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कौन हैं अन्नामलाई जिनके बीजेपी छोड़ने पर मचा हड़कंप? तमिलनाडु की राजनीति में आ सकता है नया मोड़

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K Annamalai resigns from BJP

के अन्नामलाई

K Annamalai : बीजेपी से इस्तीफा देने के बाद अन्नामलाई ने कहा कि मेरी राय अलग थी. मैं 18 महीनों से बीजेपी नेताओं को यह बता रहा था. मैंने 4 दिसंबर 2025 को पार्टी को बताया कि मैं इस्तीफा देने जा रहा हूं, मैंने यह फैसला काफी सोच-समझकर लिया था. पार्टी ने मुझसे चुनाव खत्म होने तक इंतजार करने को कहा और फिर जाने को कहा. सच्चे कैडर के तौर पर मैंने आखिर तक अपना काम पूरा किया.

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K Annamalai : के अन्नामलाई तमिलनाडु में बीजेपी के ऐसे नेता थे, जिन्होंने प्रदेश में बीजेपी की अलग पहचान बनाने की कोशिश की और उसकी छवि सहयोगी पार्टी से बदलकर एक स्वतंत्र छवि वाली पार्टी के रूप स्थापित की. उन्होंने अपने कार्यों से तमिलनाडु में बीजेपी की पहचान को मजबूत बनाया और उसका वोट शेयर बढ़ाया, लेकिन जिस अन्नामलाई को तमिलनाडु में बीजेपी के भविष्य के रूप में देखा जा रहा था, वह पार्टी से अलग हो गए हैं और अपनी अलग पार्टी बनाने का ऐलान कर दिया है, आइए समझते हैं कि क्या है इसकी वजह और कौन हैं अन्नामलाई और कैसा रहा है उनका सफर-

कौन हैं के अन्नामलाई?

तमिलनाडु की राजनीति में पिछले कुछ वर्षों में के अन्नामलाई का नाम काफी तेजी से चर्चित हुआ है. इन्होंने अपने बूते अपनी पहचान बनाई. पूर्व आईपीएस अधिकारी के अन्नामलाई का जन्म तमिलनाडु के करूर जिले में हुआ था. इन्होंने इंजीनियरिंग की पढ़ाई के बाद एमबीए किया और फिर 2011 में यूपीएससी की परीक्षा पास की. वे कर्नाटक कैडर के आईपीएस थे. उन्होंने उडुपी और चिकमंगलूर जैसे जिलों में पुलिस अधीक्षक के रूप में काम किया. उनकी छवि एक ईमानदार पुलिस अधिकारी की थी, जिन्हें सिंघम उपनाम भी दिया गया था. 2011 से 2019 तक उन्होंने पुलिस सेवा में काम किया और फिर 2019 में इस्तीफा देकर राजनीति में आ गए. महज 42 साल के अन्नामलाई राजनीति के क्षेत्र में भी कुछ अलग करना चाहते हैं. उन्होंने दो बार चुनाव लड़ा, लेकिन एक बार भी उन्हें विजय नहीं मिली. वे एक बार विधानसभा का चुनाव लड़े थे और दूसरी बार लोकसभा का.

बीजेपी के साथ राजनीतिक सफर

Annamalai-with-Amit-Shah
गृहमंत्री अमित शाह के साथ अन्नामलाई

आईपीएस की नौकरी छोड़ने के बाद अगस्त 2020 में अन्नामलाई ने बीजेपी ज्वाइन कर लिया. उस वक्त उन्हें तमिलनाडु बीजेपी का उपाध्यक्ष बनाया गया था, लेकिन कुछ समय बाद ही उन्हें तमिलनाडु बीजेपी का प्रदेश अध्यक्ष बना दिया गया. पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष बनने के बाद उन्होंने पार्टी को प्रदेश में आगे बढ़ाने का काफी प्रयास किया. उनके सबसे चर्चित अभियानों में ‘एन मन्न, एन मक्कल’ (मेरी धरती, मेरे लोग) यात्रा है. इस यात्रा के जरिए अन्नामलाई ने पूरे तमिलनाडु का दौरा किया और खुद को बीजेपी को राज्य स्तर पर स्थापित करने का पूरा प्रयास किया. इस काम में उन्हें सफलता भी मिली और वे बीजेपी के लिए भविष्य के नेता बन गए. अन्नामलाई ने लगातार डीएमसे सरकार पर भ्रष्टाचार और प्रशासनिक विफलताओं के आरोप लगाए. उनकी प्रेस कॉन्फ्रेंस और दस्तावेजों के साथ किए गए हमले ने खूब सुर्खियां भी बटोरीं.

रिश्तों में तकरार कैसे शुरू हुई?

जिस अन्नामलाई को बीजेपी के भविष्य के तौर पर देखा जा रहा था. उसी अन्नामलाई के साथ बीजेपी के रिश्ते खराब होने लगे. इसकी सबसे बड़ी वजह बीजेपी और एआईएडीएमके के बीच गठबंधन था. अन्नामलाई डीएमके और एआईएडीएमके के खिलाफ राजनीति करना चाहते हैं, जबकि बीजेपी उनका साथ चाह रही थी. अन्नामलाई यह चाहते थे कि इन दोनों पार्टियों से अलग विकल्प के रूप में बीजेपी उभरे, ताकि उसे जनता का पूरा समर्थन मिले. लेकिन बीजेपी नेतृत्व ने 2026 विधानसभा चुनाव से पहले AIADMK के साथ गठबंधन कर लिया. यह गठबंधन अन्नामलाई को बिलकुल पसंद नहीं आया. इसी बीच उन्हें तमिलनाडु बीजेपी अध्यक्ष पद से हटाकर नैनार नागेंद्रन को यह जिम्मेदारी सौंप दी गई. कई रिपोर्टों में यह दावा किया गया कि इन वजहों से अन्नामलाई पार्टी में खुद को उपेक्षित महसूस कर रहे थे.

अन्नामलाई ने क्यों दिया इस्तीफा?

अन्नामलाई ने पार्टी छोड़ने के बाद यह बयान दिया है कि वे अपनी पहचान से दूर हो रहे थे. उन्होंने कहा कि मुझे समझ नहीं आ रहा था कि मैं एक तमिलियिन हूं या फिर बीजेपी का सदस्य. वे यह बिलकुल नहीं चाहते थे कि बीजेपी द्रविड़ पहचान वाली पार्टियों से समझौता कर लें. वे पार्टी की स्वतंत्र पहचान चाहते थे, जब उन्हें ऐसा प्रतीत हुआ कि पार्टी उनकी राय को दरकिनार कर रही है तो उन्होंने पार्टी छोड़ दी.अन्नामलाई ने कहा है कि वे अपना रास्ता खुद तय करना चाहते हैं. उन्होंने एक नए राजनीतिक आंदोलन की घोषणा भी की है, जो कथित तौर पर व्यक्तिपूजा और वंशवादी राजनीति के खिलाफ होगा. उनकी पार्टी अगला विधानसभा चुनाव लड़ेगी, जिसकी तैयारी शुरू कर दी गई है.

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रजनीश आनंद

लेखक के बारे में

By रजनीश आनंद

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हैं और पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों से अधिक का अनुभव रखती हैं.फिलहाल वे प्रभात खबर के ओरिजिनल, नेशनल, इंटरनेशनल और खेल कैटेगरी के लिए राइटिंग का काम करती हैं. उनकी पहचान फैक्ट बेस्ट रिपोर्टिंग, रिसर्च बेस्ड स्टोरी और एक्सप्लेनर लेखन के लिए है.

राजनीति, सामाजिक सरोकार, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों पर उनकी विशेष रुचि रही है. वैसे मुद्दे जो समाज के हाशिये पर मौजूद समुदायों और आम लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की बहस में अपेक्षाकृत कम जगह पाते हैं, ऐसे विषयों पर भी लेखन में रुचि रखती हैं.

रजनीश आनंद कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर अध्ययन एवं रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर काम किया. इसके अलावा सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की है.

आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है.हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों से जुड़ी चुनौतियों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण सवाल उठाए हैं.

रजनीश आनंद झारखंड की राजधानी रांची में रहती हैं और इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक हैं. उन्होंने वर्ष 2000 में पत्रकारिता की शुरुआत झारखंड जागरण दैनिक से की. इसके बाद प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस और दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और स्वतंत्र लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य प्रकाशनों में काम करने के साथ-साथ वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं.

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