बंगाल में 1 लाख मकान और ग्रामीण सड़कों के लिए केंद्र देगा 1000 करोड़ : शुभेंदु अधिकारी

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कार्यक्रम को संबोधित करते बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी.

केंद्र सरकार ने पश्चिम बंगाल में एक लाख मकानों के निर्माण को मंजूरी दी है. साथ ही, ग्रामीण सड़कों के लिए राज्य को 1000 करोड़ रुपये भी आवंटित किए गए हैं. यह पश्चिम बंगाल के विकास के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है.

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केंद्र सरकार ने सरकारी योजना के तहत पश्चिम बंगाल में एक लाख मकानों के निर्माण को मंजूरी दे दी है. ग्रामीण सड़कों के लिए राज्य को 1000 करोड़ रुपए दिये हैं. पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने मंगलवार को यह जानकारी दी. उन्होंने कहा कि केंद्र ने राज्य में 2,400 किलोमीटर ग्रामीण सड़कों के निर्माण के लिए ये 1,000 करोड़ रुपए आवंटित किये हैं.

शिवराज से सौंपा आवास योजना का स्वीकृति पत्र

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत एक लाख मकानों के निर्माण को भी मंजूरी मिल गयी है. शुभेंदु अधिकारी ने संवाददाताओं को बताया कि केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत एक लाख मकानों की स्वीकृति के पत्र मुझे और पंचायत मंत्री दिलीप घोष को सौंपे.

9 महीने में बंगाल को 8500 करोड़ रुपए से अधिक मिलेंगे : शिवराज

केंद्रीय मंत्री शिवराज चौहान ने मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी से मुलाकात के बाद कहा कि बंगाल को 31 मार्च 2027 तक 9 महीनों में विकसित भारत जी-रामजी (VB-G RAMJI) योजना के तहत 8,508 करोड़ रुपए से अधिक की धनराशि मिलेगी. उन्होंने कहा कि राज्य सरकार के अंशदान को मिलाकर इस योजना की कुल राशि 12,064 करोड़ रुपए से अधिक हो जायेगी.

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बंगाल में शुरू हुई थी 82492 करोड़ की योजनाएं : चौहान

चौहान ने संवाददाता सम्मेलन में कहा कि पश्चिम बंगाल में 82,492 करोड़ रुपए की लागत वाली बुनियादी ढांचा परियोजनाएं शुरू की गयी थी, लेकिन राज्य की ममता बनर्जी सरकार के सहयोग नहीं करने के कारण उन्हें पूरा नहीं किया जा सका. शुभेंदु अधिकारी सरकार ने इन परियोजनाओं की सभी बाधाएं दूर कर दी हैं. उन्होंने विश्वास जताया कि अब राज्य में बुनियादी ढांचे का विकास तेजी से होगा.

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बंगाल के लिए तैयार होगी कृषि की रूपरेखा : चौहान

चौहान ने कहा कि राज्य के लिए कृषि की रूपरेखा तैयार करने के लिए भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) और राज्य के विश्वविद्यालयों के विशेषज्ञों के सहयोग से प्रयास किये जा रहे हैं. इस परियोजना में राज्य की कृषि-जलवायु परिस्थितियों, मिट्टी की प्रकृति और अन्य कारकों को ध्यान में रखते हुए फसलों के चयन और उनकी बेहतर पैदावार के लिए सुझाव दिये जायेंगे.

पूर्वी भारत में बीज विकास का केंद्र बनेगा बंगाल

शिवराज चौहान ने कहा- बंगाल को पूरे पूर्वी भारत में बीज विकास का केंद्र बनाने के लिए एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किया गया है. उन्होंने बताया कि राज्य की 2 प्रमुख फसलों (जूट और आलू) के बीज अभी बाहर से लाये जाते हैं.

शुरू होगा किसान क्रेडिट कार्ड जागरूकता अभियान

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि नाबार्ड और बैंकों की सहायता से जल्द ही ग्रामीण बंगाल में किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) के लिए आवेदन के लिए जागरूकता अभियान शुरू किया जायेगा. उन्होंने कहा कि वर्तमान में राज्य में 12 लाख किसानों के पास क्रेडिट कार्ड हैं.

प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना में शामिल हुए 4 जिले

इस अवसर पर मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने घोषणा की कि बंगाल के 4 जिलों दार्जिलिंग, अलीपुरदुआर, झारग्राम और पुरुलिया को प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना के तहत शामिल किया गया है. यह योजना देश के 100 कम प्रदर्शन करने वाले जिलों में बदलाव लाने के उद्देश्य से शुरू की गयी कृषि पहल है. उन्होंने कहा कि राज्य में 4 कृषि प्रशिक्षण एवं अनुसंधान इकाइयां स्थापित होंगी. इनमें एक चावल के लिए चुंचुड़ा में और दूसरी आम के लिए मालदा में होगी. इसके लिए 100 करोड़ रुपए का अग्रिम आवंटन होगा.


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मिथिलेश झा

लेखक के बारे में

By मिथिलेश झा

मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 32 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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