त्रिमूर्ति शिव जयंती का साप्ताहिक कार्यक्रम शुरू

Updated at : 20 Feb 2025 6:58 PM (IST)
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त्रिमूर्ति शिव जयंती का साप्ताहिक कार्यक्रम शुरू

प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय के स्थानीय सेवा केंद्र नदिया लोहरदगा में 89वीं त्रिमूर्ति शिव जयंती का साप्ताहिक कार्यक्रम प्रारंभ किया गया

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फोटो कार्यक्रम में शामिल ईश्वरीय विश्वविद्यालय की बहने लोहरदगा. प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय के स्थानीय सेवा केंद्र नदिया लोहरदगा में 89वीं त्रिमूर्ति शिव जयंती का साप्ताहिक कार्यक्रम का प्रारंभ किया गया. जिसमें मुख्य अतिथि के रूप में जिला परिषद सदस्य किस्को संदीप कुमार और संस्था की संचालिका बीके आशा बहन एवं सभी बीके भाई बहनों ने निराकार शिव परमपिता परमात्मा का ध्वजारोहण किया. झंडा के नीचे संकल्प लिया गया कि सदा स्नेह में समाते हुए मनजीत जगजीत बनेंगे, अपनी सूक्ष्म वृत्तियों को भी पवित्र बनाकर वायुमंडल को शक्तिशाली बनायेंगे, हर एक के साथ मधुरता संपन्न व्यवहार करेंगे सम्मानजनक बोल बोलेंगे, साक्षी पन की स्थिति द्वारा हर परिस्थिति में सदा अचल रहेंगे, उसके पश्चात बीके मंजू बहन ने शिव जयंती की खुशखबरी एवं आध्यात्मिक रहस्य बताते हुए कहा कि वर्तमान समय परमपिता परमात्मा शिव इस धरा पर अवतरित होकर नए सतयुगी विश्व की स्थापना पुराने कलयुगी विश्व के परिवर्तन का दिव्य कार्य कर्तव्य कर रहे हैं. शीघ्र ही प्राकृतिक आपदाओं इन परमाणु बम द्वारा पुरानी दुनिया की दुखदाई दुनिया की महामारी विनाश के पश्चात पुनः सतयुगी ने सृष्टि की स्थापना होगी. जहां किसी प्रकार का कलह क्लेश दुःख अंशाति का नाम निशान नहीं होगा. देवी देवताओं की उस पवन दुनिया की स्थापना का कार्य इस कल्याणकारी पुरुषोत्तम संगम युग पर स्वयं निराकार परम पिता परमात्मा ने सरकार मध्य प्रजापिता ब्रह्मा वत्सो के द्वारा करवा रहे हैं. सृष्टि चक्र में यह स्वर्णिम अवसर केवल एक ही बार प्राप्त होता है. इस वास्तविकता की अनुभूति के लिए स्थानीय सेवा केंद्र पर या पीस ऑफ माइंड चैनल पर इसकी जानकारी ले सकते है. वर्तमान समय पर्यावरण आणविक बम अस्त्र शस्त्रों के संग्रह का सूचक और इसका परिणाम जनसंख्या में अतिवृद्धि नैतिक मूल्य में हर चरित्र गिरावट किस स्थिति पर संकट का सूचक दिखाई दे रहा है. इससे एक परमात्मा ही बचा सकते हैं .संदीप कुमार ने सभी माताओं बहनों को संबोधित करते हुए कहा कि वर्तमान समय शांति की बहुत जरूरी है. योग तपस्या के साथ वायुमंडल को शुद्ध स्वच्छ बनाना है और विश्व को शांति आकाश द्वारा सेवा करनी है. वर्तमान समय में महाकुंभ का बेला पावन बेला चल रहा है. वास्तव में कुंभ स्नान ज्ञान स्नान है योग स्नान है जो परमपिता परमात्मा इस कलयुगी के अंत का समय और सतयुग के आदि का समय जो महासंगम युग पुरुषोत्तम संगम युग में परमात्मा मानव तन का आधार लेकर के योग द्वारा आत्माओं को पवन बना रहे हैं. पवन बनाकर पुनः सतयुग की दुनिया में ले जाएंगे. कार्यक्रम को सफल बनाने में तारिणी, उषा, अंजू, जानकी, देवंती, माता मंगलेश्वर भाई सुशील, माता मधु, सावित्री माता अन्य लोगों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभायी.

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