राज्यसभा में उठा कोसी की बाढ़ का मुद्दा, नए बराज और हाई डैम पर केंद्र सरकार ने क्या कहा?

फोटो - सहरसा - फोटो - सांसद प्रो मनोज कुमार झा | Prabhat Khabar Network
Saharsa News: राज्यसभा में कोसी नदी पर बाढ़ और नए बराज निर्माण का मुद्दा उठा. केंद्र सरकार ने कोसी-मेची परियोजना की प्रगति और लागत का विवरण दिया, जो मार्च 2029 तक पूरी होने की उम्मीद है.
Saharsa News : उत्तर बिहार में हर साल आने वाली बाढ़ सिर्फ एक प्राकृतिक आपदा नहीं, बल्कि लाखों लोगों के जीवन का सबसे बड़ा संकट बन चुकी है. खेत डूबते हैं, घर उजड़ते हैं और हजारों परिवारों का जीवन महीनों तक प्रभावित रहता है. इसी गंभीर मुद्दे को राज्यसभा में सांसद प्रो. मनोज कुमार झा ने प्रमुखता से उठाया. उन्होंने केंद्र सरकार से कोसी नदी पर नए बराज, नेपाल में प्रस्तावित हाई डैम, कोसी-मेची लिंक परियोजना और स्थायी बाढ़ प्रबंधन को लेकर कई अहम सवाल पूछे.
केंद्र सरकार ने अपने जवाब में कोसी-मेची अंतर-राज्यीय लिंक परियोजना की प्रगति, बिहार को मिली केंद्रीय सहायता और नेपाल के साथ चल रही परियोजनाओं की वर्तमान स्थिति स्पष्ट की. हालांकि कोसी-गंडक बेसिन प्राधिकरण के गठन को लेकर सरकार ने फिलहाल कोई प्रस्ताव नहीं होने की बात कही.
हर साल बाढ़ का दर्द, संसद तक पहुंची कोसी की आवाज
कोसी क्षेत्र के लोगों के लिए बाढ़ हर साल दोहराई जाने वाली त्रासदी है. सहरसा, सुपौल, मधेपुरा, अररिया और आसपास के जिलों में लाखों लोग मानसून के दौरान बाढ़ और कटाव का सामना करते हैं. इसी पृष्ठभूमि में राज्यसभा सांसद प्रो. मनोज कुमार झा ने सदन में यह मुद्दा उठाते हुए पूछा कि लंबे समय से चर्चा में रहे नए बराज और नेपाल में प्रस्तावित हाई डैम की वर्तमान स्थिति क्या है.
उन्होंने यह भी जानना चाहा कि केंद्र सरकार स्थायी बाढ़ समाधान के लिए क्या कदम उठा रही है.
कोसी-मेची परियोजना पर सरकार ने क्या कहा
जल शक्ति राज्य मंत्री राज भूषण चौधरी ने बताया कि कोसी-मेची अंतर-राज्यीय लिंक परियोजना को प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के तहत शामिल किया गया है.
सरकार के अनुसार परियोजना की शेष लागत 6143.22 करोड़ रुपये है. इसके लिए 3652.56 करोड़ रुपये की केंद्रीय सहायता स्वीकृत की जा चुकी है. परियोजना को मार्च 2029 तक पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है.
सरकार ने यह भी बताया कि पूर्वी कोसी मुख्य नहर के पुनर्निर्माण का कार्य शून्य से 41.30 किलोमीटर तक शुरू हो चुका है और अब तक लगभग 8.5 प्रतिशत वास्तविक प्रगति दर्ज की गई है.
नेपाल में हाई डैम और नए बराज पर क्या है स्थिति
सांसद ने नेपाल में प्रस्तावित सप्तकोसी हाई डैम और नए बराज की स्थिति पर भी सवाल उठाया.
केंद्र सरकार ने बताया कि भारत और नेपाल के बीच सप्तकोसी बहुउद्देशीय परियोजना तथा सुन-कोसी-कमला डायवर्जन परियोजना के लिए विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन तैयार करने की प्रक्रिया जारी है.
सरकार के अनुसार स्थलाकृतिक, जल वैज्ञानिक, भूकंपीय, ड्रिलिंग सहित आवश्यक सर्वेक्षण पूरे किए जा चुके हैं. हालांकि वर्ष 2025-26 के दौरान भारत-नेपाल संयुक्त समिति की कोई बैठक नहीं हुई.
बिहार को कितनी मिली केंद्रीय सहायता
केंद्र सरकार ने जानकारी दी कि पिछले तीन वर्षों में बाढ़ प्रबंधन एवं सीमावर्ती क्षेत्र कार्यक्रम के तहत बिहार को 206.77 करोड़ रुपये की केंद्रीय सहायता उपलब्ध कराई गई है.
यह राशि बाढ़ नियंत्रण और संबंधित परियोजनाओं के लिए जारी की गई है.
कोसी-गंडक बेसिन प्राधिकरण पर सरकार का साफ जवाब
प्रो. मनोज कुमार झा ने कोसी और गंडक नदी क्षेत्र के लिए स्थायी कोसी-गंडक बेसिन प्राधिकरण के गठन की भी मांग उठाई.
सरकार ने अपने उत्तर में स्पष्ट किया कि वर्तमान समय में ऐसा कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है.
इस जवाब के बाद यह स्पष्ट हो गया कि फिलहाल इस दिशा में कोई नई पहल नहीं की जा रही है.
Saharsa News : क्यों महत्वपूर्ण है यह मामला
कोसी क्षेत्र में हर साल आने वाली बाढ़ लाखों लोगों के जीवन, खेती, सड़क संपर्क और स्थानीय अर्थव्यवस्था को प्रभावित करती है. ऐसे में कोसी-मेची परियोजना, नेपाल में प्रस्तावित हाई डैम और नए बराज जैसी योजनाओं को लंबे समय से स्थायी समाधान के रूप में देखा जा रहा है.
राज्यसभा में इस मुद्दे के उठने के बाद उत्तर बिहार के लोगों के बीच एक बार फिर बाढ़ सुरक्षा, सिंचाई सुविधाओं और दीर्घकालिक जल प्रबंधन को लेकर चर्चा तेज हो गई है. अब लोगों की नजर परियोजनाओं की वास्तविक प्रगति और उनके समय पर पूरा होने पर रहेगी.
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