कोलकाता में SIR की कैंची, श्यामपुकुर और चौरंगी में वोटर लिस्ट से गायब हजारों प्रवासी मजदूर, जानें अपनी सीट का हाल

Kolkata Voter List Deletion 2026: कोलकाता की मतदाता सूची में SIR के बाद बड़ी छंटनी हुई है. श्यामपुकुर और चौरंगी में हजारों मतदाता अयोग्य करार दे दिये गये. सबर इंस्टीट्यूट ने प्रवासी मजदूरों और अल्पसंख्यकों पर असर को लेकर चिंता जतायी है.
खास बातें
Kolkata Voter List Deletion 2026: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के दूसरे चरण के मतदान (29 अप्रैल) से ठीक पहले कोलकाता की मतदाता सूची में बड़े बदलाव सामने आये हैं. निर्वाचन आयोग (ECI) के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के बाद कोलकाता के कई इलाकों से भारी संख्या में मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट से हटा दिये गये हैं.
श्यामपुकुर में 87 प्रतिशत वोटर अयोग्य घोषित
इस लिस्ट में श्यामपुकुर विधानसभा क्षेत्र सबसे ऊपर है. इस सीट पर जांच के घेरे में आये 87 प्रतिशत मतदाताओं को अयोग्य घोषित कर दिया गया है. इसके बाद चौरंगी और इंटाली का नंबर आता है. इन आंकड़ों ने राजनीतिक गलियारों में खलबली मचा दी है.
श्यामपुकुर और चौरंगी में सबसे बड़ा वोटर कट
- श्यामपुकुर विधानसभा सीट : कुल 2,759 संदिग्ध मामलों में से 2,390 (87 प्रतिशत) नाम हटा दिये गये.
- चौरंगी विधानसभा सीट : 14,217 मामलों में से 10,424 (73.3 प्रतिशत) मतदाताओं के नाम काट दिये गये.
- इंटाली विधानसभा सीट : 12,558 में से 9,092 (72.4 फीसदी) नाम काटे गये हैं.
- जोड़ासांकू में 63.6 प्रतिशत, रासबिहारी में 61.6 प्रतिशत काशीपुर-बेलगाछिया में 60 प्रतिशत नाम हटाये गये हैं.
बंगाल की खबरें पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें
बालीगंज और भवानीपुर में हुई वोटर्स की वापसी
- बालीगंज विधानसभा सीट : 23,968 संदिग्ध मामलों में से 17,769 (74 प्रतिशत) मतदाताओं को वैध मानकर सूची में शामिल किया गया.
- भवानीपुर विधानसभा सीट : मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की सीट पर 14,154 मामलों में से 10,256 मतदाताओं की पात्रता को हरी झंडी मिली.
- कोलकाता पोर्ट विधानसभा सीट : इस सीट पर सबसे ज्यादा 32,378 मामले जांच के अधीन थे. इनमें से 59 फीसदी यानी 18,938 नामों को क्लियर कर दिया गया.
इसे भी पढ़ें : ममता बनर्जी की भवानीपुर सीट पर 25 प्रतिशत लोग वोटर लिस्ट से बाहर, आंकड़ों में उलझा जीत-हार का गणित
Kolkata Voter List Deletion 2026: प्रवासी मजदूरों और अल्पसंख्यकों पर असर?
सबर इंस्टीट्यूट के शोधकर्ता सौप्तिक हलधर ने कहा कि यह कटौती मुख्य रूप से आर्थिक रूप से कमजोर और प्रवासी मजदूर आबादी को प्रभावित कर रही है. श्यामपुकुर, चौरंगी और इंटाली जैसे क्षेत्रों में प्रवासी मजदूरों की संख्या अधिक है.
इसे भी पढ़ें : मतुआ और अल्पसंख्यकों को चुन-चुनकर वोटर लिस्ट से हटाया, ममता बनर्जी का बड़ा आरोप
पूरे बंगाल में 60 लाख मतदाता जांच के दायरे में
कोलकाता ही नहीं, पूरे बंगाल की 294 सीटों पर 60 लाख से अधिक मतदाताओं को न्यायिक जांच (Adjudication) के दायरे में रखा गया था. कोलकाता के बाहर राजरहाट न्यू टाउन में सबसे ज्यादा कटौती देखी गयी, जहां 31,382 मामलों में से 24,132 (77 प्रतिशत) नाम हटा दिये गये. कोलकाता में नामांकन की प्रक्रिया समाप्त होने के साथ ही यह लिस्ट ‘फ्रीज’ कर दी गयी.
इसे भी पढ़ें : SIR पर सुप्रीम कोर्ट में महासंग्राम, 60 लाख दावों पर जजों ने लिया फैसला, मालदा में घेराव के बीच 8 लाख केस सुलझे
SIR के आंकड़ों से जुड़ी जरूरी बातें
- पूरे पश्चिम बंगाल में SIR प्रक्रिया के बाद लगभग 91 लाख नाम मतदाता सूची से हटाये गये. इनमें 27.16 लाख नाम केवल न्यायिक जांच (Judicial Scrutiny) के अंतिम चरण में काटे गये.
- कोलकाता शहर के उत्तरी और दक्षिणी हिस्सों में मतदाताओं की संख्या में भारी कमी आयी है. श्यामपुकुर में सबसे ज्यादा 87 प्रतिशत नाम काटे गये, जो जांच के दायरे में थे.
- भवानीपुर में कुल मतदाताओं की संख्या में लगभग 25 प्रतिशत (करीब 51,004 नाम) की कमी आयी है. इसमें पहले चरण की कटौती और न्यायिक जांच दोनों शामिल हैं.
- शोधकर्ताओं का दावा है कि इस कटौती का सबसे बड़ा असर प्रवासी मजदूरों और अल्पसंख्यक समुदायों पर पड़ा है. विशेष रूप से लॉजिकल डिस्क्रिपेंसी और अनमैप्ड श्रेणियों के तहत.
इसे भी पढ़ें
श्रीरामपुर में गरजे राहुल गांधी- ममता बनर्जी और मोदी अमीरों के लिए कर रहे काम, दोनों सत्ता के लालची
प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी
लेखक के बारे में
By Mithilesh Jha
मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 30 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.
Prabhat Khabar App :
देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए




