गिरफ्तारी पर रोक के बाद सीआईडी ऑफिस पहुंचे टीएमसी नेता अभिषेक बनर्जी, जानें पूरा मामला

तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी.
Abhishek Banerjee at CID Office: लगातार सीआईडी के नोटिस की अनदेखी करने वाले टीएमसी नेता अभिषेक बनर्जी पर हाईकोर्ट का डंडा चला, तो वह भागकर सीआईडी ऑफिस पहुंचे. सीआईडी के अधिकारी उनसे नेता प्रतिपक्ष की नियुक्ति के लिए जारी चिट्ठी पर फर्जी हस्ताक्षर मामले में पूछताछ करेगी.
Abhishek Banerjee at CID Office: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 में करारी हार के बाद नेता प्रतिपक्ष की नियुक्ति में कथित हस्ताक्षर स्कैम मामले में पूछताछ के लिए तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी गुरुवार को सीआईडी ऑफिस पहुंचे. सीआईडी के नोटिस की बार-बार अनदेखी करने वाले ममता बनर्जी के भाईपो को कलकत्ता हाईकोर्ट ने जांच में सहयोग करने का आदेश दिया था. 3 सप्ताह तक गिरफ्तारी पर रोक के बाद अभिषेक कोलकाता के भवानी भवन स्थित सीआईडी ऑफिस पहुंचे.
जांच में शामिल होने की बजाय चले गये थे दिल्ली
सिग्नेचर स्कैम मामले में सीआईडी ने अभिषेक बनर्जी को 3 समन जारी किये थे, लेकिन वह पूछताछ के लिए हाजिर नहीं हुए. सीआईडी जांच से बचने के लिए अभिषेक बनर्जी ने पहले बीमार होने का बहाना बनाया. फिर बाद में चुपचाप दिल्ली रवाना हो गये. दिल्ली में उन्हें इंडिया गठबंधन की बैठक में सक्रिय देख सीआईडी अधिकारियों की नाराजगी बढ़ गयी.
हाईकोर्ट ने अभिषेक को जांच में शामिल होने को कहा
कलकत्ता हाईकोर्ट ने अभिषेक बनर्जी को सीआईडी जांच में सहयोग करने का आदेश दिया. सरकार के वकील ने उन्हें गिरफ्तार कर पूछताछ करने की अनुमति मांगी, लेकिन कोर्ट ने कहा कि 3 सप्ताह तक टीएमसी महासचिव को गिरफ्तार न किया जाये. इसके बाद अभिषेक बनर्जी को मजबूरन पूछताछ के लिए भवानी भवन पहुंचना पड़ा. दिल्ली से कोलकाता लौटने के बाद वह एयरपोर्ट से सीधे सीआईडी ऑफिस पहुंचे. पूरा मामला बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 में टीएमसी की करारी हार के बाद नेता प्रतिपक्ष के चयन से जुड़ा है.
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फर्जी हस्ताक्षर से जुड़ा है पूरा मामला
पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव के नाते अभिषेक बनर्जी ने बंगाल विधानसभा के अध्यक्ष (स्पीकर) को विधायकों के हस्ताक्षर वाली एक चिट्ठी लिखकर शोभन देव चट्टोपाध्याय को विपक्ष का नेता बनाये जाने की जानकारी दी थी. चिट्ठी में लिखा गया था कि 6 मई को विधायकों की बैठक हुई, जिसमें 70 विधायकों ने शोभनदेव को विपक्ष का नेता चुना. इस पत्र के साथ विधायकों के हस्ताक्षर वाली जो कॉपी थी, उस पर कुछ विधायकों के हस्ताक्षर की जगह कैपिटल लेटर में उनके नाम लिखे थे. रीतब्रत बनर्जी समेत 2 विधायकों ने इस पर आपत्ति जतायी.
जांच से बचने की कोशिश कर रहे थे अभिषेक
बागी गुट के नेता रीतब्रत बनर्जी ने कहा कि समर्थन का दावा गलत है. वह बैठक में शामिल नहीं हुए थे. शीट पर उनके हस्ताक्षर नहीं हैं. इसके साथ ही उन्होंने समर्थन पत्र की जांच की मांग की. इसके बाद इस मामले में प्राथमिकी दर्ज की गयी. पूरे मामले की जांच की जिम्मेदारी सीआईडी को सौंपी गयी. सीआईडी ने अभिषेक बनर्जी से बार-बार पूछताछ की कोशिश की, लेकिन टीएमसी नेता लगातार बचने की कोशिश कर रहे थे.
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By मिथिलेश झा
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