ममता बनर्जी को उत्तर बंगाल में लगा सबसे बड़ा झटका, इस नेता के इस्तीफे से संकट में टीएमसी का वजूद

Published by : Mithilesh Jha Updated At : 11 Jun 2026 10:27 PM

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राज्यसभा के सभापति सीपी राधाकृष्णन को इस्तीफा सौंपते प्रकाश चिक बड़ाईक.

Prakash Chik Baraik Resigns: ममता बनर्जी की पार्टी के राजनीतिक संकट के बीच टीएमसी के राज्यसभा सांसद प्रकाश चिक बड़ाईक ने इस्तीफा दे दिया है. 20 लोकसभा सांसदों और 64 विधायकों की बगावत के बीच इस इस्तीफे से ममता बनर्जी को उत्तर बंगाल में बड़ा झटका लगा है.

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Prakash Chik Baraik Resigns: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में मिली करारी शिकस्त के बाद तृणमूल कांग्रेस (TMC) में अंदरूनी बगावत की आग अब देश के उच्च सदन यानी राज्यसभा तक पहुंच गयी है. दिल्ली से लेकर कोलकाता और उत्तर बंगाल के चाय बागानों तक उस वक्त सनसनी फैल गयी, जब तृणमूल कांग्रेस के कद्दावर आदिवासी चेहरे और राज्यसभा सांसद प्रकाश चिक बड़ाईक (Prakash Chik Baraik) ने अचानक अपने पद से इस्तीफा दे दिया.

हैरान और लाचार हुए कालीघाट के रणनीतिकार

उन्होंने अपना इस्तीफा राज्यसभा के सभापति को सौंप दिया है. बड़ाईक का इस्तीफा ऐसे समय में आया, जब पहले से ही टीएमसी के 20 लोकसभा सांसद और 64 विधायक खुली को संभालने में ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी नाकाम रहे. प्रकाश चिक बड़ाईक के इस अप्रत्याशित कदम ने कालीघाट (ममता बनर्जी का आवास) के रणनीतिकारों को पूरी तरह हैरान और लाचार कर दिया है, क्योंकि वे उत्तर बंगाल में टीएमसी के सबसे बड़े संगठनात्मक स्तंभ माने जाते थे.

क्यों टूटे प्रकाश चिक बड़ाईक?

अलीपुरद्वार और जलपाईगुड़ी के चाय बागान क्षेत्रों में टीएमसी को मजबूत करने वाले प्रकाश चिक बड़ाईक ने ऐसा कदम क्यों उठाया? इस सवाल का जवाब यह है कि बड़ाईक लंबे समय से राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी और उनके कॉरपोरेट सलाहकारों (I-PAC) की कार्यशैली से बेहद क्षुब्ध थे. विधानसभा चुनाव में पार्टी की ऐतिहासिक हार के बाद जब ओल्ड गार्ड्स (पुराने नेताओं) की आवाज को पूरी तरह दबा दिया गया, तो उन्होंने घुटन महसूस करना शुरू कर दिया था.

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उत्तर बंगाल विकास विभाग का नया समीकरण

पश्चिम बंगाल की शुभेंदु अधिकारी सरकार में उत्तर बंगाल विकास विभाग की कमान कैबिनेट मंत्री नीशीथ प्रमाणिक के हाथों में जाने और भाजपा द्वारा जमीनी स्तर पर किये जा रहे प्रशासनिक सुधारों के बाद, प्रकाश चिक बड़ाईक को अपना और अपने आदिवासी समाज का भविष्य टीएमसी के साथ पूरी तरह अंधकारमय नजर आने लगा था.

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‘साइन-गेट’ घोटाला और कांग्रेस में विलय की खबरों से बढ़ा असंतोष

विधायकों के जाली हस्ताक्षर मामले (Signature Forgery Case) में अभिषेक बनर्जी पर कसते सीआईडी और ईडी के शिकंजे को देखकर टीएमसी के कई सांसद अब अपनी साफ-सुथरी छवि को बचाने के लिए पार्टी से दूरी बना रहे हैं. प्रकाश चिक बड़ाईक इसी रणनीति के तहत विवादों से पूरी तरह दूर होना चाहते हैं. साइन-गेट घोटाला और टीएमसी के कांग्रेस में विलय की खबरों की वजह से उनके मन में असंतोष बढ़ा और उन्होंने राज्यसभा की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया.

Prakash Chik Baraik Resigns: उत्तर बंगाल में तृणमूल का सूपड़ा साफ

वरिष्ठ सांसद कल्याण बनर्जी द्वारा ममता बनर्जी को अल्टीमेटम (हमें चुनिये या अभिषेक को) के बाद बड़ाईक का इस्तीफा दर्शाता है कि तृणमूल कांग्रेस अब अपना वजूद बचाने की लड़ाई लड़ रहही है. महुआ मोईत्रा भले ही पाला बदलने वालों को ‘कचरा’ बता रही हों, लेकिन बड़ाईक जैसे जमीनी आदिवासी नेता का इस्तीफा बता रहा है कि पार्टी ने अपना जनाधार पूरी तरह खो दिया है.

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मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 30 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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