पुष्पा भालोटिया हत्याकांड. साढ़े ग्यारह महीने बाद सीआइडी ने पति को दबोचा
Updated at : 20 Sep 2018 6:05 AM (IST)
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रानीगंज : रानीगंज के उद्योगपति एवं प्रतिष्ठित समाजसेवी भक्तिराम भालोटिया के पुत्र मनोज भालोटिया को पत्नी पुष्पा भालोटिया की हत्या के आरोप में साढ़े ग्यारह महीना के पश्चात सीआईडी ने कोलकाता से गिरफ्तार कर बुधवार को आसनसोल न्यायालय में पेश किया. सीआईडी के अधिकारी अनुपम चक्रवर्ती ने पूछताछ के लिये सात दिनों की रिमांग मांगी […]
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रानीगंज : रानीगंज के उद्योगपति एवं प्रतिष्ठित समाजसेवी भक्तिराम भालोटिया के पुत्र मनोज भालोटिया को पत्नी पुष्पा भालोटिया की हत्या के आरोप में साढ़े ग्यारह महीना के पश्चात सीआईडी ने कोलकाता से गिरफ्तार कर बुधवार को आसनसोल न्यायालय में पेश किया. सीआईडी के अधिकारी अनुपम चक्रवर्ती ने पूछताछ के लिये सात दिनों की रिमांग मांगी जबकि न्यायाधीश ने मनोज को पांच दिनों की रिमांड पर भेज दिया.
मनोज के अधिवक्ता अभिक घटक ने न्यायालय में यह दलील दी कि पुष्पा ने मानसिक रूप से अवसादग्रस्त होने के कारण आत्महत्या की थी. एसजीएम कोर्ट के न्यायाधीश ने कहा कि कोई भी व्यक्ति एक ही साथ आग लगाकर तथा गोली मारकर आत्महत्या नहीं कर सकता है. रिवाल्वर पर पुष्पा भालोटिया की अंगुलियों के निशान भी मौजूद नहीं थे.
उल्लेखनीय है कि मृतका के भाई गोपाल अग्रवाल ने छह नवंबर 2017 को रानीगंज थाना में बहन पुष्पा की हत्या का आरोप पति मनोज भालोटिया पर लगाया था. हत्या में उसका साथ देने के लिये उसके चचेरे भाई राजेश भालोटिया तथा पत्नी सविता भालोटिया के खिलाफ भी शिकायत दर्ज करायी थी. पुलिस ने आरोप के आधार पर 498 ए/ 302 /120 बी/ 25, 27 आर्म्स एक्ट के तहत मामला दर्ज किया था.
गोपाल ने बताया था कि बहन पुष्पा का विवाह वर्ष 1995 में मनोज भालोटिया के साथ हुआ था. शादी के पश्चात ही उसे मानसिक, शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया जाने लगा. वर्ष 2017 के मई-जून में जब वह कोलकाता आयी थी तो उसने बताया था कि वह रानीगंज अपने ससुराल नहीं जाना चाहती है. पति उसे हर वक्त प्रताड़ित करता है. लेकिन उसे समझा-बुझाकर रानीगंज भेजा गया. पांच अक्टूबर 2017 को सूचना मिली कि बहन ने सुसाइड का प्रयास किया है.
उसी दिन शाम सात बजे दुर्गापुर मिशन अस्पताल में जाकर देखा तो वह मृत थी. उसके सिर पर गोली लगी हुई थी. हाथ, पैर जले हुये थे. गोपाल ने बताया कि कोई भी व्यक्ति आग लगाकर तथा गोली मारकर आत्महत्या नहीं कर सकता है. इस आधार पर उसने कोलकाता हाईकोर्ट में 19 जनवरी 2018 को पुलिस पर निष्क्रियता का आरोप लगाते हुये मामला दर्ज किया था. इसके पूर्व 17 दिसंबर को पुलिस पर मीडिया के बढ़ते दबाव के कारण मामले को सीआईडी को सौंप दिया गया था.
इधर सीआईडी ने 25 जुलाई को हाईकोर्ट को यह बताया कि मनोज भालोटिया उनकी गिरफ्त से बाहर है जबकि मनोज भालोटिया के पुत्र यस भालोटिया ने इसी वर्ष के अगस्त माह में हाईकोर्ट को यह जानकारी दी उसके पिता फरार नहीं है बल्कि वह हर समय मौजूद है एवं 21 अगस्त को उसने सीआईडी को पत्र दिया था कि जब भी सीआईडी उन्हें बुलायेगी वह मौजूद हैं.
सीआईडी तथा आरोपी के अधिवक्ता के दिये गये बयान में विसंगति को देख 21 अगस्त 2018 को कोलकाता हाईकोर्ट के सिंगल बेंच के न्यायाधीश राजशेखर मंथा ने सीआईडी के कार्य की भर्त्सना करते हुये मामला सीबीआई को सौंप दिया था लेकिन बाद में पुनः मामले को सीआईडी को सौंप दिया गया. इसके बाद सीआईडी हरकत में आयी और मनोज भालोटिया को पूछताछ के लिये कोलकाता सीआईडी कार्यालय में मंगलवार को बुला कर उसे गिरफ्तार कर आसनसोल न्यायालय में पेश किया.
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