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बंगाल वोटर लिस्ट विवाद : सुप्रीम कोर्ट में 'महासुनवाई', नाम कटने के डर से महिला ने दी जान!

Updated at : 09 Mar 2026 10:00 PM (IST)
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West Bengal Voter List SIR Case

बंगाल में एसआईआर के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट में होगी ‘महासुनवाई’.

West Bengal Voter List SIR Case: बंगाल चुनाव 2026 से पहले SIR प्रक्रिया पर कोहराम. सुप्रीम कोर्ट ने स्वीकार की नयी याचिका. 10 मार्च को होगी सुनवाई. उत्तर 24 परगना में वोटर लिस्ट से नाम कटने पर 2 बेटों की मां ने की आत्महत्या. पढ़ें पूरी रिपोर्ट.

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West Bengal Voter List SIR Case: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 से पहले मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) ने राज्य में भयावह स्थिति पैदा कर दी है. एक ओर मामला देश की सबसे बड़ी अदालत (सुप्रीम कोर्ट) में पहुंच चुका है, तो दूसरी तरफ जमीन पर ‘पहचान’ खोने का डर लोगों की जान ले रहा है.

‘विचाराधीन’ नामों पर सुप्रीम कोर्ट में अहम सुनवाई

मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट उन मतदाताओं की नयी याचिका पर सुनवाई के लिए तैयार हो गया है, जिनके नाम एसआईआर प्रक्रिया के दौरान वोटर लिस्ट से हटा दिये गये हैं. चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ ने वरिष्ठ अधिवक्ता मेनका गुरुस्वामी की दलीलों को स्वीकार किया. वकील ने तर्क दिया कि ये वे मतदाता हैं, जिन्होंने पहले वोट दिया था, लेकिन अब उनके दस्तावेज स्वीकार नहीं किये जा रहे हैं.

बादुरिया में वोटर लिस्ट से नाम कटा, तो लगा ली फांसी

इस कानूनी लड़ाई के बीच उत्तर 24 परगना के बादुरिया से एक दिल दहला देने वाली खबर आयी. पश्चिम चांदीपुर गांव की 50 वर्षीय रीना रानी कुंडू ने सोमवार को कथित तौर पर इसलिए आत्महत्या कर ली, क्योंकि एसआईआर के बाद उसका नाम विचाराधीन की सूची में डाल दिया गया था. उसके 2 बेटों शुभदीप और सौमेन के नाम सूची में नहीं थे.

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बेटे काट रहे थे बीडीओ ऑफिस का चक्कर, मां ने लगा ली फांसी

खबर है कि जिस वक्त रीना ने घर में फांसी लगाकर आत्महत्या की, उस वक्त उनके दोनों बेटे बीडीओ ऑफिस में अपनी नागरिकता और पहचान के दस्तावेज लेकर अधिकारियों के चक्कर काट रहे थे. पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है.

SIR में 60 लाख नाम ‘विचाराधीन’

निर्वाचन आयोग ने 28 फरवरी को वोटर लिस्ट जारी की. इसमें 60 लाख से अधिक मतदाताओं को ‘विचाराधीन’ श्रेणी में रखा गया है. आयोग के अनुसार, माता-पिता के नाम का मेल न होना या उम्र में 15 साल से कम/50 साल से अधिक का अंतर होना ‘विसंगति’ माना जा रहा है.

राजनीतिक उबाल और प्रशासनिक चुनौती

मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने पहले ही आरोप लगाया है कि एसआईआर प्रक्रिया का इस्तेमाल लोगों को मताधिकार से वंचित करने के लिए किया जा रहा है. वहीं, सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया है कि कोई भी व्यक्ति इस प्रक्रिया में बाधा नहीं डाल सकता.

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Mithilesh Jha

लेखक के बारे में

By Mithilesh Jha

मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 32 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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