बंगाल के पूर्व मंत्री अरूप रॉय के घर के पास मिला कंबल-तिरपाल का जखीरा, भाजपा ने पकड़ी मैटाडोर, लगे चोर-चोर के नारे

Published by : Mithilesh Jha Updated At : 30 May 2026 3:18 PM

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मेटाडोर पर लदे तिरपाल-कंबल और प्रदर्शन करते लोग.

Howrah Relief Material Controversy: हावड़ा में टीएमसी विधायक अरूप रॉय के घर के पास सरकारी राहत सामग्री मिलने से हड़कंप मच गया. भाजपा ने मैटाडोर रोककर प्रदर्शन किया और गबन का आरोप लगाया. विधायक और डीएम ने दी सफाई. पूरी रिपोर्ट यहां पढ़ें.

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कोलकाता से मनोरंजन सिंह की रिपोर्ट

Howrah Relief Material Controversy: पश्चिम बंगाल के पूर्व मंत्री और तृणमूल विधायक अरूप रॉय के घर के पास के एक गोदाम से भारी मात्रा में सरकारी कंबल, तिरपाल और राहत सामग्री बरामद होने से बवाल मच गया है. भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) समर्थकों ने मेटाडोर रोका और फिर विरोध जताया. चोर-चोर के नारे भी लगाये.

क्या है पूरा मामला?

शनिवार को गोदाम से राहत सामग्री के सामान मैटाडोर में लादकर कहीं ले जाया जा रहा था. तभी भाजपा कार्यकर्ताओं ने संदेह के आधार पर गाड़ी को घेरकर रोक लिया. उनका आरोप है कि पूर्व मंत्री जनता में बांटने के लिए रखे गये सरकारी सामान चुपके से गबन करने की फिराक में थे. इसलिए सामान को यहां से अन्य जगह पर शिफ्ट किया जा रहा था.

चोर-चोर से गूंजा इलाका

खबर फैलते ही सैकड़ों लोग तृणमूल विधायक अरूप रॉय के घर के बाहर जुट गये. लोग ‘चोर-चोर’ के नारे लगाने लगे. जमकर बवाल हुआ. तनाव बढ़ता देख पुलिस मौके पर पहुंची और हालात को संभाला.

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अरूप रॉय बोले – डीएम के कहने पर भेज रहा था

विधायक अरूप रॉय ने इस पर अपनी सफाई दी. उन्होंने कहा- ये सामान लोगों को देने के लिए ही मंगाया था. स्टॉक ज्यादा हो गया, तो जिलाधिकारी को चिट्ठी लिखी. डीएम ने कहा कि सामान वापस जिला दफ्तर भेज दें. उन्हीं के आदेश पर मैटाडोर से सामान को भेजा जा रहा था.

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Howrah Relief Material Controversy: डीएम ने की अरूप रॉय के दावे की पुष्टि

हावड़ा की जिलाधिकारी पी दीपाप्रिया ने अरूप रॉय के दावे की पुष्टि की. उन्होंने कहा- अरूप रॉय ने मुझे जानकारी दी थी. मैंने ही सामान जिला प्रशासन के दफ्तर में भेजने को कहा था.

सामान बांटने के लिए थे, तो निजी गोदाम में क्यों रखे : भाजपा

भाजपा का आरोप है कि अगर सामान बांटना था, तो अब तक बांटा क्यों नहीं गया? निजी गोदाम में सरकारी राहत सामग्री क्यों रखी गयी थी? पार्टी पूरे मामले की जांच की मांग कर रही है. तृणमूल दफ्तरों से राहत सामग्री मिलने की घटनाओं के बीच अरूप रॉय के मामले ने इलाके में तनाव पैदा कर दिया है.

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मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 30 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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