धनबाद के सदर अस्पताल की पैथोलॉजी ‘बीमार’, मरीजों को घंटों करना पड़ रहा इंतजार

Published by : KumarVishwat Sen Updated At : 12 Jun 2026 9:02 PM

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धनबाद का सदर अस्पताल. फाइल फोटो

Dhanbad News: धनबाद सदर अस्पताल के पैथोलॉजी विभाग में कर्मचारियों की कमी से मरीजों को घंटों इंतजार करना पड़ रहा है. ब्लड जांच और रिपोर्ट मिलने में देरी से कई मरीज ओपीडी का समय चूक रहे हैं. मोबाइल पर रिपोर्ट भेजने की सुविधा भी फिलहाल बंद पड़ी है. इससे जुड़ी खबर नीचे पढ़ें.

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धनबाद से विक्की प्रसाद की रिपोर्ट

Dhanbad News: झारखंड की कोयलानगरी धनबाद के सदर अस्पताल का पैथोलॉजी विभाग इन दिनों मरीजों के लिए बड़ी परेशानी का कारण बन गयी है. अस्पताल में रोजाना औसतन 120 से 130 मरीजों का ब्लड सैंपल जांच के लिए लिया जाता है, लेकिन कर्मचारियों की भारी कमी के कारण मरीजों को घंटों इंतजार करना पड़ रहा है. हालात यह हैं कि डॉक्टर द्वारा जांच लिखने के बाद मरीज जब तक पैथोलॉजी पहुंचते हैं, तब तक लंबी कतार लग जाती है.

मरीजों का ओपीडी में इलाज कराना मुश्किल

ब्लड सैंपल देने और रिपोर्ट लेने में इतना समय लग रहा है कि कई मरीजों का ओपीडी समय ही समाप्त हो जा रहा है. ऐसे में मरीजों को अगले दिन फिर अस्पताल आने की मजबूरी झेलनी पड़ रही है. अस्पताल प्रबंधन द्वारा मरीजों के रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर जांच रिपोर्ट भेजने की शुरू की गई सुविधा भी फिलहाल बंद पड़ी है. वजह सिर्फ एक है, पैथोलॉजी विभाग में पर्याप्त मैनपावर का अभाव. वर्तमान में यहां मात्र सात कर्मियों के भरोसे रजिस्ट्रेशन, ब्लड कलेक्शन और रिपोर्ट डिस्पैच जैसे सभी महत्वपूर्ण कार्य चल रहे हैं.

सुबह से लग रही लंबी कतार

अस्पताल की पैथोलॉजी में सुबह खुलते ही मरीजों की लंबी कतार लग जाती है. पहले रजिस्ट्रेशन, फिर ब्लड सैंपल और उसके बाद रिपोर्ट के लिए अलग-अलग इंतजार करना पड़ता है. बुजुर्ग और गंभीर मरीजों को सबसे अधिक परेशानी झेलनी पड़ रही है. कई मरीजों ने बताया कि दो से तीन घंटे लाइन में खड़े रहने के बाद भी उनका काम पूरा नहीं हो पा रहा है.

सात कर्मचारियों के भरोसे चल रहा पूरा विभाग

पैथोलॉजी विभाग में कुल सात कर्मियों की तैनाती है. यही कर्मचारी मरीजों का रजिस्ट्रेशन, ब्लड सैंपल कलेक्शन, लैब जांच और रिपोर्ट डिस्पैच का काम संभाल रहे हैं. मरीजों की संख्या लगातार बढ़ने के बावजूद कर्मियों की संख्या नहीं बढ़ाई गई है. इसका सीधा असर जांच व्यवस्था पर पड़ रहा है.

मोबाइल पर रिपोर्ट भेजने की सुविधा ठप

अस्पताल प्रबंधन ने मरीजों की सुविधा के लिए रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर रिपोर्ट भेजने की व्यवस्था शुरू की थी. इससे मरीजों को अस्पताल आकर रिपोर्ट लेने की जरूरत नहीं पड़ती थी. लेकिन कर्मचारियों की कमी के कारण यह सेवा भी बंद हो गई है. अब मरीजों को रिपोर्ट लेने के लिए फिर अस्पताल आना पड़ रहा है.

ओपीडी का समय खत्म होने पर मिल रही रिपोर्ट

डॉक्टर द्वारा जांच लिखे जाने के बाद मरीज पैथोलॉजी पहुंचते हैं, लेकिन भीड़ और धीमी प्रक्रिया के कारण कई मरीजों का नंबर देर से आता है. इस बीच ओपीडी का समय समाप्त हो जाता है. ऐसे में मरीज उसी दिन डॉक्टर को रिपोर्ट नहीं दिखा पाते और अगले दिन फिर अस्पताल आने को मजबूर होते हैं.

क्यों आ रही है समस्या

  • पैथोलॉजी विभाग में कर्मचारियों की संख्या बेहद कम है.
  • एक ही कर्मी को कई तरह की जिम्मेदारियां निभानी पड़ रही हैं.
  • मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है, लेकिन संसाधन नहीं बढ़े.
  • रिपोर्ट डिस्पैच और डिजिटल सुविधा के लिए अलग स्टाफ नहीं है.
  • ओपीडी और पैथोलॉजी के बीच कार्य समन्वय की कमी है.

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क्या है समाधान

  • पैथोलॉजी विभाग में अतिरिक्त लैब टेक्नीशियन और डाटा ऑपरेटर की नियुक्ति हो.
  • ब्लड कलेक्शन और रिपोर्ट वितरण के लिए अलग-अलग काउंटर बनाए जाएं.
  • मोबाइल पर रिपोर्ट भेजने की सुविधा दोबारा शुरू की जाए.
  • मरीजों की भीड़ को देखते हुए अतिरिक्त शिफ्ट में कर्मियों की तैनाती हो.
  • डिजिटल रजिस्ट्रेशन और टोकन सिस्टम लागू किया जाए.

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KumarVishwat Sen

लेखक के बारे में

By KumarVishwat Sen

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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