ममता बनर्जी के करीबी डीसीपी शांतनु विश्वास पर ईडी का शिकंजा, लुकआउट नोटिस के बाद पूछताछ के लिए हुए पेश

Published by : Mithilesh Jha Updated At : 14 May 2026 5:49 PM

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Kolkata Police DCP Land Grabbing Case: कोलकाता पुलिस के डीसीपी शांतनु सिन्हा विश्वास जबरन वसूली और जमीन हड़पने के मामले में ईडी के सामने पेश हुए. ममता बनर्जी के करीबी माने जाने वाले इस अफसर के खिलाफ लुकआउट नोटिस जारी किया गया था. जानें क्या है पूरा मामला.

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Kolkata Police DCP Land Grabbing Case: पश्चिम बंगाल की राजनीति और प्रशासनिक गलियारों में उस वक्त हड़कंप मच गया, जब कोलकाता पुलिस के उपायुक्त (DCP) शांतनु सिन्हा विश्वास बृहस्पतिवार को प्रवर्तन निदेशालय (ED) के दफ्तर पहुंचे. जबरन वसूली और जमीन हड़पने जैसे संगीन मामलों में फंसे विश्वास लंबे समय से केंद्रीय एजेंसी के समन को नजरअंदाज कर रहे थे.

लुकआउट नोटिस जारी होने के बाद हाजिर हुए शांतनु

ईडी की बढ़ती सख्ती और लुकआउट नोटिस जारी होने के बाद आखिरकार उन्हें जांच अधिकारियों के सामने पेश होना पड़ा. कालीघाट थाने के पूर्व प्रभारी रहे शांतनु विश्वास को पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का बेहद भरोसेमंद अधिकारी माना जाता रहा है.

बचने के सारे रास्ते बंद, तब पहुंचे ED दफ्तर

शांतनु विश्वास ने पूछताछ से बचने की काफी कोशिश की, लेकिन ईडी ने उन्हें चारों तरफ से घेर लिया था. बार-बार समन भेजने के बावजूद जब डीसीपी पेश नहीं हुए, तो ईडी ने उनके खिलाफ लुकआउट नोटिस जारी कर दिया. इसकी जानकारी सभी हवाई अड्डों और बीएसएफ को दे दी गयी थी, ताकि वे देश छोड़कर न भाग सकें.

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ईडी ने सुरक्षा निदेशालय से मांगा था विश्वास का लोकेशन

बुधवार को ईडी ने सुरक्षा निदेशालय को पत्र लिखकर विश्वास के लोकेशन की जानकारी मांगी थी. इस कड़े रुख को भांपते हुए वे बृहस्पतिवार को खुद पूछताछ के लिए पेश हुए. इससे पहले 28 अप्रैल को भी उन्हें तलब किया गया था, लेकिन वह हाजिर नहीं हुए थे.

‘सोना पप्पू’ और जय कामदार कनेक्शन

ईडी की जांच में डीसीपी विश्वास का नाम अचानक नहीं आया है. जांच की आंच दो बड़े व्यापारियों के जरिए उन तक पहुंची है. गोलपार्क इलाके के व्यवसायी ‘सोना पप्पू’ पर जमीन हड़पने और जबरन वसूली के आरोप हैं. इस मामले की जांच के दौरान पुलिस अधिकारी शांतनु विश्वास की कथित संलिप्तता के सबूत मिले.

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Kolkata Police DCP Land Grabbing Case: जय कामदार की गिरफ्तारी

बेहाला के व्यवसायी जय कामदार को वित्तीय अनियमितताओं के आरोप में गिरफ्तार किया गया था. उससे हुई पूछताछ में डीसीपी की भूमिका के बारे में कई अतिरिक्त जानकारियां सामने आयीं.

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कालीघाट कनेक्शन की भी होगी जांच?

शांतनु विश्वास लंबे समय तक कालीघाट पुलिस स्टेशन के प्रभारी रहे हैं. कालीघाट इलाका पूर्व मुख्यमंत्री का निवास स्थान है, इसलिए उनकी निकटता के सियासी मायने भी निकाले जा रहे हैं. ईडी इस बात की तफ्तीश कर रही है कि क्या इन भ्रष्टाचार के मामलों में मिली रकम का इस्तेमाल प्रभावशाली लोगों के हितों के लिए किया गया था.

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मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 30 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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