जमीन हड़पने के खेल में ED की रडार पर 30 पुलिसकर्मी, पुलिस महकमे की नींद हराम

Published by : Mithilesh Jha Updated At : 28 May 2026 6:00 PM

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ED Probe Kolkata Cops: कोलकाता में जमीन हड़पने के मामले में ईडी ने कोलकाता पुलिस के 30 अधिकारियों के खिलाफ जांच शुरू की है. भू-माफियाओं के साथ मिलीभगत और फर्जी दस्तावेजों के जरिये जमीन हड़पने के इस खेल में करोड़ों के लेन-देन का शक है. पढ़ें पूरी रिपोर्ट.

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ED Probe Kolkata Cops: पश्चिम बंगाल की राजधानी में जमीन हड़पने के मामलों में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने कोलकाता पुलिस के 30 अधिकारियों और कर्मियों के खिलाफ जांच का शिकंजा कस दिया है. आरोप है कि इन पुलिसकर्मियों ने भू-माफियाओं के साथ साठगांठ कर बेशकीमती जमीनों के दस्तावेजों में हेराफेरी करवायी और असली मालिकों को डरा-धमकाकर उनकी संपत्तियों पर कब्जा दिलवाया. ईडी की इस कार्रवाई ने बंगाल में ‘खाकी और भू-माफिया’ के नेक्सस को बेनकाब कर दिया है, जो लंबे समय से शहर के रियल एस्टेट सेक्टर को खोखला कर रहा था.

जमीन के खेल का कैसे हुआ खुलासा?

ईडी के सूत्रों के मुताबिक, जमीन हड़पने के इस सिंडिकेट की जांच के दौरान कई चौंकाने वाले दस्तावेज हाथ लगे. पता चला है कि सरकारी फाइलों और रजिस्ट्रार ऑफिस के दस्तावेजों में पुलिसकर्मियों की मदद से हेरफेर की गयी. कई पीड़ितों ने आरोप लगाया कि जब वे अपनी जमीन पर कब्जे की शिकायत लेकर थाने पहुंचे, तो वहां मौजूद अधिकारियों ने उनकी मदद करने की बजाय उन्हें ही केस में फंसाने की धमकी दी. ईडी को कुछ संदिग्ध बैंक खातों की जानकारी मिली है, जिनमें जमीन के सौदों के तुरंत बाद बड़ी रकम जमा की गयी थी.

इंस्पेक्टर से लेकर कांस्टेबल तक रडार पर

जांच की आंच कोलकाता पुलिस के विभिन्न रैंक के कर्मियों तक पहुंच रही है. ईडी ने जिन 30 पुलिसकर्मियों को चिह्नित किया है, उनमें थाना प्रभारी (IC) और सब-इंस्पेक्टर लेवल के ऑफिसर शामिल हैं. इनकी भूमिका मुख्य रूप से जमीन विवादों में दखल देने और माफियाओं को सुरक्षा प्रदान करने की पायी गीय है.

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लोकल इनफॉर्मर के रूप में काम करती थी पुलिस

कुछ पुलिसकर्मी भू-माफियाओं को उन संपत्तियों की जानकारी देते थे, जिनका कोई वारिस नहीं था या जो विवादित थीं. ईडी को सबूत मिले हैं कि पुलिस ने असली मालिकों को अपनी जमीन छोड़ने के लिए मजबूर करने के लिए उन पर फर्जी मामले दर्ज किये थे.

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पूछताछ कर संपत्ति की कुर्की करेगी ईडी

केंद्रीय एजेंसी अब इन 30 पुलिसकर्मियों को समन भेजकर दिल्ली या कोलकाता स्थित कार्यालय में पूछताछ के लिए बुलाने की तैयारी में है. ईडी यह भी देख रही है कि क्या इन कर्मियों ने पिछले कुछ वर्षों में अपनी आय के ज्ञात स्रोतों से अधिक संपत्ति अर्जित की है. अगर मनी लाउंडरिंग के पुख्ता सबूत मिलते हैं, तो इन अधिकारियों की संपत्तियों को कुर्क (Attach) किया जा सकता है.

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ED Probe Kolkata Cops: प्रशासनिक खेमे में सन्नाटा

कोलकाता पुलिस के उच्चाधिकारियों ने फिलहाल इस मामले पर चुप्पी साध रखी है. हालांकि, सूत्रों का कहना है कि विभाग के भीतर एक आंतरिक जांच भी शुरू की जा सकती है. मामला ऐसे समय में आया है, जब पूर्ववर्ती राज्य सरकार पहले से ही भ्रष्टाचार के कई मुद्दों पर घिरी हुई है. नयी सरकार की जीरो टॉलरेंस की नीति ने भ्रष्ट पुलिसकर्मियों की मुसीबतें बढ़ा दी हैं.

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मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 30 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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