बंगाल में भाजपा की जीत से ढाका में हड़कंप, बांग्लादेशी मीडिया ने बताया ‘बड़ा संकट’, सांसद को डराने लगा शरणार्थी संकट

Published by :Mithilesh Jha
Published at :05 May 2026 5:52 PM (IST)
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Bangladesh Media on Bengal Election 2026 Results

Bangladesh Media on Bengal Election 2026 Results: पश्चिम बंगाल चुनाव 2026 में भाजपा की जीत पर बांग्लादेशी मीडिया और वहां के सांसदों ने तीखी प्रतिक्रिया दी है. ढाका में अवैध घुसपैठियों की वापसी और शरणार्थी संकट का डर सता रहा है. पढ़ें स्पेशल रिपोर्ट.

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Bangladesh Media on Bengal Election 2026 Results: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की ऐतिहासिक जीत की गूंज भारत ही नहीं, बांग्लादेश में भी सुनाई दे रही है. ढाका के सियासी गलियारों और वहां के मीडिया जगत में भाजपा के सत्ता में आने को लेकर गहरी बेचैनी और सस्पेंस का माहौल है.

ममता के शासन का अंत भू-राजनीतिक झटका : बांग्लादेशी मीडिया

बांग्लादेशी मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, ममता बनर्जी के 15 साल के शासन का अंत और भाजपा का उदय ढाका के लिए किसी बड़े ‘भू-राजनीतिक झटके’ से कम नहीं है. वहां के अखबारों और नेताओं को डर है कि भाजपा सरकार अब सीमा पार से होने वाली घुसपैठ और शरणार्थियों के मुद्दे पर ‘आर-पार’ के मूड में होगी, जिससे बांग्लादेश में आर्थिक और मानवीय संकट गहरा सकता है.

कांगलू की होगी वापसी? ढाका में शरणार्थी संकट का डर

बांग्लादेश के राजनीतिक गलियारों में भाजपा की जीत को चिंता का विषय बताया जा रहा है. बांग्लादेशी सांसद अख्तर हुसैन ने हाल ही में वहां की संसद में चिंता जतायी थी कि यदि भाजपा बंगाल में सरकार बनाती है, तो वे कथित तौर पर कांगलू (अवैध घुसपैठियों) को वापस बांग्लादेश भेज देंगे.

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संकट की आशंका, बॉर्डर पर शरण

हुसैन ने चेतावनी दी कि भारत के इस सख्त कदम से बांग्लादेश में अचानक शरणार्थियों की बाढ़ आ सकती है, जिससे देश पर भारी आर्थिक और सामाजिक दबाव पड़ेगा. ढाका के मीडिया आउटलेट्स जैसे ‘प्रोथोम आलो’ और ‘द डेली स्टार’ ने लिखा है कि भाजपा की जीत से सीमावर्ती क्षेत्रों की सुरक्षा-व्यवस्था पूरी तरह बदलने वाली है.

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NRC और तीस्ता जल विवाद पर बढ़ेगा दबाव

बांग्लादेशी विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा की जीत का सीधा असर द्विपक्षीय संबंधों पर पड़ेगा. बांग्लादेशी मीडिया का कहना है कि अब असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा जैसी ‘हार्डलाइन’ नीतियां बंगाल में भी लागू होंगी. इससे अवैध प्रवास का मुद्दा फिर से गर्मायेगा.

तीस्ता जल समझौता और वोट बैंक की राजनीति

बंगाल में भाजपा की सरकार आने से तीस्ता जल बंटवारे जैसे संवेदनशील मुद्दे पर भारत का रुख और कड़ा हो सकता है, जिससे बांग्लादेश की कृषि प्रभावित होने का डर है. बांग्लादेशी आउटलेट्स ने यह भी विश्लेषण किया है कि इस बार मुस्लिम वोटों के बिखराव ने भाजपा को जीत दिलाने में अहम भूमिका निभायी, जो टीएमसी के लिए ‘डूम्सडे’(कयामत का दिन) साबित हुआ.

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पूरी दुनिया की नजर, ढाका हुआ अलर्ट

सोशल मीडिया पर बांग्लादेशी यूजर्स के बीच भी डर और प्रतिक्रियाओं का दौर जारी है. कई लोगों का मानना है कि ममता बनर्जी के दौर में सीमाओं पर जो ‘सॉफ्ट पॉलिटिक्स’ चलती थी, उसका अब अंत हो गया है. भाजपा का सुशासन और ‘राष्ट्रीय सुरक्षा’ का एजेंडा बांग्लादेश के साथ लगती अंतरराष्ट्रीय सीमा पर नयी चुनौतियों को जन्म देगा. ढाका के विशेषज्ञों का कहना है कि उन्हें अब भारत के साथ अपने कूटनीतिक संबंधों को नये सिरे से परिभाषित करने की जरूरत है.

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मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 30 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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