चारा घोटाला: 38 लाख के गहने लौटाने के आदेश पर झारखंड हाईकोर्ट की रोक, SB सिन्हा के बेटे को नोटिस

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Jharkhand High Court

झारखंड हाईकोर्ट

Jharkhand High Court: झारखंड हाईकोर्ट ने चारा घोटाले के आरोपी स्वर्गीय एसबी सिन्हा के घर से जब्त 38 लाख के जेवरात लौटाने के निचली अदालत के आदेश पर रोक लगा दी है. सीबीआई की याचिका पर हुआ ये फैसला हुआ. पढ़ें, अदालत में सीबीआई के अधिवक्ता ने क्या दलील दी और क्या है पूरा मामला.

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रांची से राणा प्रताप की रिपोर्ट

Jharkhand High Court, रांची : झारखंड हाईकोर्ट के जस्टिस संजय कुमार द्विवेदी की अदालत ने चारा घोटाले से जुड़े एक बेहद अहम मामले पर सुनवाई की. अदालत ने चारा घोटाले के आरोपी दिवंगत एसबी सिन्हा के घर से जब्त किए गए 38 लाख रुपये मूल्य के सोने-चांदी जेवरात को उनके परिजनों को वापस लौटाने संबंधी निचली अदालत के आदेश को चुनौती देने वाली सीबीआई (CBI) की याचिका पर सुनवाई की. मामले की गंभीरता को देखते हुए हाईकोर्ट ने सीबीआई का पक्ष सुनने के बाद निचली अदालत के उस आदेश पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है, जिसमें जेवरात को छोड़ने की बात कही गई थी. इसके साथ ही माननीय अदालत ने इस मामले में प्रतिवादी और स्वर्गीय एसबी सिन्हा के बेटे रवि सिन्हा समेत अन्य संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है.

2018 में मिल चुकी है सजा

झारखंड हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान प्रार्थी सीबीआई की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता दीपक भारती ने कड़ा पक्ष रखा. उन्होंने अदालत को पूरे घटनाक्रम की जानकारी देते हुए बताया कि प्रतिवादी रवि सिन्हा चारा घोटाले के मुख्य आरोपियों में से एक रहे स्वर्गीय एसबी सिन्हा के पुत्र हैं. रवि सिन्हा को चारा घोटाले के आरसी-68/96 मामले में वर्ष 2018 में ही सीबीआई की विशेष अदालत द्वारा सजा सुनाई जा चुकी है, जिसके खिलाफ उनकी अपील फिलहाल उच्च न्यायालय में लंबित है. अधिवक्ता ने बताया कि इसी मामले के अनुसंधान के दौरान 13 मई और 14 मई 1999 को एसबी सिन्हा के ठिकानों पर की गई छापेमारी में सीबीआई ने 38 लाख रुपये के बहुमूल्य गहने जब्त किए थे. मामले के मुख्य आरोपी एसबी सिन्हा का निधन वर्ष 1999 में और उनकी पत्नी रमा सिन्हा का निधन वर्ष 2011 में हो चुका है.

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मां ने जीवनभर नहीं किया दावा

सीबीआई के अधिवक्ता ने कोर्ट को एक बेहद महत्वपूर्ण कानूनी पहलू से अवगत कराते हुए कहा कि स्वर्गीय एसबी सिन्हा की पत्नी रमा सिन्हा ने अपने पूरे जीवनकाल में इन जब्त जेवरात पर कभी अपना हक नहीं जताया और न ही इसे अपना ‘स्त्रीधन’ बताकर इसकी वापसी का कोई दावा पेश किया. लेकिन उनके निधन के लंबे समय बाद, वर्ष 2024 में उनके बेटे रवि सिन्हा ने सीबीआई की विशेष अदालत में एक याचिका दायर कर दी. रवि सिन्हा ने दावा किया कि जब्त किए गए गहने उनकी मां के ‘स्त्रीधन’ थे, इसलिए इन्हें परिवार को वापस सौंप दिया जाना चाहिए.

निचली अदालत ने दे दिया था गहने छोड़ने का आदेश

सीबीआई ने निचली अदालत के फैसले पर सवाल उठाते हुए हाईकोर्ट को बताया कि रवि सिन्हा ने विशेष अदालत में अपने इस बड़े दावे के समर्थन में कोई भी ठोस कागजात, रसीद या वैध दस्तावेज पेश नहीं किया था. इसके बावजूद, निचली अदालत ने उनके आवेदन को स्वीकार करते हुए जब्त जेवरात को मुक्त करने का आदेश जारी कर दिया. सीबीआई ने इसी आदेश को मनमाना और त्रुटिपूर्ण बताते हुए हाईकोर्ट में क्रिमिनल रिट याचिका दायर कर चुनौती दी थी, जिस पर संज्ञान लेते हुए जस्टिस संजय कुमार द्विवेदी की अदालत ने निचली अदालत के आदेश पर रोक लगा दी है और मामले की अगली जांच शुरू कर दी है.

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समीर उरांव

लेखक के बारे में

By समीर उरांव

इंटरनेशनल स्कूल ऑफ बिजनेस एंड मीडिया से बीबीए मीडिया में ग्रेजुएट होने के बाद साल 2019 में भारतीय जनसंचार संस्थान दिल्ली से हिंदी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा किया. 5 साल से अधिक समय से प्रभात खबर में डिजिटल पत्रकार के रूप में कार्यरत हूं. इससे पहले डेली हंट में बतौर प्रूफ रीडर एसोसिएट के रूप में काम किया. झारखंड के सभी समसामयिक मुद्दे खासकर राजनीति, लाइफ स्टाइल, हेल्थ से जुड़े विषयों पर लिखने और पढ़ने में गहरी रुचि है. तीन साल से अधिक समय से झारखंड डेस्क पर काम कर रहा हूं. फिर लंबे समय तक लाइफ स्टाइल के क्षेत्र में भी काम किया हूं. इसके अलावा स्पोर्ट्स में भी गहरी रुचि है.

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