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कोल्हान विश्वविद्यालय : 100 आउटसोर्स कर्मियों को 4 माह से नहीं मिला वेतन, बच्चों की फीस देना हुआ मुश्किल

Updated at : 01 Apr 2024 2:32 PM (IST)
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कोल्हान विश्वविद्यालय : 100 आउटसोर्स कर्मियों को 4 माह से नहीं मिला वेतन, बच्चों की फीस देना हुआ मुश्किल

कोल्हान विश्वविद्यालय के एक-दो ठेकाकर्मी की स्थिति बेहद खराब है. चार महीने से वेतन नहीं मिलने की वजह से उनकी शारीरिक व मानसिक स्थिति बिगड़ रही है.

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कोल्हान विश्वविद्यालय (केयू) के 100 से अधिक आउटसोर्स कर्मियों को 4 महीने से वेतन नहीं मिला है. इससे उनकी आर्थिक स्थिति गंभीर हो गयी है.

केयू की सिंडिकेट मीटिंग से है आउटसोर्स कर्मियों को आस

अब ये सभी कर्मी विश्वविद्यालय की सिंडिकेट की मीटिंग में होने वाले फैसले की आस में अपनी सेवा को लगातार जारी रखे हुए हैं. जानकारी के अनुसार, विश्वविद्यालय के मुख्यालय समेत अन्य अंगीभूत कॉलेजों में बहाल ये कर्मी कंप्यूटर ऑपरेटर, सफाई कर्मी, पियुन व सुरक्षा गार्ड के रूप में अपनी सेवा प्रदान कर रहे हैं.

किसी को बच्चे की फीस, तो किसी को राशन की फिक्र है. एक-दो कर्मी की तो बहुत ही खराब हालत है, जिससे उनकी शारीरिक व मानसिक स्थिति बिगड़ गयी है.

एजेंसी के माध्यम से कोल्हान विश्वविद्यालय में हुई थी बहाली

मालूम हो कि कोल्हान विश्वविद्यालय के 100 से अधिक इन कर्मियों की बहाली आउटसोर्स कर्मी के रूप में एजेंसी के माध्यम से बहाल की गयी थी. एजेंसी का कार्यकाल दिसंबर में समाप्त हो गया. जिसके बाद विश्वविद्यालय प्रशासन, कर्मियों व एजेंसी के बीच वार्ता हुई, पर वेतन अब तक नहीं दिया गया.

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प्लेसमेंट एजेंसी को देना था दिसंबर वन जनवरी का वेतन

दिसंबर व जनवरी माह का वेतन एजेंसी को देना था, पर उनका कहना है कि विश्वविद्यालय से उसे इस मद में राशि उपलब्ध नहीं हुई. अब फरवरी व मार्च माह के वेतन पर कर्मियों की आस लगी है, जो विश्वविद्यालय के इंटर्नल सोर्स से दिए जाएंगे. पर स्थायी कुलपति के नहीं रहने से इसके लिए राजभवन से सिंडिकेट की बैठक में पास करना जरूरी है, तभी वेतन की राशि कर्मियों को उपलब्ध होगी.

आचार संहिता की वजह से टली नयी टेंडर की प्रक्रिया

इधर, कोल्हान विश्वविद्यालय (केयू) के आउटसोर्स कर्मियों की बहाली के लिए ऑनलाइन टेंडर किया गया था. इसके लिए 11 संवेदकों ने आवेदन किया. जिसके टेक्निकल बिड की जांच भी पूरी कर ली गयी. पर अब इसे चुनाव आचार संहिता के कारण होल्ड कर दिया गया है.

तेल-साबुन खरीदने तक के पैसे नहीं

नाम नहीं छापने की शर्त पर कहा कि काम के साथ पढ़ाई भी करते हैं. इसका खर्च उठाना पड़ता है. घर से पैसे मांगने में शर्म आती है. घर से कुछ मदद मिल जाती है, जिससे काम चल रहा है. एक कर्मी ने कहा कि खाने के लाले पड़ रहे हैं. तेल-साबुन खरीदने तक के पैसे नहीं हैं. इस माह वेतन नहीं मिलने से परेशानी बढ़ जाएगी.

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एक अन्य कर्मी ने कहा कि हमारा परिवार बड़ा है. कमाने वाला मेरे अलावा कोई नहीं है. अपने बच्चे के साथ छोटे भाई बहनों को पढ़ाने की जिम्मेदारी पूरी करनी मुश्किल है. उधारी भी बहुत बढ़ गयी है. अब दुकानदार राशन देने से कतराने लगे हैं.

एजेंसी के द्वारा बकाया राशि नहीं दिए जाने के संबंध में क्या निर्णय होगा, इस संबंध में राजभवन से निर्देश मांगा गया है. इन कर्मियों को डेली वेजेज के आधार पर वेतन देने के संबंध में भी सिंडिकेट की बैठक कराने के लिए राजभवन से निर्देश के लिए पत्राचार भी किया गया है. सिंडिकेट की मीटिंग संभवत: 15 अप्रैल के बाद होगी. इसके बाद कर्मियों को उनके दो माह की राशि विश्वविद्यालय के इंटरनल सोर्स से प्रदान कर दी जाएगी.

डॉ राजेंद्र भारती, कुलसचिव, कोल्हान विश्वविद्यालय
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