हुमायूं कबीर फिर मुश्किल में, मोहम्मदियन क्लब के अधिकारियों ने भेजा कानूनी नोटिस
हुमायूं कबीर
मोहम्मदन क्लब में वित्तीय समस्याओं को लेकर उथल-पुथल मची है। क्लब के अध्यक्ष हुमायूं कबीर द्वारा दिए गए 50 लाख रुपये के तीन चेक बाउंस होने के बाद क्लब प्रबंधन ने उन्हें कानूनी नोटिस भेजा है।
कोलकाता : मोहम्मदन क्लब पिछले कुछ दिनों से उथल-पुथल में है. इसकी मुख्य वजह क्लब अध्यक्ष हुमायूं कबीर हैं. कुछ महीने पहले उन्होंने क्लब की सभी वित्तीय समस्याओं को हल करने का वादा किया था, लेकिन अब मोहम्मदन क्लब के अधिकारी इस वादे के पूरा न होने से नाराज़ हैं.
तीन दिन पहले बाउंस हुआ था चेक
तीन दिन पहले खबर आई थी कि हुमायूं द्वारा भेजे गए 50 लाख रुपये के तीन चेक (कुल 1.5 करोड़ रुपये) बाउंस हो गए हैं. इसके बाद नौदा के विधायक ने इस मामले पर अपनी राय रखी, लेकिन फिर भी क्लब के अधिकारी इससे असंतुष्ट होकर अब कड़े कदम उठा रहे हैं.
भेजा गया कानूनी नोटिस
हुमायूं कबीर को कानूनी नोटिस भेजा गया है. नोटिस में कहा गया है कि जिस तरह हुमायूं ने अपना वादा नहीं निभाया, उससे क्लब को लगता है कि वह गलत इरादों से क्लब से जुड़ना चाहता था. इसलिए क्लब उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई करेगा. हालांकि, मोहम्मदन ने कहा है कि उसे 15 दिनों के भीतर वादा की गई रकम चुकानी होगी. ऐसा न करने पर उसके खिलाफ दीवानी और आपराधिक मामले दर्ज किए जाएंगे.
यह मोहम्मडन क्लब है, उनकी पार्टी नहीं
क्लब के महासचिव वसीम अकरम ने इस मामले पर कहा - उन्होंने पहले बड़े-बड़े वादे किए, लेकिन असल में कुछ नहीं किया. अब वे फंस गए हैं. यह मोहम्मडन क्लब है, उनकी पार्टी नहीं. हमें कानूनी कार्रवाई करने के लिए मजबूर होना पड़ा. उन्होंने चेक दिया, लेकिन वह बाउंस हो गया. वे बुरे इरादों से आए थे, लेकिन चेक बाउंस होने की वजह से हम कानूनी कार्रवाई कर रहे हैं. अब पुलिस और अदालत को समझ आने दीजिए.
मोहम्मडन क्लब प्रबंधन हुमायूं से नाराज
मोहम्मडन क्लब प्रबंधन हुमायूं से नाराज है. वसीम अकरम के शब्दों में- वह मुर्शिदाबाद में बैठकर बिना पैसे दिए भाषण दे रहा है. वह कह रहा है कि वह हमें क्लब से बाहर निकाल देगा. क्या सब इतना आसान है? यह एक मुस्लिम क्लब है. क्या उसके जिले में राजनीति चल रही है? उसे क्लब में आने दो, फिर बात करेंगे. हमने उसे बार-बार क्लब में बुलाया है, लेकिन वह नहीं आया और मुर्शिदाबाद से बड़ी-बड़ी बातें कर रहा है. अगर वह पैसे नहीं देता, तो उसे जेल जाना पड़ेगा. फिर वह खुद जमानत पर छूट जाएगा.
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15 जून तक जमा करनी थी रकम
तय रकम 15 जून तक जमा करनी थी, लेकिन रकम जमा न होने की वजह से सारी दिक्कतें शुरू हुईं. क्लब ने ग़ज़ल जाफ़र को अस्थायी अध्यक्ष बना दिया है. अब, क्या हुमायूं अगले 15 दिनों में रकम जमा करेंगे या फिर इस सदी पुराने क्लब को लेकर कोई और विवाद खड़ा होगा, यही बंगाल के खेल जगत की निगाहें देख रही हैं.
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लेखक के बारे में
By आशीष झा
डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों का अनुभव. लगातार कुछ अलग और बेहतर करने के साथ हर दिन कुछ न कुछ सीखने की कोशिश. वर्तमान में बंगाल में कार्यरत. बंगाल की सामाजिक-राजनीतिक नब्ज को टटोलने के लिए प्रयासरत. देश-विदेश की घटनाओं और किस्से-कहानियों में विशेष रुचि. डिजिटल मीडिया के नए ट्रेंड्स, टूल्स और नैरेटिव स्टाइल्स को सीखने की चाहत.
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