का मंत्री बने हैं. संतोष सुमन मुसहर समाज से आते हैं और दलित राजनीति का बड़ा चेहरा माने जाते हैं. उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी राष्ट्रीय लोक मोर्चा से दीपक प्रकाश मंत्री बने हैं. वह कुशवाहा समाज से आते हैं.

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परितोष शाही पिछले 4 वर्षों से डिजिटल मीडिया और पत्रकारिता में सक्रिय हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत राजस्थान पत्रिका से की और वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल की बिहार टीम का हिस्सा हैं. राजनीति, सिनेमा और खेल, विशेषकर क्रिकेट में उनकी गहरी रुचि है. जटिल खबरों को सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाना और बदलते न्यूज माहौल में तेजी से काम करना उनकी विशेषता है. परितोष शाही ने पत्रकारिता की पढ़ाई बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (BHU) से की. पढ़ाई के दौरान ही पत्रकारिता की बारीकियों को समझना शुरू कर दिया था. खबरों को देखने, समझने और लोगों तक सही तरीके से पहुंचाने की सोच ने शुरुआत से ही इस क्षेत्र की ओर आकर्षित किया. पत्रकारिता में करियर की पहली बड़ी शुरुआत बिहार विधानसभा चुनाव 2020 के दौरान हुई, जब उन्होंने जन की बात के साथ इंटर्नशिप की. इस दौरान बिहार के 26 जिलों में जाकर सर्वे किया. यह अनुभव काफी खास रहा, क्योंकि यहां जमीनी स्तर पर राजनीति, जनता के मुद्दों और चुनावी माहौल को बहुत करीब से समझा. इसी अनुभव ने राजनीतिक समझ को और मजबूत बनाया. इसके बाद राजस्थान पत्रिका में 3 महीने की इंटर्नशिप की. यहां खबर लिखने की असली दुनिया को करीब से जाना. महज एक महीने के अंदर ही रियल टाइम न्यूज लिखने लगे. इस दौरान सीखा कि तेजी के साथ-साथ खबर की सटीकता कितनी जरूरी होती है. राजस्थान पत्रिका ने उनके अंदर एक मजबूत डिजिटल पत्रकार की नींव रखी. पत्रकारिता के सफर में आगे बढ़ते हुए पटना के जनता जंक्शन न्यूज पोर्टल में वीडियो प्रोड्यूसर के रूप में भी काम किया. यहां कैमरे के सामने बोलना, प्रेजेंटेशन देना और वीडियो कंटेंट की बारीकियां सीखीं. करीब 6 महीने के इस अनुभव ने कैमरा फ्रेंडली बनाया और ऑन-स्क्रीन प्रेजेंस को मजबूत किया. 1 अप्रैल 2023 को राजस्थान पत्रिका को प्रोफेशनल तौर पर ज्वाइन किया. यहां 17 महीने में कई बड़े चुनावी कवरेज में अहम भूमिका निभाई. लोकसभा चुनाव 2024 में नेशनल टीम के साथ जिम्मेदारी संभालने का मौका मिला. इसके अलावा मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव के दौरान भी स्टेट टीम के साथ मिलकर काम किया. इस दौरान चुनावी रणनीति, राजनीतिक घटनाक्रम और बड़े मुद्दों पर काम करने का व्यापक अनुभव मिला. फिलहाल परितोष शाही प्रभात खबर डिजिटल बिहार टीम के साथ जुड़े हुए हैं. यहां बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान कई बड़ी खबरों को रियल टाइम में ब्रेक किया, ग्राउंड से जुड़े मुद्दों पर खबरें लिखीं और वीडियो भी बनाए. बिहार चुनाव के दौरान कई जिलों में गांव- गांव घूम कर लोगों की समस्या को जाना-समझा और उनके मुद्दे को जन प्रतिनिधियों तक पहुंचाया. उनकी कोशिश हमेशा यही रहती है कि पाठकों और दर्शकों तक सबसे पहले, सही और असरदार खबर पहुंचे. पत्रकारिता में लक्ष्य लगातार सीखते रहना, खुद को बेहतर बनाना और भरोसेमंद पत्रकार के रूप में अपनी पहचान मजबूत करना है.

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