थाली में राख, फेफड़ों में जहर, रानीगंज में ‘रणचंडी’ बनी महिलाएं, वोट बहिष्कार का किया ऐलान, पढ़ें ग्राउंड रिपोर्ट

Published by :Mithilesh Jha
Published at :18 Apr 2026 11:05 AM (IST)
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Raniganj Pollution Protest West Bengal Election 2026

सड़क पर बच्चों के साथ प्रदर्शन करती प्रदूषण से परेशान महिलाएं. फोटो : प्रभात खबर

Raniganj Pollution Protest: रानीगंज के दामोदर कॉलोनी में प्रदूषण के खिलाफ महिलाओं ने मोर्चा खोल दिया है. धूल और काली राख से परेशान निवासियों ने आगामी चुनाव के बहिष्कार का फैसला किया है. प्रशासन और नेताओं की बेरुखी से जनता में भारी आक्रोश है.

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Raniganj Pollution Protest| रानीगंज, जीतू : पश्चिम बंगाल चुनाव 2026 की सरगर्मियों के बीच रानीगंज के बकतार नगर स्थित दामोदर कॉलोनी में विद्रोह की आग भड़क उठी. मुद्दा राजनीतिक नहीं, प्रदूषण का है. धूल और काली राख के साये में नारकीय जीवन जीने को मजबूर स्थानीय महिलाओं का सब्र टूट गया और उन्होंने सड़कों पर उतरकर चक्का जाम कर दिया. साथ ही बंगाल चुनाव के बहिष्कार का ऐलान कर दिया. ग्रामीणों ने साफ कहा- साफ हवा नहीं, तो वोट नहीं.

नारकीय जीवन का दर्द : सुबह उठते ही थाली में मिलती है राख

प्रदर्शन का नेतृत्व कर रही गुड़िया मालाकार ने व्यवस्था पर सवाल खड़े किये हैं. उन्होंने रुंधे गले से अपनी व्यथा सुनाते हुए कहा- हमलोग इंसान नहीं, बल्कि नरक के कीड़े-मकोड़ों जैसी जिंदगी जी रहे हैं. सुबह उठते ही सबसे पहले खाने की थाली में धूल और काली राख गिरती है.

शिकायतों को अनसुना कर देते हैं फैक्ट्री मालिक

फैक्ट्रियों से निकलने वाला जहरीला धुआं हमारे बच्चों के फेफड़ों को खत्म कर रहा है. हर घर में लोग सांस की बीमारी से जूझ रहे हैं. स्थानीय निवासियों का आरोप है कि फैक्ट्री मालिक शिकायतों को अनसुना कर देते हैं. वे दिखावे के लिए दो दिन स्थिति सुधारते हैं. फिर से वही मौत का धुआं उगलना शुरू कर देते हैं.

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नेताओं की बेरुखी से फूटा गुस्सा, आर-पार की लड़ाई के मूड में जनता

सुबह से ही भूखे-प्यासे सड़क पर डटी महिलाओं का आक्रोश उन नेताओं के प्रति सबसे अधिक था, जो चुनाव के समय वादे करने आते हैं. प्रदर्शनकारियों ने कहा कि घंटों से रास्ता जाम है, लेकिन किसी भी जनप्रतिनिधि को इससे कोई फर्क नहीं पड़ा. नेताओं की इसी बेरुखी ने अब इस आंदोलन को एक बड़ी राजनीतिक चुनौती में बदल दिया है.

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चुनाव बहिष्कार : कॉलोनी में नेताओं के प्रवेश पर रोक

दामोदर कॉलोनी के निवासियों ने सामूहिक रूप से फैसला लिया है कि इस बार वे मतदान नहीं करेंगे. ग्रामीणों ने कहा कि जब तक प्रदूषण का स्थायी समाधान नहीं होगा, कोई भी भी मतदाता बूथ तक नहीं जायेगा. इतना ही नहीं, लोगों ने कहा कि सिर्फ वोट के समय चेहरा दिखाने वाले नेताओं के कॉलोनी में प्रवेश पर रोक लगा दी गयी है. लोगों ने कहा कि अगर प्रशासन उन्हें साफ हवा की गारंटी नहीं दे सकता, तो वे नेताओं को सत्ता की गारंटी नहीं देंगे.

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Raniganj Pollution Protest: प्रशासनिक चुप्पी और नियमों की अनदेखी

रानीगंज का यह क्षेत्र लंबे समय से औद्योगिक प्रदूषण की मार झेल रहा है. स्थानीय लोगों का आरोप है कि प्रशासन और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की मिलीभगत से फैक्ट्रियां नियमों की धज्जियां उड़ा रही हैं. इससे इलाके के लोगों में भारी नाराजगी है. अब भी प्रशासन नहीं चेता, तो चुनाव में इसका असर देखने को मिलेगा.

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लेखक के बारे में

By Mithilesh Jha

मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 30 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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