अभिषेक बनर्जी के ‘शांतिनिकेतन’ पर फिर CID की दस्तक, बंद मिला दरवाजा, जाली हस्ताक्षर मामले में बढ़ा सस्पेंस

Published by : Mithilesh Jha Updated At : 30 May 2026 2:49 PM

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बेलेघाटा में तृणमूल कार्यकर्ता के परिजन के साथ टीएमसी नेता अभिषेक बनर्जी.

CID at Abhishek Banerjee House: कोलकाता में अभिषेक बनर्जी के आवास पर सीआईडी की टीम पहुंची, लेकिन सांसद घर पर नहीं थे. शोभनदेव चट्टोपाध्याय के समर्थन पत्र पर कथित जाली हस्ताक्षर मामले में जांच तेज हो गयी है. पढ़ें पूरी रिपोर्ट और टीएमसी की प्रतिक्रिया.

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कोलकाता से मनोरंजन सिंह की रिपोर्ट

CID at Abhishek Banerjee House: पश्चिम बंगाल की राजनीति में शनिवार को उस समय हलचल तेज हो गयी, जब राज्य की आपराधिक जांच विभाग (CID) की एक टीम तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव और डायमंड हार्बर से सांसद अभिषेक बनर्जी के आवास ‘शांतिनिकेतन’ पहुंची. हरीश मुखर्जी रोड स्थित उनके आवास पर सीआईडी की यह कार्रवाई ऐसे समय में हुई है, जब राज्य में चुनावी नतीजों के बाद राजनीतिक माहौल पहले से ही गरमाया हुआ है.

बंद दरवाजा और ‘मिस्टीरियस’ सन्नाटा: क्या हुआ मौके पर?

शनिवार दोपहर जब सीआईडी के 4 अधिकारियों की टीम शांतिनिकेतन पहुंची, तो घर का दरवाजा बंद मिला. अधिकारियों ने दरवाजा खटखटाया, तो वह अंदर से बंद था. काफी देर तक बाहर इंतजार करने के बाद घर के अंदर से एक व्यक्ति बाहर आया.

अभिषेक के घर के बाहर पुलिस का पहरा

घर से निकले व्यक्ति ने अधिकारियों को बताया कि अभिषेक बनर्जी घर पर नहीं हैं. सीआईडी ने औपचारिकता पूरी करते हुए उस व्यक्ति की पहचान नोट की और वहां से वापस चली गयी. सीआईडी के जाने के बाद भी एहतियात के तौर पर हेयर स्ट्रीट थाने की पुलिस को आवास के बाहर तैनात रखा गया है.

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आखिर क्यों पहुंची CID? जाली हस्ताक्षर का पेंच

आधिकारिक तौर पर सीआईडी ने इस यात्रा का उद्देश्य स्पष्ट नहीं किया है, लेकिन सूत्रों के हवाले से जानकारी सामने आयी है कि मामला पश्चिम बंगाल विधानसभा में शोभनदेव चट्टोपाध्याय को विपक्ष का नेता बनाने के लिए सौंपे गये समर्थन पत्र से जुड़ा है.

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जाली हस्ताक्षर का आरोप

विधानसभा सचिवालय ने इस पत्र पर किये गये कुछ हस्ताक्षरों की प्रामाणिकता पर संदेह जताया है. आरोप है कि इनमें से कुछ हस्ताक्षर ‘जाली’ हो सकते हैं. इसी मामले की कड़ियां जोड़ते हुए सीआईडी की टीम अभिषेक बनर्जी से पूछताछ या किसी दस्तावेज के सत्यापन के लिए पहुंची थी.

घर पर नहीं, बेलेघाटा में दिखे अभिषेक

जब सीआईडी की टीम उनके घर का दरवाजा खटखटा रही थी, तब अभिषेक बनर्जी कोलकाता के ही बेलेघाटा इलाके में थे. वे वार्ड नंबर 35 में चुनाव के दौरान मारे गये तृणमूल कार्यकर्ता विश्वजीत पटनायक के घर पहुंचे थे. इस दौरान उनके साथ तृणमूल विधायक कुणाल घोष भी मौजूद थे. अभिषेक ने शोक संतप्त परिवार को ढाढ़स बंधाया और हरसंभव मदद का भरोसा दिया.

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CID at Abhishek Banerjee House: टीएमसी बोली- बदले की कार्रवाई

तृणमूल कांग्रेस ने सीआईडी की इस सक्रियता को भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के इशारे पर की गयी प्रतिशोध की राजनीति करार दिया है. पार्टी प्रवक्ताओं का कहना है कि कोयला तस्करी और शिक्षक भर्ती घोटाले के बाद अब नये-नये आधारहीन मामले बनाकर अभिषेक बनर्जी को परेशान करने की कोशिश की जा रही है.

सीबीआई-ईडी के सामने नहीं झुका तो सीआइडी क्या : अभिषेक

सीआइडी मामले में पूछे जाने पर तृणमूल सांसद अभिषेक बनर्जी ने कहा कि जब सीबीआई-ईडी के सामने सिर नहीं झुकाया तो सीआइडी क्या है. वे जितना भी कोशिश कर लें, कभी सिर नहीं झुकाउंगा. चाहे केएमसी के जरिये नोटिस भेज दें, कितनी भी एजेंसियां लगा लें, मैं झुकने वाला नहीं हूं.

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By Mithilesh Jha

मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 30 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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