गिरफ्तारी पर रोक के बाद सीआईडी ऑफिस पहुंचे टीएमसी नेता अभिषेक बनर्जी, जानें पूरा मामला
Published by : Mithilesh Jha Updated At : 11 Jun 2026 7:15 PM
तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी.
Abhishek Banerjee at CID Office: लगातार सीआईडी के नोटिस की अनदेखी करने वाले टीएमसी नेता अभिषेक बनर्जी पर हाईकोर्ट का डंडा चला, तो वह भागकर सीआईडी ऑफिस पहुंचे. सीआईडी के अधिकारी उनसे नेता प्रतिपक्ष की नियुक्ति के लिए जारी चिट्ठी पर फर्जी हस्ताक्षर मामले में पूछताछ करेगी.
Abhishek Banerjee at CID Office: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 में करारी हार के बाद नेता प्रतिपक्ष की नियुक्ति में कथित हस्ताक्षर स्कैम मामले में पूछताछ के लिए तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी गुरुवार को सीआईडी ऑफिस पहुंचे. सीआईडी के नोटिस की बार-बार अनदेखी करने वाले ममता बनर्जी के भाईपो को कलकत्ता हाईकोर्ट ने जांच में सहयोग करने का आदेश दिया था. 3 सप्ताह तक गिरफ्तारी पर रोक के बाद अभिषेक कोलकाता के भवानी भवन स्थित सीआईडी ऑफिस पहुंचे.
जांच में शामिल होने की बजाय चले गये थे दिल्ली
सिग्नेचर स्कैम मामले में सीआईडी ने अभिषेक बनर्जी को 3 समन जारी किये थे, लेकिन वह पूछताछ के लिए हाजिर नहीं हुए. सीआईडी जांच से बचने के लिए अभिषेक बनर्जी ने पहले बीमार होने का बहाना बनाया. फिर बाद में चुपचाप दिल्ली रवाना हो गये. दिल्ली में उन्हें इंडिया गठबंधन की बैठक में सक्रिय देख सीआईडी अधिकारियों की नाराजगी बढ़ गयी.
हाईकोर्ट ने अभिषेक को जांच में शामिल होने को कहा
कलकत्ता हाईकोर्ट ने अभिषेक बनर्जी को सीआईडी जांच में सहयोग करने का आदेश दिया. सरकार के वकील ने उन्हें गिरफ्तार कर पूछताछ करने की अनुमति मांगी, लेकिन कोर्ट ने कहा कि 3 सप्ताह तक टीएमसी महासचिव को गिरफ्तार न किया जाये. इसके बाद अभिषेक बनर्जी को मजबूरन पूछताछ के लिए भवानी भवन पहुंचना पड़ा. दिल्ली से कोलकाता लौटने के बाद वह एयरपोर्ट से सीधे सीआईडी ऑफिस पहुंचे. पूरा मामला बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 में टीएमसी की करारी हार के बाद नेता प्रतिपक्ष के चयन से जुड़ा है.
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फर्जी हस्ताक्षर से जुड़ा है पूरा मामला
पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव के नाते अभिषेक बनर्जी ने बंगाल विधानसभा के अध्यक्ष (स्पीकर) को विधायकों के हस्ताक्षर वाली एक चिट्ठी लिखकर शोभन देव चट्टोपाध्याय को विपक्ष का नेता बनाये जाने की जानकारी दी थी. चिट्ठी में लिखा गया था कि 6 मई को विधायकों की बैठक हुई, जिसमें 70 विधायकों ने शोभनदेव को विपक्ष का नेता चुना. इस पत्र के साथ विधायकों के हस्ताक्षर वाली जो कॉपी थी, उस पर कुछ विधायकों के हस्ताक्षर की जगह कैपिटल लेटर में उनके नाम लिखे थे. रीतब्रत बनर्जी समेत 2 विधायकों ने इस पर आपत्ति जतायी.
जांच से बचने की कोशिश कर रहे थे अभिषेक
बागी गुट के नेता रीतब्रत बनर्जी ने कहा कि समर्थन का दावा गलत है. वह बैठक में शामिल नहीं हुए थे. शीट पर उनके हस्ताक्षर नहीं हैं. इसके साथ ही उन्होंने समर्थन पत्र की जांच की मांग की. इसके बाद इस मामले में प्राथमिकी दर्ज की गयी. पूरे मामले की जांच की जिम्मेदारी सीआईडी को सौंपी गयी. सीआईडी ने अभिषेक बनर्जी से बार-बार पूछताछ की कोशिश की, लेकिन टीएमसी नेता लगातार बचने की कोशिश कर रहे थे.
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By Mithilesh Jha
मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 30 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.
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