ज्यादा रिटर्न का लालच पड़ा भारी : उत्तर प्रदेश के कारोबारी से 40 लाख की ठगी, पश्चिम बंगाल से पकड़ा गया मुख्य आरोपी

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नदिया पुलिस की गिरफ्त में नसीम शेख. फोटो : प्रभात खबर

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उत्तर प्रदेश के बिजनेसमैन को ऑनलाइन ऐप में ज्यादा रिटर्न का झांसा देकर 40 लाख रुपए ठग लिये गये. पुलिस ने पश्चिम बंगाल से मुर्गी-बकरी सप्लायर नसीम शेख को गिरफ्तार किया है. अब उससे पूछताछ कर गिरोह के बारे में पता लगाया जा रहा है.

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कल्याणी से सामु रजक की रिपोर्ट

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अतिरिक्त कमाई का झांसा देकर उत्तर प्रदेश व्यापारी से 40 लाख रुपए की ठगी के आरोप में पश्चिम बंगाल के नदिया जिले के धुबुलिया से नसीम शेख नामक युवक को गिरफ्तार किया है. उसका घर धुबुलिया थाना क्षेत्र के सोनडांगा इलाके में है. गिरफ्तार युवक को कृष्णनगर महकमा अदालत में पेश किया गया. जज ने उसे 7 दिन की पुलिस कस्टडी में भेज दिया.

इस तरह फंस गये बिजनेसमैन के 40 लाख रुपए

पुलिस के मुताबिक, उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ के रहने वाले बिजनेसमैन मोहम्मद अरसलान ने ज्यादा रिटर्न के लालच में आकर एक ऑनलाइन ऐप में कई चरणों में कुल 40 लाख रुपए निवेश किये. कुछ ही दिनों में ऐप बंद हो गया. उसके सारे पैसे फंस गये. ठगे जाने का एहसास होने पर उसने नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्ट पोर्टल (एनसीआरपी) पर लिखित शिकायत दर्ज करायी.

मुर्गी और बकरी सप्लायर के अकाउंट में पहुंचे पैसे

देश भर में साइबर फ्रॉड को रोकने के लिए बने इस पोर्टल पर शिकायत आते ही पुलिस ने स्वत: केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी. नदिया जिले के धुबुलिया थाने की पुलिस को जांच के दौरान पता चला कि ठगी के पैसे का बड़ा हिस्सा सोनडांगा के रहने वाले मुर्गी और बकरी सप्लायर नसीम शेख के बैंक अकाउंट में जमा हुए हैं.

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धुबुलिया पुलिस ने नसीम को किया गिरफ्तार

जांच में यह भी पता चला कि रुपए गंवाने वाले बिजनेसमैन से नसीम का पहले से संबंध रहा है. उसी जानकारी के आधार पर धुबुलिया पुलिस ने रेड मारकर नसीम को गिरफ्तार किया. कोर्ट से नसीम की हिरासत मिलने के बाद अब धुबुलिया पुलिस उससे पूछताछ कर ठगी की तह तक जायेगी और यह पता करने की कोशिश करेगी कि इस डिजिटल फ्रॉड गिरोह में कितने लोग शामिल हैं.

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साइबर फ्रॉड से बचने के लिए क्या करें, क्या न करें?

क्या करें (Do's)क्या न करें (Don'ts)
केवल SEBI या RBI द्वारा पंजीकृत संस्थानों में ही निवेश करें.किसी भी अनधिकृत ऐप पर अज्ञात व्यक्ति के कहने पर पैसा न लगाएं.
किसी भी वित्तीय ऐप को डाउनलोड करने से पहले उसकी प्रामाणिकता जांचें.व्हाट्सएप या टेलीग्राम ग्रुप पर मिलने वाले निवेश लिंक पर भरोसा न करें.
साइबर फ्रॉड होने पर तुरंत 1930 पर कॉल करें या cybercrime.gov.in पर रिपोर्ट दर्ज कराएं.किसी भी अनजान व्यक्ति के साथ अपना OTP, PIN या बैंक विवरण साझा न करें.

क्या कहते हैं साइबर एक्सपर्ट

लगातार जागरूकता अभियानों के बावजूद लोग अधिक लाभ के चक्कर में मोबाइल ऐप के जाल में फंस जाते हैं. किसी भी योजना में बिना पूरी पड़ताल किये पूंजी लगाना वित्तीय रूप से घातक साबित हो सकता है. -राजेश कुमार, साइबर एक्सपर्ट
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