Voter List में ‘गड़बड़ी’ का विरोध करने CEO ऑफिस पहुंची मोस्तारी बानो, रातभर धरना पर वामदल

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एसआईआर के दौरान वोटर लिस्ट से लोगों के नाम हटाये जाने के विरोध में वामदलों के प्रदर्शन में शामिल हुईं मोस्तारी बानो. फोटो : प्रभात खबर

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SIR Bengal: इलेक्शन कमीशन ऑफ इंडिया के मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार की पश्चिम बंगाल यात्रा से पहले मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की प्रक्रिया के खिलाफ विरोध तेज हो गया है. बंगाल में वोटर लिस्ट के प्रकाशन के विरोध में ममता बनर्जी के धरना से पहले वामदल आज मुख्य निर्वाचन अधिकारी का घेराव करने जा रहे हैं.

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SIR Bengal Left Front Protest: बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 से पहले मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) मुख्य निर्वाचन अधिकारी पर बुधवार को धरना-प्रदर्शन किया. उनके विरोध प्रदर्शन को मोस्तारी बानो का भी समर्थन मिला. मोस्तारी बानो वही महिला हैं, जिन्होंने सबसे पहले बंगाल में SIR में हो रही कथित गड़बड़ी के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की थी. निर्वाचन आयोग के खिलाफ वामदलों के धरना-प्रदर्शन में पोलित ब्यूरो के सदस्य मोहम्मद सलीम और श्रीदीप भट्टाचार्य भी शामिल हुए.

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निर्वाचन आयोग बन गया है निर्जातन आयोग – मो सलीम

माकपा की ओर से बताया गया कि बुधवार को निर्वाचन आयोग के अधिकारी प्रदर्शन कर रहे लोगों से मिलने नहीं आये. जब तक उनकी मांगों पर सकारात्मक विचार करने का चुनाव आयोग आश्वासन नहीं देता, तब तक वामदलों के नेता और कार्यकर्ता सीईओ कार्यालय के बाहर डटे रहेंगे. इससे पहले माकपा की पश्चिम बंगाल इकाई के स्टेट सेक्रेटरी और पोलित ब्यूरो सदस्य मोहम्मद सलीम ने दावा किया कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की वजह से बड़े पैमाने पर लोगों को उत्पीड़न झेलना पड़ा. उन्होंने दावा किया कि ‘निर्वाचन आयोग’ अब ‘निर्जातन (उत्पीड़न) आयोग’ में बदल गया है. निर्वाचन आयोग ने 28 फरवरी को विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के बाद मतदाता सूची प्रकाशित की थी, जिसमें 63.66 लाख नाम हटाये गये. यह संख्या राज्य के कुल मतदाताओं का 8.3 प्रतिशत है.

बंगाल में 60 लाख से अधिक वोटर विचाराधीन

इसके बाद विधानसभा चुनाव 2026 से पहले पश्चिम बंगाल में मतदाताओं की संख्या घटकर मात्र 7.04 करोड़ रह गयी है. इसके अलावा 60.06 लाख से अधिक मतदाताओं को ‘विचाराधीन’ श्रेणी में रखा गया है, जिनकी आगामी हफ्तों में जांच की जायेगी. सलीम ने पूर्व बर्धमान जिले में माकपा कार्यालय में पत्रकारों को बताया कि एसआईआर के नाम पर एक सुनियोजित साजिश रची गयी है.

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सही मतदाता सूची प्रकाशित करने की मांग

माकपा नेता ने कहा कि वाम मोर्चा के घटक दल बुधवार को कोलकाता में मुख्य निर्वाचन अधिकारी के कार्यालय तक मार्च निकालेंगे और पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले निर्वाचन आयोग से सही मतदाता सूची प्रकाशित करने की मांग करेंगे.

माकपा का दावा – एसआईआर की नहीं थी जरूरत

सलीम ने दावा किया कि स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी संभाल रहे निर्वाचन आयोग ने एसआईआर प्रक्रिया को जटिल बना दिया है. बड़ी संख्या में लोगों को तनावग्रस्त कर दिया है. सलीम ने कहा कि एसआईआर की कोई जरूरत नहीं थी. उन्होंने निर्वाचन आयोग से यह सुनिश्चित करने की मांग की कि किसी भी पात्र मतदाता का नाम मतदाता सूची से नहीं हटाया जाये.

प्रदर्शनकारियों से क्यों नहीं मिला कोई अधिकारी?

होली के त्योहार की वजह से बुधवार को सरकारी छुट्टी थी. इसलिए मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ पश्चिम बंगाल) के कार्यालय में भी छुट्टी थी. फलस्वरूप कोई अधिकारी वहां मौजूद नहीं था. इसलिए सीईओ कार्यालय के अधिकारी या कर्मचारी वामदलों के नेताओं से नहीं मिला. उम्मीद है कि बृहस्पतिवार को कार्यालय खुलेगा, तो धरना-प्रदर्शन कर रहे नेताओं की सीईओ से मुलाकात होगी और उनकी मांगों पर वार्ता भी होगी. फिलहाल, वामदलों के लोग सीईओ कार्यालय के बाहर धरना दे रहे हैं.

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