पश्चिम बंगाल बनेगा देश का ‘सीड हब’, खुलेंगे चार कृषि प्रशिक्षण एवं अनुसंधान केंद्र

Author Ashish Jha
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शिवराज सिंह चौहान और शुभेंदु अधिकारी

पश्चिम बंगाल को पूर्वी भारत का 'सीड हब' बनाने की दिशा में अहम कदम उठाए गए हैं. राज्य में चार नए कृषि प्रशिक्षण और अनुसंधान इकाइयां स्थापित की जाएंगी, जिससे किसानों की आय में वृद्धि की उम्मीद है.

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कोलकाता से अमर शक्ति प्रसाद की रिपोर्ट

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राज्य के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने मंगलवार को आयोजित संवाददाता सम्मेलन में बताया कि केंद्र सरकार ने राज्य को यहां कृषि प्रशिक्षण व अनुसंधान इकाइयां स्थापित करने की मंजूरी दे दी है. उन्होंने बताया कि कि राज्यभर में चार कृषि प्रशिक्षण एवं अनुसंधान इकाइयां स्थापित की जायेंगी. इनमें एक हुगली जिले के चुंचुड़ा में चावल और दूसरी मालदा में आम के लिए होगी. साथ ही इसके लिए 100 करोड़ रुपये का अग्रिम आवंटन भी होगा. श्री अधिकारी ने घोषणा की कि बंगाल के चार जिलों-दार्जिलिंग, अलीपुरदुआर, झाड़ग्राम और पुरुलिया को प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना के तहत शामिल किया गया है.

किसानों की आमदनी बढ़ेगी

इस मौके पर केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि बंगाल को पूर्वी भारत का ‘सीड हब’ बनाया जायेगा- आलू बीज, हाइब्रिड मक्का बीज और अन्य फसलों के बीज उत्पादन के लिए राज्य सरकार के साथ एमओयू साइन किये गये हैं. इसके साथ ही ऑर्किड और बागवानी के लिए प्रोजेक्ट्स स्वीकृत हैं, जिससे विशेष जलवायु वाले इलाकों में फूलों और उच्च मूल्य वाली फसलों की खेती से किसानों की आमदनी बढ़ेगी. उन्होंने कहा कि यह योजना देश के 100 कम प्रदर्शन करने वाले जिलों में बदलाव लाने के उद्देश्य से शुरू की गई एक व्यापक कृषि पहल है.

विशेषज्ञों के सहयोग से बढ़ेगा उत्पादन

राज्य के लिए कृषि रूपरेखा तैयार करने के लिए भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आइसीएआर) और राज्य के विश्वविद्यालयों के विशेषज्ञों के सहयोग से प्रयास किये जा रहे हैं. उन्होंने बताया कि मंगलवार की बैठक में इसकी पहली प्रस्तुति दी गयी. उन्होंने कहा कि इस परियोजना में राज्य की कृषि - जलवायु परिस्थितियों, मिट्टी की प्रकृति और अन्य कारकों को ध्यान में रखते हुए फसलों के चयन और उनकी बेहतर पैदावार के लिए सुझाव दिये जायेंगे. शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि बंगाल को पूरे पूर्वी भारत में बीज विकास का केंद्र बनाने के लिए एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किये गये हैं.

नारी शक्ति को नयी ताकत

उन्होंने बताया कि राज्य की दो प्रमुख फसलों-जूट और आलू-के बीज अभी बाहर से लाए जाते हैं. उन्होंने कहा कि नाबार्ड और बैंकों की सहायता से जल्द ही ग्रामीण बंगाल में किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) के लिए आवेदन को लेकर जागरूकता अभियान शुरू किया जायेगा. उन्होंने कहा कि वर्तमान में राज्य में 12 लाख किसान क्रेडिट कार्ड धारक हैं. दीनदयाल अंत्योदय योजना के तहत पश्चिम बंगाल के महिला स्वयं सहायता समूहों के लिए वित्तीय मजबूती की घोषणा करते हुए शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि इन्हें 245 करोड़ रुपये का बैंक लोन और 50 करोड़ रुपये का कम्युनिटी इन्वेस्टमेंट फंड दिया जा रहा है.

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राइस-मक्का-ऑर्किड वैल्यू चेन

उन्होंने कहा कि बंगाल की ग्रामीण महिलाएं बचत, क्रेडिट और छोटे-मध्यम उद्यमों के जरिये परिवार की अर्थव्यवस्था बदल रही हैं और यह वित्तीय समर्थन उन्हें उत्पादन, प्रोसेसिंग, वैल्यू एडिशन और मार्केटिंग में नया भरोसा देगा. शिवराज सिंह चौहान ने पश्चिम बंगाल के ‘राइस बाउल’ क्षेत्रों में पोषण संवर्धन, वैल्यू चेन विकास और प्रोसेसिंग सुविधाओं के लिए विशेष प्रोजेक्ट को मंजूरी देने की जानकारी भी दी. इन प्रोजेक्ट्स के तहत पोषणयुक्त धान, मक्का बीज उत्पादन, स्टोरेज–प्रोसेसिंग और वैल्यू एडिशन पर काम होगा ताकि किसानों को ज्यादा दाम और स्थिर बाजार मिल सके.

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