बंगाल में घुसपैठ के डर ने सीमावर्ती गांवों में भाजपा के पक्ष में हुई राजनीतिक ‘घेराबंदी’, जानें इनसाइड स्टोरी

Published by :Mithilesh Jha
Published at :10 May 2026 7:03 AM (IST)
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Jamaat Rise in Bangladesh Helped BJP Win West Bengal Election Results 2024

Jamaat Rise in Bangladesh Helped BJP Win: बंगाल चुनाव में भाजपा की जीत का बड़ा कारण बांग्लादेश सीमा पर बढ़ता तनाव और जमात-ए-इस्लामी का असर है. सीमावर्ती मतदाताओं ने घुसपैठ और सुरक्षा के मुद्दे पर भाजपा को ऐतिहासिक जनादेश दिया है. पढ़ें पूरी विश्लेषण रिपोर्ट.

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Jamaat Rise in Bangladesh Helped BJP Win: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के नतीजों से राजनीतिक पंडित हैरान हैं. आखिर भारत-बांग्लादेश सीमा से सटे गांवों में कैसे भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को प्रचंड बहुमत मिली? इन इलाकों में भाजपा की प्रचंड जीत के पीछे केवल ‘मोदी लहर’ नहीं, बल्कि सीमा पार बांग्लादेश में जमात-ए-इस्लामी जैसी कट्टरपंथी ताकतों का बढ़ता प्रभाव और घुसपैठ का गहरा डर सबसे बड़ा कारण रहा. सीमावर्ती मतदाताओं ने इस बार ‘वोट’ को एक सुरक्षा कवच (Fence) की तरह इस्तेमाल किया, ताकि राज्य में एक ऐसी सरकार आये, जो राष्ट्रीय सुरक्षा और सीमा प्रबंधन को प्राथमिकता दे.

सीमा पार का तनाव और बंगाल का ‘ध्रुवीकरण’

बांग्लादेश के सीमावर्ती जिलों में हाल के महीनों में हुई राजनीतिक उथल-पुथल का सीधा असर बंगाल के मतदाताओं पर पड़ा है. सीमा पर बसे गांवों के लोगों का मानना है कि बांग्लादेश में कट्टरपंथियों के मजबूत होने से सीमा पार से अवैध घुसपैठ और तस्करी का खतरा बढ़ गया है. मतदाताओं के एक बड़े वर्ग का मानना है कि केवल भाजपा ही केंद्र के साथ तालमेल बिठाकर सीमा सुरक्षा बल (BSF) को मजबूत कर सकती है और घुसपैठ पर लगाम लगा सकती है.

घुसपैठ रोकने के लिे अभेद्य दीवार का जरिया बना ‘वोट’

रिपोर्ट्स के अनुसार, जिन इलाकों में कभी तृणमूल कांग्रेस (TMC) का एकतरफा दबदबा था, वहां इस बार समीकरण पूरी तरह बदल गये. स्थानीय लोगों में इस बात को लेकर गुस्सा और डर था कि अनियंत्रित घुसपैठ से इलाके की जनसांख्यिकी (Demography) बदल रही है. भाजपा के एनआरसी और सीएए जैसे मुद्दों ने यहां निर्णायक भूमिका निभायी.

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जमात का असर और और सिंडिकेट राज पर चोट

बांग्लादेश में कट्टरपंथी ताकतों के उभरने की खबरों ने सीमावर्ती हिंदू आबादी के साथ-साथ कई शांतिप्रिय स्थानीय मुस्लिमों को भी सुरक्षा के नाम पर एकजुट किया. सीमावर्ती इलाकों में मवेशी तस्करी और अवैध कारोबार को मिलने वाले कथित राजनीतिक संरक्षण के खिलाफ जनता ने भाजपा को चुनकर अपना विरोध दर्ज कराया.

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Jamaat Rise in Bangladesh Helped BJP Win: राष्ट्रीय सुरक्षा बना चुनावी मुद्दा

अमित शाह और शुभेंदु अधिकारी ने अपने प्रचार अभियान में लगातार यह संदेश दिया कि ‘सुरक्षित बंगाल ही सुरक्षित भारत की गारंटी है.’ चुनाव विश्लेषकों का मानना है कि सीमावर्ती जिलों (जैसे उत्तर और दक्षिण 24 परगना, नदिया, मालदा) में भाजपा को मिली बढ़त यह दिखाती है कि लोगों ने स्थानीय मुद्दों से ऊपर उठकर ‘राष्ट्रीय सुरक्षा’ और ‘सांस्कृतिक पहचान’ को वोट दिया है.

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शुभेंदु अधिकारी की सरकार से सीमा पर बसे लोगों की उम्मीदें

अब जब बंगाल में भाजपा की सरकार बन चुकी है, तो सीमावर्ती जिलों की उम्मीदें मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी पर टिकी हैं. लोगों को उम्मीद है कि अब सीमाओं पर ‘पॉलिटिकल फेंसिंग’ के साथ-साथ सुरक्षा की ऐसी दीवार खड़ी होगी, जिसे भेदना घुसपैठियों के लिए नामुमकिन होगा.

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मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 30 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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