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बंगाल के पुराने वोटर की अपील पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई 10 को, जानें पूरा मामला

Updated at : 09 Mar 2026 6:04 PM (IST)
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SIR West Bengal Supreme Court West Bengal Election 2026

SIR West Bengal: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 से पहले जिन लोगों के नाम वोटर लिस्ट से हटा दिये गये हैं, वैसे लोगों के लिए खुशखबरी है. चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने कहा है कि अगर कोई ऐसा वोटर है, जिसने पहले के चुनावों में वोट किया है और अब उसका नाम मतदाता सूची से काट दिया गया है, तो उसकी याचिका पर सुप्रीम कोर्ट सुनवाई करेगा.

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SIR West Bengal: पश्चिम बंगाल के उन पुराने वोटर की अपील पर सुप्रीम कोर्ट में मंगलवार को सुनवाई होगी, जिनके नाम मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान वोटर लिस्ट से हटा दिये गये. भारत के प्रधान न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ ने सीनियर एडवोकेट मनेका गुरुस्वामी की याचिका पर विचार करते हुए कहा कि वे इस याचिका पर सुनवाई करेंगे. याचिका वोटर लिस्ट से पुराने मतदाताओं के नाम हटाये जाने से संबंधित है.

मेनका गुरुस्वामी की याचिका पर सुनवाई करेगा सुप्रीम कोर्ट

तृणमूल कांग्रेस की ओर से राज्यसभा चुनाव के लिए नामित उम्मीदवार सुप्रीम कोर्ट की वरिष्ठ वकील मेनका गुरुस्वामी ने देश की सबसे बड़ी अदालत में कहा कि ये मतदाता हैं. इन्होंने पहले मतदान किया था. अब उनके दस्तावेज स्वीकार नहीं किये जा रहे हैं. इस पर चीफ जस्टिस ने कहा- हम न्यायिक अधिकारियों के फैसले के खिलाफ अपील को रोक नहीं सकते.

मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट करेगा सुनवाई

सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील ने कहा कि अपील विचार करने लायक है. इस पर पीठ ने कहा कि याचिका पर मंगलवार को सुनवाई होगी. सर्वोच्च अदालत ने 24 फरवरी को एसआईआर प्रक्रिया में 80 लाख दावों और आपत्तियों को निपटाने के लिए पश्चिम बंगाल के 250 जिला जजों के अलावा दीवानी न्यायाधीशों की तैनाती और झारखंड और ओडिशा से न्यायिक अधिकारियों को बुलाने की अनुमति दी थी.

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22 फरवरी को कलकत्ता हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट को लिखी थी चिट्ठी

पीठ ने 22 फरवरी को कलकत्ता हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश सुजॉय पॉल की चिट्ठी पर भी गौर किया, जिसमें कहा गया था कि एसआईआर में तैनात 250 जिला जजों को भी दावों और आपत्तियों को निपटाने में लगभग 80 दिन और लग सकते हैं. पश्चिम बंगाल में एसआईआर की प्रक्रिया पूरी करने की समय सीमा 28 फरवरी तय की गयी थी.

9 फरवरी को सुप्रीम कोर्ट ने दिया था असाधारण फैसला

सुप्रीम कोर्ट ने 9 फरवरी को असाधारण फैसला देते हुए स्पष्ट किया था कि कोई भी व्यक्ति एसआईआर की पूरी प्रक्रिया में बाधा नहीं डाल सकता. साथ ही न्यायालय ने पश्चिम बंगाल के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) को आदेश दिया था कि चुनाव आयोग की ओर से भेजे गये नोटिस को जलाये जाने के आरोपों पर हलफनामा दायर करें.

ऐसे मामले विचाराधीन की श्रेणी में

  • वर्ष 2002 की मतदाता सूची में दर्ज तर्कसंगत विसंगतियों में माता-पिता के नाम का मेल न होना.
  • मतदाता और उसके माता-पिता की उम्र का अंतर 15 साल से कम या 50 साल से अधिक होना.

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Mithilesh Jha

लेखक के बारे में

By Mithilesh Jha

मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 32 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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