सांसद जोबा माझी और विधायक जगत माझी ने जीता ग्रामीणों का दिल, जमीन पर बैठकर किया भोजन

Published by : KumarVishwat Sen Updated At : 26 May 2026 8:58 PM

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ग्रामीणों के साथ पांत में बैठकर भोजन करतीं सांसद जोबा मांझी (ब्लू साड़ी में). फोटो: प्रभात खबर

West Singhbhum News: पश्चिमी सिंहभूम के लिगिर गांव में सांसद जोबा माझी और विधायक जगत माझी ने ग्रामीणों के साथ जमीन पर बैठकर सखुआ पत्तल में भोजन किया. उनकी सादगी और सहज व्यवहार ने लोगों का दिल जीत लिया. ग्रामीणों ने कहा कि दोनों नेता आज भी जनता और गांव की मिट्टी से जुड़े हुए हैं. इससे जुड़ी खबर नीचे पढ़ें.

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चक्रधरपुर से शीन अनवर की रिपोर्ट

West Singhbhum News: पश्चिमी सिंहभूम जिले के गुदड़ी प्रखंड स्थित सुदूरवर्ती लिगिर गांव में मंगलवार को ऐसा दृश्य देखने को मिला, जिसने ग्रामीणों का दिल जीत लिया. सिंहभूम लोकसभा क्षेत्र की सांसद जोबा माझी और मनोहरपुर विधानसभा क्षेत्र के विधायक जगत माझी ने ग्रामीणों के साथ जमीन पर बैठकर सखुआ पत्तल में भोजन किया. उनकी सादगी और सहज व्यवहार की चर्चा पूरे इलाके में हो रही है. सांसद जोबा माझी अपने पुत्र और विधायक जगत माझी के साथ गांव में आयोजित दुलसुनुम कार्यक्रम में शामिल होने पहुंची थीं. यह गांव घने जंगलों और पहाड़ियों के बीच बसा हुआ है, जहां आज भी लोग पारंपरिक जीवनशैली के साथ जीवन यापन करते हैं.

ग्रामीणों के बीच बैठकर किया सामूहिक भोजन

कार्यक्रम समाप्त होने के बाद आयोजकों की ओर से ग्रामीणों, अतिथियों और जनप्रतिनिधियों के लिए सामूहिक भोजन की व्यवस्था की गई थी. गांव की परंपरा के अनुसार जमीन पर दरी बिछाई गई थी और सखुआ के पत्तल में भोजन परोसा जा रहा था. इसी दौरान सांसद जोबा माझी और विधायक जगत माझी बिना किसी विशेष व्यवस्था की मांग किए सीधे ग्रामीणों के बीच जाकर जमीन पर बैठ गए. दोनों ने ग्रामीणों के साथ एक समान तरीके से भोजन किया और पूरे समय लोगों से बातचीत करते रहे. सांसद और विधायक को आम ग्रामीणों की तरह जमीन पर बैठकर भोजन करते देख कई लोग भावुक हो उठे. कुछ ग्रामीणों को शुरुआत में असहजता भी महसूस हुई कि इतने बड़े पद पर रहने वाले नेता उनके साथ जमीन पर बैठकर भोजन कर रहे हैं.

जनता से जुड़ाव ही सबसे बड़ी ताकत: जोबा माझी

ग्रामीणों की झिझक दूर करते हुए सांसद जोबा माझी ने कहा कि वे एक आंदोलनकारी और शहीद परिवार से आती हैं. उन्होंने कहा कि राजनीति में कोई व्यक्ति कितना भी बड़ा पद क्यों न हासिल कर ले, उसे अपनी मिट्टी और लोगों से जुड़ाव कभी नहीं छोड़ना चाहिए. उन्होंने कहा कि जल, जंगल और जमीन की लड़ाई लड़ने वाले लोगों की बदौलत ही वे आज इस मुकाम तक पहुंची हैं. जनता के बीच रहना और उनकी समस्याओं को समझना ही उनकी सबसे बड़ी ताकत है. सांसद ने कहा कि गांवों की संस्कृति, परंपरा और लोगों से जुड़ाव ही उनकी पहचान है. यही कारण है कि वे आज भी ग्रामीणों के बीच उसी सहजता के साथ बैठती हैं, जैसे अपने परिवार के लोगों के साथ बैठती हैं.

शहीद पति देवेंद्र माझी को किया याद

इस दौरान सांसद जोबा माझी ने अपने दिवंगत पति देवेंद्र माझी को भी याद किया. उन्होंने कहा कि देवेंद्र माझी ने सारंडा और पोड़ाहाट क्षेत्र के आदिवासी और ग्रामीणों के अधिकारों के लिए लंबा संघर्ष किया था. उन्होंने कहा कि अपने संघर्ष के दौरान ही वे शहीद हो गए, लेकिन उनका सपना हमेशा यही था कि आदिवासी और ग्रामीण समाज को सम्मान और अधिकार मिले. सांसद ने कहा कि संघर्ष और सादगी उनकी राजनीतिक विरासत का हिस्सा है और वे उसी रास्ते पर आगे बढ़ रही हैं.

ग्रामीणों ने की जमकर सराहना

सांसद और विधायक के इस व्यवहार की ग्रामीणों ने खुलकर सराहना की. लोगों ने कहा कि आज के समय में अधिकांश बड़े नेता आम लोगों से दूरी बनाकर चलते हैं, लेकिन जोबा माझी और जगत माझी लगातार गांव-गांव जाकर लोगों के बीच बैठते हैं और उनकी समस्याएं सुनते हैं. ग्रामीणों ने कहा कि जनप्रतिनिधियों का इस तरह जमीन पर बैठकर भोजन करना सिर्फ सादगी नहीं, बल्कि लोगों के प्रति सम्मान और अपनापन भी दर्शाता है. इससे आम लोगों को यह महसूस होता है कि उनके नेता आज भी उनसे जुड़े हुए हैं. कई ग्रामीणों ने कहा कि ऐसे दृश्य अब बहुत कम देखने को मिलते हैं. यही वजह है कि सांसद और विधायक का यह व्यवहार लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गया.

संघर्षों से भरा रहा है जोबा माझी का जीवन

गौरतलब है कि सांसद जोबा माझी का राजनीतिक और सामाजिक जीवन संघर्षों से भरा रहा है. उनके पति देवेंद्र माझी विधायक थे, लेकिन उस दौरान भी जोबा माझी परिवार की जिम्मेदारी निभाने के लिए चक्रधरपुर के इतवारी बाजार में सब्जी बेचती थीं. ग्रामीणों का कहना है कि सांसद बनने के बाद भी उनकी जीवनशैली में ज्यादा बदलाव नहीं आया है. वे आज भी खेती-बाड़ी और घरेलू कार्यों से जुड़ी रहती हैं और गांवों से लगातार संपर्क बनाए रखती हैं.

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सादगी बनी पहचान

जोबा माझी की पहचान एक ऐसी जनप्रतिनिधि के रूप में बनी है, जो जमीन से जुड़ी हुई हैं और ग्रामीण जीवन को करीब से समझती हैं. वहीं विधायक जगत माझी भी लगातार क्षेत्र के गांवों का दौरा कर लोगों की समस्याओं को सुनते रहते हैं. लिगिर गांव में जमीन पर बैठकर भोजन करने की इस घटना ने एक बार फिर यह संदेश दिया कि जनता से सीधा जुड़ाव और सादगी ही किसी जनप्रतिनिधि की सबसे बड़ी ताकत होती है. ग्रामीणों ने कहा कि ऐसे नेता ही लोगों के दिलों में खास जगह बनाते हैं.

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KumarVishwat Sen

लेखक के बारे में

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कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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