सहरसा में महिषी का बाबा कारू खिरहर धाम, जहां पशुधन के रक्षक देवता के दरबार में लगती है आस्था की हाजिरी

महिषी का बाबा कारू खिरहर धाम
Aaj ka Darshan: सहरसा जिले के महिषी प्रखंड में स्थित बाबा कारू खिरहर स्थान लोकआस्था, श्रद्धा और विश्वास का ऐसा केंद्र है, जहां हर दिन दूर-दूर से श्रद्धालु पहुंचते हैं. मान्यता है कि बाबा कारू खिरहर पशुधन, किसानों और ग्रामीण जीवन के रक्षक देवता हैं. उनके दरबार में सच्चे मन से मांगी गई मुराद जरूर पूरी होती है.
सहरसा से विनय कुमार मिश्र की रिपोर्ट
Aaj ka Darshan: सहरसा. कोसी क्षेत्र की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान से जुड़ा महिषी स्थित बाबा कारू खिरहर धाम आज भी लाखों लोगों की आस्था का केंद्र बना हुआ है. ग्रामीण जीवन और लोक परंपराओं में विशेष स्थान रखने वाले बाबा कारू खिरहर को पशुधन के संरक्षक देवता के रूप में पूजा जाता है. यही कारण है कि बिहार के विभिन्न जिलों के अलावा पड़ोसी राज्यों से भी श्रद्धालु यहां पहुंचकर पूजा-अर्चना करते हैं.
दूध चढ़ाने की परंपरा से जुड़ी है विशेष मान्यता
बाबा कारू खिरहर स्थान की सबसे बड़ी विशेषता यहां की लोकमान्यता है. श्रद्धालु बाबा को दूध अर्पित कर अपने पशुओं की सुरक्षा, परिवार की खुशहाली और समृद्धि की कामना करते हैं. स्थानीय लोगों का कहना है कि बाबा की कृपा से पशुधन स्वस्थ रहता है और किसानों के जीवन में सुख-समृद्धि बनी रहती है.
आरती के समय भक्तिमय हो उठता है पूरा परिसर
मंदिर परिसर में सुबह और शाम होने वाली आरती श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र होती है. घंटों, शंखध्वनि और भक्ति गीतों से पूरा वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा से भर जाता है. यहां पहुंचने वाले भक्तों को एक अलग तरह की शांति और सुकून का अनुभव होता है.
विशेष पर्वों पर उमड़ती है श्रद्धालुओं की भीड़
लोकपर्वों और धार्मिक आयोजनों के दौरान बाबा कारू खिरहर धाम में हजारों श्रद्धालुओं का जमावड़ा लगता है. सुबह से देर रात तक पूजा-पाठ, भजन-कीर्तन और प्रसाद वितरण का सिलसिला चलता रहता है. मन्नत पूरी होने पर श्रद्धालु विशेष पूजा कर बाबा का आभार व्यक्त करते हैं.
आस्था के साथ पर्यटन का भी बन रहा केंद्र
महिषी का यह प्रसिद्ध धाम धार्मिक महत्व के साथ-साथ स्थानीय पर्यटन का भी प्रमुख केंद्र बनता जा रहा है. यहां आने वाले श्रद्धालु न केवल दर्शन करते हैं, बल्कि इस स्थल की लोक संस्कृति और आध्यात्मिक विरासत को भी करीब से महसूस करते हैं.
स्थानीय लोगों का विश्वास है कि बाबा कारू खिरहर के दरबार से कोई भी श्रद्धालु खाली हाथ नहीं लौटता. यही वजह है कि यह धाम आज भी कोसी क्षेत्र की सबसे मजबूत लोकआस्थाओं में से एक माना जाता है.
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By Pratyush Prashant
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