पासपोर्ट सेवा केंद्र के जरिए बनवाएं पासपोर्ट, 1500 रुपए है फीस, इन्हें मिलेगा डिस्काउंट
Published by : Rajneesh Anand Updated At : 15 Jan 2025 5:50 PM
पासपोर्ट सेवा केंद्र
Passport Seva Kendra : पासपोर्ट की बढ़ती डिमांड और आमलोगों को इसकी सहज उपलब्धता के लिए सरकार ने 2010 में पासपोर्ट सेवा केंद्र की शुरुआत की थी. देश में 543 संसदीय क्षेत्र में सेवा केंद्र खोलने की योजना है, फिलहाल टियर 1 और टियर 2 शहरों में ये केंद्र सेवा दे रहे हैं.
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Passport Seva Kendra : पासपोर्ट सेवाओं को आमलोगों की पहुंच में लाने और उसे सुविधाजनक बनाने के लिए सरकार ने देशभर में 543 पासपोर्ट सेवा केंद्र खोलने की योजना बनाई है. यह केंद्र हर संसदीय क्षेत्र में स्थापित किए जाएंगे हैं. इन केंद्रों का उद्देश्य शहरी और ग्रामीण दोनों आबादी को पासपोर्ट सेवा सहजता से उपलब्ध कराना है.इन केंद्रों पर पासपोर्ट आवेदन प्रक्रिया को सुव्यवस्थित करने के तमाम सुविधाएं मुहैया कराई गई हैं, जिनमें बायोमेट्रिक सत्यापन से लेकर तमाम कागजात जमा कराने की सुविधा भी दी गई है.
क्या है पासपोर्ट सेवा केंद्र
पासपोर्ट सेवा केंद्र,भारत सरकार के पासपोर्ट ऑफिस की शाखाएं हैं. देश के टियर 1 और टियर 2 शहरों में ये केंद्र अपनी सेवाएं दे रहे हैं. जिन लोगों को पासपोर्ट की आवश्यकता होती है वे अविलंब अपने शहर में स्थित इन पासपोर्ट सेवा केंद्र पर जाकर पासपोर्ट के लिए आवेदन कर सकते हैं. चूंकि इन केंद्रों के जरिए ऑनलाइन आवेदन होता है, इसलिए आम आदमी को बहुत सुविधा होती है और उन्हें किसी भी तरह के दलालों के चक्कर में नहीं पड़ना पड़ता है और उनका पासपोर्ट बन जाता है. साथ ही एक व्यक्ति की सूचनाएं भी गुप्त रहती हैं.
कब हुई थी पासपोर्ट सेवा केंद्र की शुरुआत

पासपोर्ट सेवा केंद्र की शुरुआत 2010 में यूपीए सरकार के वक्त हुई थी. यह विदेश मंत्रालय की योजना है और इसका उद्देश्य शिक्षा, पर्यटन, बिजनेस, चिकित्सा निजी भ्रमण जिसमें परिजनों और दोस्तों से मिलना भी शामिल है, के लिए विदेश आने-जाने वाले लोगों को सहजता से पासपोर्ट उपलब्ध कराना है. आर्थिक उदारीकरण की नीतियों के बाद से पासपोर्ट की डिमांड काफी बढ़ गई है, क्योंकि लोग विदेश आते-जाते रहते हैं. 2010 से पहले पासपोर्ट बनवाने की प्रक्रिया बहुत जटिल थी और पासपोर्ट ऑफिस की सीमित संख्या की वजह से इसमें समय भी काफी खर्च होता था. लेकिन पासपोर्ट सेवा केंद्र की स्थापना के बाद प्रक्रिया सरल और पारदर्शी हो गई है. इस योजना के तहत पासपोर्ट से संबंधित अधिकारियों, राज्य पुलिस और डाक सेवा को भी एक नेटवर्क के तहत जोड़ दिया गया है, जिसकी वजह से प्रक्रिया बहुत सहज हो गई है.
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कैसे काम करता है पासपोर्ट सेवा केंद्र?
- एक व्यक्ति का पासपोर्ट बनवाने में पासपोर्ट सेवा केंद्र अहम भूमिका निभाता है. वह निम्नलिखित कार्यों को करता है-
- पासपोर्ट सेवा केंद्र उन आवेदनों को स्वीकार करता है, जिसमें पासपोर्ट बनाने की गुजारिश की जाती है.
- पासपोर्ट सेवा केंद्र आवेदनों का वेरिफिकेशन करता है.
- वेरिफिकेशन के बाद योग्य आवेदकों को पासपोर्ट जारी किया जाता है. यह केंद्र पासपोर्ट दोबारा भी जारी करता है.
- कागजात के वेरिफिकेशन के बाद उसे पुलिस वेरिफिकेशन के लिए भेजा जाता है.
- पुलिस वेरिफिकेशन के बाद पासपोर्ट प्रिंट करना और उसकी डिलीवरी करना
कैसे किया जाता है पासपोर्ट अप्लाई, कितनी है फीस
पासपोर्ट बनवाने के लिए उसे ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों तरीके से आवेदन किया जा सकता है. पासपोर्ट को तत्काल और सामान्य दोनों ही कैटेगरी में अप्लाई किया जा सकता है.सीएससी सेंटर के जरिए भी पासपोर्ट के लिए आवेदन किया जाता है. उसके बाद एक निर्धारित तिथि को आवेदक को सेवा केंद्र बुलाकर उनसे बातचीत की जाती है और कागजात का वेरिफिकेशन किया जाता है. 1500 रुपए का शुल्क लिया जाता है, 72 पेज के पासपोर्ट के लिए 2000 रुपए का शुल्क लिया जाता है. वरिष्ठ नागरिकों को शुल्क में 150 रुपए की छूट दी जाती है.
क्या है पासपोर्ट सेवा केंद्र का उद्देश्य
सरकार ने आवश्यक सेवाओं को सबके लिए सहज उपलब्ध बनाने के लिए इस योजना की शुरुआत की है. साथ ही यह कोशिश भी है कि इन योजनाओं का लाभ लेने में कम से कम समय खर्च हो. यही वजह है कि ऑनलाइन अपॉइंटमेंट बुक करने की सुविधा दी गई है. इस सुविधा की वजह से आवेदक आसानी से अपने समय पर कार्यालय पहुंच कर अपनी जरूरत बता सकता है और दस्तावेजों का वेरिफिकेश भी करा सकता है. सरकार यह प्रयास कर रही है कि देश के प्रत्येक व्यक्ति को पासपोर्ट सुविधाओं तक आसान पहुंच मिले. गांव के लोगों को बार–बार पासपोर्ट के लिए शहर तक आने की परेशानी ना उठानी पड़े. यह विदेश मंत्रालय की ई–गवर्नेंस की दिशा में आवश्यक पहल है.
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पासपोर्ट सेवा केंद्र किसे कहते हैं?
पासपोर्ट ऑफिस के ब्रांच या शाखाओं को पासपोर्ट सेवा केंद्र कहा जाता है.
पासपोर्ट सेवा केंद्र जब आवेदक को बुलाता है तो उससे क्या पूछा जाता है?
पासपोर्ट सेवा केंद्र जब आवेदक को बुलाता है तो उससे कुछ जरूरी सवाल पूछे जाते हैं, मसलन वे विदेश क्यों जा रहे हैं और उनके दस्तावेजों का वेरिफिकेशन होता है.
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By Rajneesh Anand
रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है.पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों का अनुभव रखती हैं. झारखंड की राजधानी रांची में रहने वाली रजनीश ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की और वर्ष 2000-01 में पत्रकारिता की शुरुआत की. इन्होंने पहली नौकरी झारखंड जागरण दैनिक अखबार में की. उसके बाद इन्होंने प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस तथा दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य संस्करणों में काम करने के बाद वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. रजनीश आनंद की पहचान तथ्यपरक रिपोर्टिंग, गहन शोध और विश्लेषणात्मक लेखन के लिए है. उनकी रुचि राजनीति, सामाजिक सरोकारों, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों में रही है। उन्होंने हमेशा उन मुद्दों को प्राथमिकता दी है जो समाज के हाशिये पर खड़े लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की चर्चा में अपेक्षाकृत कम स्थान पाते हैं. वे कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर विस्तृत अध्ययन और रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान उन्होंने महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर कार्य किया. इसके अतिरिक्त सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत उन्होंने बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की. आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है. हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में भविष्य की चुनौतियों, रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं. उनका मानना है कि ऊर्जा परिवर्तन की प्रक्रिया तभी सफल होगी जब उसमें प्रभावित समुदायों की भागीदारी और हितों को केंद्र में रखा जाए.पत्रकारिता उनके लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का माध्यम है. जमीनी रिपोर्टिंग, तथ्यों की पड़ताल और जनसरोकारों को केंद्र में रखकर लिखना उनकी कार्यशैली की विशेषता रही है. इसके अतिरिक्त रजनीश आनंद कहानियां और कविताएं लिखने का शौक भी रखती है.
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