शराब पर लगाम : मॉनीटरिंग के लिए ‘स्टॉप ग्रुप’

Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 07 Apr 2016 6:08 AM

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पटना : राज्य में पूर्ण शराबबंदी को बनाये रखने के लिए पूरी मुस्तैदी और सशक्त तरीके से इसकी सतत मॉनीटरिंग की जा रही है. पुलिस मुख्यालय की भूमिका इसमें बेहद अहम है. इससे जुड़ी तमाम कार्रवाईयों की अपडेट स्थिति जानने के लिए पुलिस महकमे ने एक वाह्ट्स एप ग्रुप बनाया है, जिसका नाम ‘स्टॉप’ रखा […]

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पटना : राज्य में पूर्ण शराबबंदी को बनाये रखने के लिए पूरी मुस्तैदी और सशक्त तरीके से इसकी सतत मॉनीटरिंग की जा रही है. पुलिस मुख्यालय की भूमिका इसमें बेहद अहम है. इससे जुड़ी तमाम कार्रवाईयों की अपडेट स्थिति जानने के लिए पुलिस महकमे ने एक वाह्ट्स एप ग्रुप बनाया है, जिसका नाम ‘स्टॉप’ रखा गया है. इस ग्रुप के एडमिन खुद डीजीपी पीके ठाकुर हैं. ग्रुप में एडीजी, आइजी से लेकर तमाम थाना के प्रभारी तक को जोड़ा गया है. ताकि किसी स्तर पर हुई कार्रवाई का अपडेट तुरंत प्राप्त हो सके.

शराब के खिलाफ जिस थाना क्षेत्र में जो भी छापेमारी, बरामदगी, गिरफ्तारी समेत अन्य जो भी कार्रवाई होती है, उसकी अपडेट स्थिति तुरंत पोस्ट कर दी जाती है. इन कार्रवाईयों की फोटो भी पोस्ट के साथ रहती है.
इस खास किस्म के ग्रुप से राज्य में शराबबंदी के खिलाफ चलाये जा रहे अभियान की मॉनीटरिंग बेहतर तरीके से की जा रही है. अगर कहीं से अ‌वैध शराब की कोई जानकारी भी मिलती है, तो उसे भी इस पर पोस्ट किया जाता है. इसके बाद इस पर कितने देर में संबंधित थाना की तरफ से कार्रवाई का जाती है, इसकी वास्तविक स्थिति भी मालूम हो जाती है. पुलिस महकमा इस तरह का वाह्ट्स एप ग्रुप मीडिया और सामान्य लोगों के लिए भी बनाने की तैयारी में है. इन ग्रुप को भी जल्द ही तैयार कर लिया जायेगा.
इलाज के लिए पहुंचे 593 नशेड़ी
पटना. देशी-विदेशी शराब बंद होने के बाद अस्पतालों में शराब की लत छुड़ाने के लिए लोगों के आने का सिलसिला थम नहीं रहा. राज्य भर में बने नशा मुक्ति केंद्रों के ओपीडी में बुधवार को 593 लोग पहुंचे, जिनमें से 76 लोगों गंभीर मानते हुए भरती कर लिया गया. दो दिनों में शराब नहीं पीने से बीमार 749 मरीज नशा मुक्ति केंद्रों में आ चुके हैं, जिसमें से 96 शराब की लत से पीड़ित लोगों को भरती कराया जा चुका है और उनका इलाज शुरू कर दिया गया है. शराब की लत वाले 156 मरीज ओपीडी में इलाज के लिए आये थे और इनमें 20 भरती कर लिया गया था. बुधवार को सबसे ज्यादा नालंदा में 10 लोगों को भरती किया गया है.
सीवान में नौ, गया, शिवहर व दरभंगा में छह-छह, पटना में पांच को भरती किया गया है. वहीं, अररिया, गोपालगंज, जहानाबाद, कैमूर,खगड़िया, लखीसराय, मधेपुरा, मधुबनी, मुंगेर, रोसतास सहरसा, शेखपुरा औरसमस्तीपुर में शराब की लत वाले मरीज ओपीडी में तो पहुंचे, लेकिन कोई भरती नहीं हुए हैं.
आर्मी कैंटोनमेंट में अनुमति क्यों : मोदी
पटना : पूर्व उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने कहा है कि विपक्ष के दबाव में राज्य सरकार को पूर्ण शराबबंदी लागू करना पड़ा है. जब जनहित में पूरे राज्य में किसी भी तरह की शराब की बिक्री पर रोक लगा दी गयी है तो फिर आर्मी कैंटोनमेंट में शराब बिक्री की अनुमति देने का क्या औचित्य है.
सरकार यह कैसे सुनिश्चित करेगी कि कैंटोनमेंट के जरिये बिकने वाली शराब बाहर नहीं आयेगी. पहली अप्रैल 2015 से पाउच में देसी शराब की बिक्री पर रोक लगा कर उसकी बोटलिंग के लिए राज्य सरकार ने दर्जनों कंपनियों को अनुमति दी. कंपनियों ने बैंकों व अन्य स्रोतों से भारी भरकम कर्ज लेकर 10 से 12 करोड़ की लागत से बोटलिंग प्लांट लगाए. सरकार की नीति के तहत प्लांट लगाने वालों को कर्ज चुकाने के लिए सरकार को क्षतिपूर्ति देनी चाहिए.
इसके साथ ही हाल ही में बार व रेस्टूरेंट में वर्ष 2016–17 के लिए शराब परोसने का लाइसेंस निर्गत कर सरकार ने शुल्क के तौर पर लाखों रुपये की वसूली की है. जब पूर्ण शराबबंदी लागू कर दी गई है तो सरकार को अविलंब लाइसेंस शुल्क के तौर पर ली गयी राशि को वापस करना चाहिए.
बिहार में चावल उद्योग के बाद सबसे ज्यादा निवेश डिस्टिलरी और बीयर निर्माण के क्षेत्र में हुआ. सरकार के प्रोत्साहन और आश्वासन के बाद अनेक लोगों ने मक्का, चावल व अन्य अनाजों से स्प्रीट व बीयर बनाने की फैक्ट्री लगाई. पूर्ण शराबबंदी के बाद स्प्रीट और बीयर की खपत बिहार में नहीं होगी, ऐसे में उन्हें बाहर निर्यात करना होगा. सरकार की अनुमति से ही डिस्टिलरी और बीयर उद्योग लगे थे जिन्हें सरकार सबसिडी भी दे रही थी. इस उद्योग को बचाने के लिए सरकार को स्प्रीट पर लगने वाले निर्यात शुल्क को सुसंगत बनाने पर अविलम्ब विचार करना चाहिए.
पूर्ण शराबबंदी के बाद देसी शराब की पेट बोटलिंग प्लांट लगाए दर्जनों कम्पनियों और मक्का, चावल तथा अन्य अनाजों से स्प्रीट और बीयर बनाने वाली फैक्ट्रियों के समक्ष संकट उत्पन्न हो गई है. सरकार को देशी शराब की बोटलिंग करने वाली कम्पनियों को जहां क्षतिपूर्ति वहीं अनाजों से बनी स्प्रीट व बीयर की अन्य राज्यों में बिक्री के लिए निर्यात शुल्क में राहत देनी चाहिए.
मोदी शराबबंदी के साथ हैं या नहीं : संजय
पटना. जदयू के मुख्य प्रवक्ता संजय सिंह ने कहा कि भाजपा नेता सुशील मोदी बेचैन आत्मा हो गये हैं. जब बिहार सरकार ने राज्य में आंशिक शराबबंदी की तो हल्ला करने लगे कि पूर्ण शराबबंदी होनी चाहिए. जब नीतीश कुमार ने पूर्ण शराबबंदी कर दी, तो कहने लगे कि शराब व्यवसायियों को मुआवजा दें.
सुशील मोदी तय करें कि वह किसके साथ हैं वह शराब व्यवसायियों के साथ हैं या फिर शराबबंदी के साथ. क्हर रोज सुशील मोदी का बयान अपने ही बयान से पलट जाता है. पहले कहते थे कि शराबबंदी नहीं होगी, फिर कहने लगे पूर्ण शराब बंदी नहीं हो सकती.
जब पूर्ण शराब बंदी हो गयी तो अब कहते हैं कि पूर्ण शराब बंदी से शराब व्यवसायियों के नुकसान का भरपाई करें बिहार सरकार. सुशील मोदी अपने बयान में खुद फंस जाते हैं. उन्होंने कहा कि सुशील मोदी का ये बयान हास्यास्पद है कि आर्मी के कैंटिन में शराब क्यों बेची जायेगी?
आर्मी के कैंटिन में हर आर्मी के जवान का एक कोटा होता है. आर्मी में उस कोटे से ज्यादा शराब किसी भी जवान को नहीं दिया जाता है. जब आर्मी के जवानों को एक लिमिट में शराब मिलेगी तो फिर आम सिविलियन को शराब कैसे मिलेगी? अब राज्य सरकार ने पूर्ण शराब बंदी की है तो पूरी तैयारी के साथ की गयी है. शराब कारोबारियों का क्या होगा इसके लिए सुशील मोदी परेशान ना हों. वे इसलिए परेशान हैं कि भाजपा में ज्यादातर नेता शराब व्यवसाय से जुड़े हैं.
वो सभी के सभी एक पल में बेरोजगार हो गये. जो धंधा सुशील मोदी के संरक्षण में चल रहा था, अब वो व्यवसायी इन पर दबाव बनाने लगे हैं, तो सुशील मोदी सरकार पर दबाव बना रहे हैं कि उन शराब व्यवसायियों को मुआवजा दिया जाये. बिहार सरकार ने पहले ही ये ऐलान कर दिया था कि एक अप्रैल को देसी शराब बंद होगी और उसके बाद विदेशी भी बंद करके पूर्ण शराब बंदी कर दी जायेगी.
ताड़ी के साथ नहीं की जाये छेड़छाड़ : ललन
पटना. रालोसपा के विधयक ललन पासवान ने ताड़ी को नीरा के रूप में बेचने की सरकार की घोषणा का विरोध किया है. उन्होंने कहा है कि मुख्यमंत्री ताड़ी को नीरा के रूप में बेचने की बात कह इस कार्य में लगे लाखों लोगों को बेरोजगार बनाने पर तुले हैं.
अगर ताड़ी के स्थान पर बोटलिंग कर नीरा के रूप में बेचा गया, तो इससे जुड़े लोग आंदोलन करने पर विवश होगें. ताड़ी निकालकर बेचने के धंधे में निहायत गरीब लोग लगे हैं, इससे उनकी रोजी रोटी समाप्त हो जायेगी. ताड़ी का बोटलिंग कर अगर नीरा के रूप में बेचा गया, तो यह पूंजीपतियों के हाथ में चला जायेगा.
ताड़ी उद्योग को किसी भी हालत में पूंजीपतियों के हाथ में जाने से रोकने के लिए इस व्यावसाय से जुड़े लोग हर हाल में कोई न कोई कदम उठायेंगे. उन्होंने मुख्यमंत्री को देशी- विदेशी शराब की बिक्री पर पूरी तरह रोक लगाने के लिए बधई देते हुए आग्रह किया है कि वे ताड़ी उद्योग के साथ कोई छेड़–छाड़ न करें, हां, मिलावटी और नशीली ताड़ी बेचने वालों के खिलाफ कारवाई अवश्य शुरू करें.
वापस या नष्ट होंगी विदेशी शराब की बोतलें
पटना. बीएसबीसीएल के गोदामों में विदेशी शराब की दो करोड़ 70 लाख बोतलें विभिन्न ब्रांडों की पड़ी हुईं हैं. इन बोतलों को वापस ले जाने के लिए बीएसबीसीएल ने संबंधित कंपनियों को पत्र लिखा है. अगर ये बोतलें वापस नहीं हुईं, तो इन्हें नष्ट कर दिया जायेगा.
क्योंकि राज्य में किसी तरह की शराब को पूरी तरह से प्रतिबंधित कर दिया गया है.
5 अप्रैल को उत्पाद विभाग ने की इतनी छापेमारी
छापेमारी- 1159
जेल भेजे गये- 85
अवैध देसी- 7191 लीटर
विदेशी शराब- 4665 ली
स्पिरिट- 380 ली
चूलाई शराब- 930 ली
बीयर- 72 ली
– सबसे बड़ी बरामदगी छपरा के कोहड़ा बाजार से की गयी, जहां 17 हजार लीटर देसी शराब बरामद हुई. वहीं, बिहारशरीफ में मुख्य बाजार से 990 लीटर विदेशी शराब बरामद की गयी. 1 से 5 अप्रैल तक पुलिस ने की इतनी कार्रवाई
छापेमारी- 2479
गिरफ्तार तथा जेल- 133
अवैध देसी बरामद- 11 हजार 328 लीटर
विदेशी बरामद- 4883 लीटर
चूलाई शराब- 739 ली
स्पिरिट- 100 ली
महूआ जब्त- 78 क्विंटल
भाकपा ने पूर्ण शराबबंदी के िनर्णय काे सराहा
पटना : भाकपा की बिहार राज्य परिषद के सचिव सत्यनारायण सिंह ने राज्य में पूर्ण शराबबंदी लागू करने के राज्य मंत्रिमंडल के फैसले का स्वागत करते हुए इस साहसिक पहल के लिए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को बधाई दी है.
उन्होंने कहा है कि चार दिनों के भीतर उभरे जनप्रतिरोध, विशेषकर महिलाओं और बच्चों की सक्रिय भागीदारी से उत्पन्न पूर्ण शराबबंदी के लिए उठी जबरदस्त आवाज के मद्देनजर सरकार को उक्त निर्णय के लिए अनुकूल अवसर प्राप्त हो गया.
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