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इलेक्शन कमीशन पर लीगल ग्रे जोन बनाने, डिजिटल फ्रॉड और राज्य-प्रायोजित उत्पीड़न के माकपा ने लगाये आरोप

Updated at : 10 Mar 2026 8:25 AM (IST)
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SIR Bengal CPM to ECI

बंगाल के दौरे पर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार.

SIR Bengal: पश्चिम बंगाल आते ही इलेक्शन कमीशन का काले झंडे से स्वागत करने वाली मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) ने अब चुनाव आयोग पर लीगल ग्रे जोन बनाने, डिजिटल फ्रॉड और राज्य-प्रायोजित उत्पीड़न के आरोप लगा दिये हैं. पार्टी ने ये बातें कब और क्यों कहीं, जानने के लिए पढ़ें ये रिपोर्ट.

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SIR Bengal: इलेक्शन कमीशन ऑफ इंडिया पर लीगल ग्रे जोन बनाने, डिजिटल फ्रॉड और स्टेट स्पांसर्ड हरासमेंट (राज्य प्रायोजित उत्पीड़न) के आरोप लगे हैं. ये आरोप लगाये हैं भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) की पश्चिम बंगाल राज्य समिति ने. माकपा के एक प्रतिनिधमंडल ने भारत के मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार को एक पत्र लिखकर पश्चिम बंगाल में 60 लाख मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाये जाने पर गंभीर चिंता जतायी है.

SIR की आड़ में वोटर को नयी और अवैध श्रेणी में डाला

सीपीआई (एम) का आरोप है कि विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) 2026 की आड़ में इन मतदाताओं को ‘अंडर एडजुडिकेशन’ (विचाराधीन) की एक नयी और अवैध श्रेणी में डाल दिया गया है. माकपा ने इसे भारतीय लोकतंत्र पर सीधा हमला करार दिया है.

अंडर एडजुडिकेशन को बताया लीगल ग्रे जोन का निर्माण

माकपा ने कहा है कि कानूनन कोई व्यक्ति या तो ‘मतदाता’ होता है या ‘गैर-मतदाता’. यानी अगर कोई वोटर नहीं है, तो वह वोटर नहीं है. कानून में ‘अंडर एडजुडिकेशन’ (विचाराधीन) जैसी कोई श्रेणी नहीं है. पार्टी का आरोप है कि अल्पसंख्यकों, वंचित समूहों और मतुआ समुदाय के लोगों की आवाज को दबाने के लिए यह अस्पष्ट श्रेणी बनायी गयी है.

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लॉजिकल डिस्क्रिपेंसी के नाम पर काटे जा रहे अल्पसंख्यकों के नाम

माकपा ने आरोप लगाया है कि ‘लॉजिकल डिस्क्रिपेंसी’ (Logical Discrepancy) के नाम पर धार्मिक अल्पसंख्यकों के नाम वोटर लिस्ट से हटाये जा रहे हैं. पार्टी ने इसे एक प्रकार का ‘डिजिटल फ्रॉड’ बताया है. कहा है कि इसमें पुराने सरकारी कर्मचारियों और सत्यापित मतदाताओं के वंशजों के नाम भी शामिल कर दिये गये हैं.

SIR Bengal: अपील के अधिकार में बाधा, फॉर्म-6 का विरोधाभास

माकपा ने कहा है कि प्रशासन नाम काटने का लिखित कारण नहीं दे रहा है. इसकी वजह से लोग कानून के तहत अपील नहीं कर पा रहे हैं. ऑनलाइन सुविधाएं बंद कर दी गयी हैं और गरीब नागरिकों को ऑफलाइन आवेदन के लिए लंबी दूरी तय करने को मजबूर किया जा रहा है. पार्टी ने इसे ‘राज्य-प्रायोजित उत्पीड़न’ करार दिया है.

छोटे अधिकारियों पर एफआईआर काफी नहीं

माकपा ने कहा है कि संस्थागत ईमानदारी की विफलता की उच्चस्तरीय स्वतंत्र जांच करायी जाये. कहा कि केवल छोटे अधिकारियों पर एफआईआर (FIR) करना पर्याप्त नहीं है.

माकपा की चुनाव आयोग से ये हैं मांगें

  • अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित होने से पहले सभी 60 लाख पात्र मतदाताओं के नाम बहाल किये जायें.
  • ‘अंडर एडजुडिकेशन’ (विचाराधीन) की स्थिति को तुरंत समाप्त किया जाये और इसके आधार पर किसी की सरकारी सहायता न रोकी जाये.
  • नाम हटाने का स्पष्ट लिखित कारण और अपील का स्पष्ट रास्ता दिया जाये.
  • जब तक सभी 60 लाख मतदाताओं के नाम बहाल नहीं होते, तब तक चुनाव प्रक्रिया आगे न बढ़ायी जाये. उन्हें अभी वोट देने का अधिकार दिया जाये, उनकी पात्रता की जांच चुनाव के बाद भी जारी रह सकती है.
  • अंतिम वोटर लिस्ट जारी होने के बाद किसी भी प्रशासनिक हेर-फेर को रोकने के लिए चुनाव आयोग सख्त निगरानी रखे.

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Mithilesh Jha

लेखक के बारे में

By Mithilesh Jha

मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 32 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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